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ताड़ासन करने से शरीर में आती है स्थिरता : रविंद्र
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
Updated Wed, 10 Jun 2026 05:41 AM IST
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फोटो : सोनीपत के आईटीआई कैंपस में शिविर के दौरान योगाभ्यास करते लोग। स्रोत: समिति
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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संवाद न्यूज एजेंसी
सोनीपत। लक्ष्य स्वस्थ सोनीपत समिति की ओर से आईटीआई कैंपस में योग शिविर का आयोजन किया जा रहा है। योग साधकों को ताड़ासन का अभ्यास करवाते हुए समिति के महामंत्री रविंद्र कुमार ने बताया कि ताड़ासन के नियमित अभ्यास से शरीर में स्थिरता आती है।
यह मेरुदंड से संबंधित नाड़ियों के रक्त संचय को ठीक करने में भी सहायक है। उन्होंने उपस्थित साधकों को कमर, गर्दन, घुटनों के सूक्ष्म व्यायाम के साथ-साथ यौगिक जॉगिंग, सूर्य नमस्कार, कपालभांति, भ्रामरी, अनुलोम-विलोम, शीतली प्राणायामों का अभ्यास भी करवाया।
इस दौरान प्रधान लक्ष्मीनारायण, हरिओम, जगदीश, बलवान, त्रिलोक, नकुल, रुक्मणि, गुड्डी, वीरमति, अनिता, नीरा, रीना भी मौजूद रहे।
ताड़ासन करने की विधि
दाड़ासन में दोनों पैरों के बीच दो इंच की दूरी रखते हुए सांस अंदर लेकर हाथों को सामने की ओर कंधों के स्तर तक लाते हैं। दोनों हाथों की अंगुलियों को आपस में एक दूसरे में फंसाकर सांस भरते हुए हथेलियों को बाहर की ओर रखते हुए पैर के पंजों को जमीन पर स्थिर रखते एड़ियां उठाते हुए दोनों भुजाओं को सिर से ऊपर कानों की सीध में उठाते हैं। पैर की अंगुलियों पर अपना संतुलन बनाते हुए इस स्थिति में 10 से 30 सेकंड तक रुकने के बाद एड़ियों को वापस जमीन पर लेकर आते हैं। सांस को शरीर से बाहर छोड़ते हुए हाथ की अंगुलियों को अलग अलग करके भुजाओं को वापस प्रारंभिक अवस्था में लाते हैं।
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सावधानियां
आर्थराइटिस व वैरिकोज वेन्स संबंधित विकार और चक्कर आने जैसी समस्या होने पर इस आसन को नहीं करना चाहिए।
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सोनीपत। लक्ष्य स्वस्थ सोनीपत समिति की ओर से आईटीआई कैंपस में योग शिविर का आयोजन किया जा रहा है। योग साधकों को ताड़ासन का अभ्यास करवाते हुए समिति के महामंत्री रविंद्र कुमार ने बताया कि ताड़ासन के नियमित अभ्यास से शरीर में स्थिरता आती है।
यह मेरुदंड से संबंधित नाड़ियों के रक्त संचय को ठीक करने में भी सहायक है। उन्होंने उपस्थित साधकों को कमर, गर्दन, घुटनों के सूक्ष्म व्यायाम के साथ-साथ यौगिक जॉगिंग, सूर्य नमस्कार, कपालभांति, भ्रामरी, अनुलोम-विलोम, शीतली प्राणायामों का अभ्यास भी करवाया।
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इस दौरान प्रधान लक्ष्मीनारायण, हरिओम, जगदीश, बलवान, त्रिलोक, नकुल, रुक्मणि, गुड्डी, वीरमति, अनिता, नीरा, रीना भी मौजूद रहे।
ताड़ासन करने की विधि
दाड़ासन में दोनों पैरों के बीच दो इंच की दूरी रखते हुए सांस अंदर लेकर हाथों को सामने की ओर कंधों के स्तर तक लाते हैं। दोनों हाथों की अंगुलियों को आपस में एक दूसरे में फंसाकर सांस भरते हुए हथेलियों को बाहर की ओर रखते हुए पैर के पंजों को जमीन पर स्थिर रखते एड़ियां उठाते हुए दोनों भुजाओं को सिर से ऊपर कानों की सीध में उठाते हैं। पैर की अंगुलियों पर अपना संतुलन बनाते हुए इस स्थिति में 10 से 30 सेकंड तक रुकने के बाद एड़ियों को वापस जमीन पर लेकर आते हैं। सांस को शरीर से बाहर छोड़ते हुए हाथ की अंगुलियों को अलग अलग करके भुजाओं को वापस प्रारंभिक अवस्था में लाते हैं।
सावधानियां
आर्थराइटिस व वैरिकोज वेन्स संबंधित विकार और चक्कर आने जैसी समस्या होने पर इस आसन को नहीं करना चाहिए।