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Sirsa News: नाबालिग को मिली राहत, कोर्ट ने गर्भपात की दी अनुमति
Tue, 18 Aug 2026 12:13 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
Updated Tue, 18 Aug 2026 12:13 AM IST
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मां ने दायर की थी याचिका, मेडिकल बोर्ड की राय के बाद न्यायाधीश ने सुनाया फैसला
24 सप्ताह की कानूनी सीमा पार कर चुकी थी नाबालिग, मां की सहमति जरूरी
सिरसा। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने सिरसा निवासी 17 वर्षीय नाबालिग के गर्भ को मेडिकल तरीके से खत्म करने की अनुमति दे दी है। कोर्ट ने पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च, चंडीगढ़ को प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए हैं। हालांकि, इसके लिए नाबालिग की मां की लिखित सहमति अनिवार्य होगी।
नाबालिग की मां ने अधिवक्ता के माध्यम से 4 अगस्त को हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिका में बताया कि उसकी बेटी गर्भ को चिकित्सकीय रूप से समाप्त करवाना चाहती है। इसके लिए वह नागरिक अस्पताल सिरसा गई थी जहां मेडिकल बोर्ड ने उसकी जांच की।
बोर्ड ने 14 जुलाई 2026 को अपनी रिपोर्ट में उसे बेहतर चिकित्सा सुविधाओं वाले अस्पताल में रेफर करने की सिफारिश की थी। मामले की सुनवाई के दौरान पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च, चंडीगढ़ की ओर से पेश अधिवक्ता ने कहा कि गर्भ को चिकित्सकीय रूप से समाप्त करने की संभावना का आकलन सक्षम मेडिकल बोर्ड द्वारा किया जाना जरूरी है।
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इसके बाद याचिकाकर्ता की ओर से कोर्ट को बताया गया कि नाबालिग 7 अगस्त को सुबह 10 बजे मेडिकल सुपरिटेंडेंट के समक्ष जांच के लिए उपस्थित होगी। हाईकोर्ट ने 6 अगस्त को पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च , चंडीगढ़ को उचित रूप से गठित मेडिकल बोर्ड से नाबालिग की जांच करवाने के निर्देश दिए।
इसके बाद मेडिकल बोर्ड ने जांच कर अपनी राय दी कि गर्भ को चिकित्सकीय रूप से समाप्त किया जा सकता है। 13 अगस्त 2026 तक गर्भ की अवधि 29 सप्ताह व दो दिन थी। मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी एक्ट, 1971 के तहत सामान्य तौर पर गर्भपात की निर्धारित सीमा 24 सप्ताह है।
हालांकि, कोर्ट के समक्ष इसी तरह के मामले में सुप्रीम कोर्ट की ओर से नाबालिग को मां की लिखित सहमति पर गर्भावस्था समाप्त करने की अनुमति देने का उदाहरण रखा गया।
मां ने लिखित सहमति देनी की जताई इच्छा
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि नाबालिग की मां ने भी लिखित सहमति देने की इच्छा जताई है। 14 अगस्त को न्यायाधीश त्रिभुवन दहिया ने याचिका का निपटारा करते हुए पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च , चंडीगढ़ को नाबालिग को गर्भपात की अनुमति दी। साथ ही यह स्पष्ट किया कि प्रक्रिया उसकी मां की आवश्यक लिखित सहमति के बाद ही पूरी की जाए। संवाद
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24 सप्ताह की कानूनी सीमा पार कर चुकी थी नाबालिग, मां की सहमति जरूरी
सिरसा। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने सिरसा निवासी 17 वर्षीय नाबालिग के गर्भ को मेडिकल तरीके से खत्म करने की अनुमति दे दी है। कोर्ट ने पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च, चंडीगढ़ को प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए हैं। हालांकि, इसके लिए नाबालिग की मां की लिखित सहमति अनिवार्य होगी।
नाबालिग की मां ने अधिवक्ता के माध्यम से 4 अगस्त को हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिका में बताया कि उसकी बेटी गर्भ को चिकित्सकीय रूप से समाप्त करवाना चाहती है। इसके लिए वह नागरिक अस्पताल सिरसा गई थी जहां मेडिकल बोर्ड ने उसकी जांच की।
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बोर्ड ने 14 जुलाई 2026 को अपनी रिपोर्ट में उसे बेहतर चिकित्सा सुविधाओं वाले अस्पताल में रेफर करने की सिफारिश की थी। मामले की सुनवाई के दौरान पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च, चंडीगढ़ की ओर से पेश अधिवक्ता ने कहा कि गर्भ को चिकित्सकीय रूप से समाप्त करने की संभावना का आकलन सक्षम मेडिकल बोर्ड द्वारा किया जाना जरूरी है।
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इसके बाद याचिकाकर्ता की ओर से कोर्ट को बताया गया कि नाबालिग 7 अगस्त को सुबह 10 बजे मेडिकल सुपरिटेंडेंट के समक्ष जांच के लिए उपस्थित होगी। हाईकोर्ट ने 6 अगस्त को पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च , चंडीगढ़ को उचित रूप से गठित मेडिकल बोर्ड से नाबालिग की जांच करवाने के निर्देश दिए।
इसके बाद मेडिकल बोर्ड ने जांच कर अपनी राय दी कि गर्भ को चिकित्सकीय रूप से समाप्त किया जा सकता है। 13 अगस्त 2026 तक गर्भ की अवधि 29 सप्ताह व दो दिन थी। मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी एक्ट, 1971 के तहत सामान्य तौर पर गर्भपात की निर्धारित सीमा 24 सप्ताह है।
हालांकि, कोर्ट के समक्ष इसी तरह के मामले में सुप्रीम कोर्ट की ओर से नाबालिग को मां की लिखित सहमति पर गर्भावस्था समाप्त करने की अनुमति देने का उदाहरण रखा गया।
मां ने लिखित सहमति देनी की जताई इच्छा
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि नाबालिग की मां ने भी लिखित सहमति देने की इच्छा जताई है। 14 अगस्त को न्यायाधीश त्रिभुवन दहिया ने याचिका का निपटारा करते हुए पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च , चंडीगढ़ को नाबालिग को गर्भपात की अनुमति दी। साथ ही यह स्पष्ट किया कि प्रक्रिया उसकी मां की आवश्यक लिखित सहमति के बाद ही पूरी की जाए। संवाद