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Sonipat News: राजकीय विद्यालयों में पढ़ाई के साथ नृत्य, गायन और कुकिंग का से बढ़ेगा बच्चों का ज्ञान
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
Updated Fri, 09 Jan 2026 02:05 AM IST
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फोटो :22: अंजू दहिया
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सोनीपत। राजकीय विद्यालयों में पढ़ाई को बोझ से मुक्त कर रुचिकर और व्यावहारिक बनाने की दिशा में कदम उठाया जा रहा है। नए शैक्षणिक सत्र से विद्यार्थियों को नृत्य, गायन, संगीत, कुकिंग, कटिंग, बुनाई और सिलाई जैसी गतिविधियों के माध्यम से रसायन विज्ञान और कला विषय पढ़ाए जाएंगे।
विद्यालय शिक्षा निदेशालय ने सोनीपत जिले के दो शिक्षकों का राज्यस्तरीय प्रशिक्षण के लिए चयन किया है। समृद्धि योजना के तहत गांव भठगांव स्थित राजकीय कन्या विद्यालय में कार्यरत रसायन विज्ञान की शिक्षिका एवं राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त अंजू दहिया तथा गांव कंवाली स्थित राजकीय उच्च विद्यालय के कला शिक्षक बिजेंद्र कुमार को चयनित किया गया है।
विद्यालय शिक्षा निदेशालय की तरफ से प्रशिक्षण कार्यक्रम की तिथि शीघ्र निर्धारित की जाएगी। निदेशालय का उद्देश्य नई शिक्षा नीति-2020 के तहत शिक्षा को जीवन से जोड़ना है ताकि विद्यार्थी विषयों को बोझ न समझें बल्कि रुचि के साथ सीखें।
योजना में कई गतिविधियां शामिल कीं
विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास और विषयगत समझ को मजबूत करने के लिए इस योजना में कई गतिविधियां शामिल की गई हैं। इनमें नृत्य, लोक गीत, संगीत, कविता, संगीतमय सारणी, साथ ही खाना बनाना, कटिंग, बुनाई, सिलाई जैसी गतिविधियां शामिल होंगी। इसमें प्रदर्शन कला के अंतर्गत हरियाणा के लोक नृत्य, लोक गीत, संगीत और कविता को पढ़ाई से जोड़ा जाएगा। दृश्य कला में बुनाई, सिलाई, वस्त्रों की रंगाई और धागे के कार्य के माध्यम से रचनात्मकता के साथ-साथ वस्त्र अपशिष्ट को कम करने जैसे व्यावहारिक पहलुओं पर जोर दिया जाएगा। पारंपरिक कला में गेरू, चूना, मिट्टी और गोबर से बने उपलों के निर्माण में उपयोग होने वाले रसायनों, रंगोली, मंडला कला और रंग कार्ड जैसी गतिविधियों के जरिए विज्ञान और कला का समन्वय किया जाएगा।
शिक्षकों ने बताया योजना को प्रभावी
चयनित शिक्षकों अंजू दहिया और बिजेंद्र कुमार का कहना है कि रसायन विज्ञान और कला एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हैं। यदि सभी शिक्षक समृद्धि योजना को अपनाएं तो विद्यार्थियों को विषय पहले से कहीं अधिक सरल और रोचक ढंग से समझाया जा सकेगा। एक बार बच्चों में रुचि जागृत हो गई तो वे अपने विषयों में बेहतर प्रदर्शन करेंगे।
शिक्षा मंत्रालय की समृद्धि योजना से राजकीय विद्यालयों में गतिविधि आधारित शिक्षण को बढ़ावा मिलेगा। चयनित शिक्षकों को राज्यस्तर पर प्रशिक्षण देकर उन्हें विद्यालयों में इस नवाचार को लागू करने की जिम्मेदारी दी जाएगी, जिससे शिक्षा अधिक प्रभावी, सरल और विद्यार्थियों के अनुकूल बन सके। -नवीन गुलिया, जिला शिक्षा अधिकारी।
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विद्यालय शिक्षा निदेशालय ने सोनीपत जिले के दो शिक्षकों का राज्यस्तरीय प्रशिक्षण के लिए चयन किया है। समृद्धि योजना के तहत गांव भठगांव स्थित राजकीय कन्या विद्यालय में कार्यरत रसायन विज्ञान की शिक्षिका एवं राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त अंजू दहिया तथा गांव कंवाली स्थित राजकीय उच्च विद्यालय के कला शिक्षक बिजेंद्र कुमार को चयनित किया गया है।
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विद्यालय शिक्षा निदेशालय की तरफ से प्रशिक्षण कार्यक्रम की तिथि शीघ्र निर्धारित की जाएगी। निदेशालय का उद्देश्य नई शिक्षा नीति-2020 के तहत शिक्षा को जीवन से जोड़ना है ताकि विद्यार्थी विषयों को बोझ न समझें बल्कि रुचि के साथ सीखें।
योजना में कई गतिविधियां शामिल कीं
विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास और विषयगत समझ को मजबूत करने के लिए इस योजना में कई गतिविधियां शामिल की गई हैं। इनमें नृत्य, लोक गीत, संगीत, कविता, संगीतमय सारणी, साथ ही खाना बनाना, कटिंग, बुनाई, सिलाई जैसी गतिविधियां शामिल होंगी। इसमें प्रदर्शन कला के अंतर्गत हरियाणा के लोक नृत्य, लोक गीत, संगीत और कविता को पढ़ाई से जोड़ा जाएगा। दृश्य कला में बुनाई, सिलाई, वस्त्रों की रंगाई और धागे के कार्य के माध्यम से रचनात्मकता के साथ-साथ वस्त्र अपशिष्ट को कम करने जैसे व्यावहारिक पहलुओं पर जोर दिया जाएगा। पारंपरिक कला में गेरू, चूना, मिट्टी और गोबर से बने उपलों के निर्माण में उपयोग होने वाले रसायनों, रंगोली, मंडला कला और रंग कार्ड जैसी गतिविधियों के जरिए विज्ञान और कला का समन्वय किया जाएगा।
शिक्षकों ने बताया योजना को प्रभावी
चयनित शिक्षकों अंजू दहिया और बिजेंद्र कुमार का कहना है कि रसायन विज्ञान और कला एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हैं। यदि सभी शिक्षक समृद्धि योजना को अपनाएं तो विद्यार्थियों को विषय पहले से कहीं अधिक सरल और रोचक ढंग से समझाया जा सकेगा। एक बार बच्चों में रुचि जागृत हो गई तो वे अपने विषयों में बेहतर प्रदर्शन करेंगे।
शिक्षा मंत्रालय की समृद्धि योजना से राजकीय विद्यालयों में गतिविधि आधारित शिक्षण को बढ़ावा मिलेगा। चयनित शिक्षकों को राज्यस्तर पर प्रशिक्षण देकर उन्हें विद्यालयों में इस नवाचार को लागू करने की जिम्मेदारी दी जाएगी, जिससे शिक्षा अधिक प्रभावी, सरल और विद्यार्थियों के अनुकूल बन सके। -नवीन गुलिया, जिला शिक्षा अधिकारी।

फोटो :22: अंजू दहिया