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Sonipat News: रिठाला-खरखौदा मेट्रो कनेक्टिविटी को लेकर प्रयास किए, सरकार ने योजना को ठंडे बस्ते में डाला
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
Updated Mon, 15 Jun 2026 02:12 AM IST
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फोटो: सोनीपत के खरखौदा स्थित आवास पर प्रेसवार्ता के दौरान पूर्व मुख्य संसदीय सचिव जयवीर सिंह।
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खरखौदा। वर्ष 2009 से 2014 के दौरान कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं की नींव रखी गई थी लेकिन बाद में उन पर अपेक्षित गति से काम नहीं हुआ। रिठाला से खरखौदा तक मेट्रो कनेक्टिविटी को लेकर प्रयास किए लेकिन सरकार ने ठंडे बस्ते में योजना को डाल दिया।
यह आरोप क्षेत्र के विकास को लेकर पूर्व मुख्य संसदीय सचिव जयवीर सिंह ने मौजूदा सरकार पर निशाना साधते हुए कही। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले वर्षों में क्षेत्र में कोई बड़ी नई विकास योजना नहीं लाई गई और पहले शुरू किए गए कार्यों का रखरखाव भी ठीक ढंग से नहीं हो पा रहा है।
उन्होंने कहा कि ग्रामीण इलाकों में सड़कों की स्थिति खराब है और पानी निकासी व्यवस्था भी लोगों की परेशानी का कारण बनी हुई है। पूर्व विधायक ने कहा कि 2009 में चुनाव जीतने के बाद उन्होंने गांवों और वार्डों में जाकर लोगों की समस्याओं को समझा और उसी आधार पर विकास योजनाएं तैयार की।
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उस समय आयोजित कायाकल्प रैली में लगभग 800 करोड़ रुपये की परियोजनाओं का खाका रखा गया था। इसमें आईएमटी, उपमंडल स्तर की सुविधाएं, बस स्टैंड, मेडिकल सुविधाएं, बाईपास, काॅलेज, आईटीआई और जल घर जैसे काम शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि उनके कार्यकाल में सांसद दीपेंद्र हुड्डा के साथ मिलकर रिठाला से खरखौदा तक मेट्रो कनेक्टिविटी को लेकर प्रयास किए गए थे लेकिन भाजपा सरकार आते ही इसे ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। उन्हाेने मांग रखी कि शहर के भीतर बढ़ते ट्रैफिक दबाव को देखते हुए बस स्टैंड को बाईपास के बाहर विकसित किया जाए।
साथ ही क्षेत्र में निवेश और बाहरी आगंतुकों की सुविधा के लिए पर्यटन विभाग के माध्यम से टूरिज्म काॅम्प्लेक्स और गेस्ट हाउस बनाने की भी मांग की। नगर पालिका से जुड़े विवादों पर उन्होंने कहा कि सरकार के प्रतिनिधियों को बैठकर मसलों का समाधान करना चाहिए ताकि विकास कार्य प्रभावित न हों।
यह आरोप क्षेत्र के विकास को लेकर पूर्व मुख्य संसदीय सचिव जयवीर सिंह ने मौजूदा सरकार पर निशाना साधते हुए कही। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले वर्षों में क्षेत्र में कोई बड़ी नई विकास योजना नहीं लाई गई और पहले शुरू किए गए कार्यों का रखरखाव भी ठीक ढंग से नहीं हो पा रहा है।
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उन्होंने कहा कि ग्रामीण इलाकों में सड़कों की स्थिति खराब है और पानी निकासी व्यवस्था भी लोगों की परेशानी का कारण बनी हुई है। पूर्व विधायक ने कहा कि 2009 में चुनाव जीतने के बाद उन्होंने गांवों और वार्डों में जाकर लोगों की समस्याओं को समझा और उसी आधार पर विकास योजनाएं तैयार की।
उस समय आयोजित कायाकल्प रैली में लगभग 800 करोड़ रुपये की परियोजनाओं का खाका रखा गया था। इसमें आईएमटी, उपमंडल स्तर की सुविधाएं, बस स्टैंड, मेडिकल सुविधाएं, बाईपास, काॅलेज, आईटीआई और जल घर जैसे काम शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि उनके कार्यकाल में सांसद दीपेंद्र हुड्डा के साथ मिलकर रिठाला से खरखौदा तक मेट्रो कनेक्टिविटी को लेकर प्रयास किए गए थे लेकिन भाजपा सरकार आते ही इसे ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। उन्हाेने मांग रखी कि शहर के भीतर बढ़ते ट्रैफिक दबाव को देखते हुए बस स्टैंड को बाईपास के बाहर विकसित किया जाए।
साथ ही क्षेत्र में निवेश और बाहरी आगंतुकों की सुविधा के लिए पर्यटन विभाग के माध्यम से टूरिज्म काॅम्प्लेक्स और गेस्ट हाउस बनाने की भी मांग की। नगर पालिका से जुड़े विवादों पर उन्होंने कहा कि सरकार के प्रतिनिधियों को बैठकर मसलों का समाधान करना चाहिए ताकि विकास कार्य प्रभावित न हों।