{"_id":"69ac2cfa3ffeb9625e0fd4d9","slug":"adopt-natural-farming-for-a-healthy-and-prosperous-nation-dr-parminder-sonipat-news-c-197-1-snp1014-150536-2026-03-07","type":"story","status":"publish","title_hn":"स्वस्थ और खुशहाल राष्ट्र के लिए अपनाए प्राकृतिक खेती : डॉ. परमिंदर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
स्वस्थ और खुशहाल राष्ट्र के लिए अपनाए प्राकृतिक खेती : डॉ. परमिंदर
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
Updated Sat, 07 Mar 2026 07:19 PM IST
विज्ञापन
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
गोहाना। डॉ. परमिंदर सिंह ने कहा कि स्वस्थ और खुशहाल राष्ट्र के निर्माण के लिए प्राकृतिक खेती अपनाना जरूरी है। राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के तहत हरियाणा में एक लाख एकड़ क्षेत्र में प्राकृतिक खेती का लक्ष्य रखा गया है। यह बात उन्होंने गोहाना में चल रहे तीन दिवसीय प्राकृतिक खेती पर प्रशिक्षण शिविर के समापन पर कही।
उन्होंने कहा कि आज पैदावार बढ़ाने के लिए रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों का ज्यादा इस्तेमाल किया जा रहा है। इससे जमीन की उर्वरा शक्ति कमजोर हो रही है। इसके साथ ही कैंसर, हृदय रोग और मधुमेह जैसी गंभीर बीमारियां बढ़ रही हैं।
उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती अपनाने से आने वाली पीढ़ी को अच्छा स्वास्थ्य, स्वस्थ मिट्टी, स्वच्छ हवा और साफ पानी मिल सकेगा। साथ ही देश की सब्सिडी और विदेशी मुद्रा की भी बचत होगी। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती समय की जरूरत और भविष्य की खेती है।
उपमंडल कृषि अधिकारी डॉ. राजेंद्र मेहरा ने किसानों को प्राकृतिक खेती के लिए हरियाणा सरकार की योजनाओं और अनुदान के बारे में बताया। हरियाणा कृषि प्रबंधन एवं विस्तार संस्थान, जींद के सहयोग से आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम में 22 गांवों के 60 किसानों ने भाग लिया।
इस मौके पर मास्टर ट्रेनर व प्राकृतिक किसान शैशन मलिक ने अपने अनुभव साझा किए। कार्यक्रम के अंत में सभी किसानों को प्रमाण पत्र भी वितरित किए गए।
Trending Videos
गोहाना। डॉ. परमिंदर सिंह ने कहा कि स्वस्थ और खुशहाल राष्ट्र के निर्माण के लिए प्राकृतिक खेती अपनाना जरूरी है। राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के तहत हरियाणा में एक लाख एकड़ क्षेत्र में प्राकृतिक खेती का लक्ष्य रखा गया है। यह बात उन्होंने गोहाना में चल रहे तीन दिवसीय प्राकृतिक खेती पर प्रशिक्षण शिविर के समापन पर कही।
उन्होंने कहा कि आज पैदावार बढ़ाने के लिए रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों का ज्यादा इस्तेमाल किया जा रहा है। इससे जमीन की उर्वरा शक्ति कमजोर हो रही है। इसके साथ ही कैंसर, हृदय रोग और मधुमेह जैसी गंभीर बीमारियां बढ़ रही हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती अपनाने से आने वाली पीढ़ी को अच्छा स्वास्थ्य, स्वस्थ मिट्टी, स्वच्छ हवा और साफ पानी मिल सकेगा। साथ ही देश की सब्सिडी और विदेशी मुद्रा की भी बचत होगी। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती समय की जरूरत और भविष्य की खेती है।
उपमंडल कृषि अधिकारी डॉ. राजेंद्र मेहरा ने किसानों को प्राकृतिक खेती के लिए हरियाणा सरकार की योजनाओं और अनुदान के बारे में बताया। हरियाणा कृषि प्रबंधन एवं विस्तार संस्थान, जींद के सहयोग से आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम में 22 गांवों के 60 किसानों ने भाग लिया।
इस मौके पर मास्टर ट्रेनर व प्राकृतिक किसान शैशन मलिक ने अपने अनुभव साझा किए। कार्यक्रम के अंत में सभी किसानों को प्रमाण पत्र भी वितरित किए गए।