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आधुनिकता के चक्कर में अपनी सभ्यता से हो रहे दूर : डॉ. हरेंद्र
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
Updated Mon, 12 Jan 2026 01:45 AM IST
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सोनीपत में डॉ. भीमराव अंबेडकर राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय मूट कोर्ट हॉल में राष्ट्रीय स्वयंसेव
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सोनीपत। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 100 साल पूरे होने पर जिला सोनीपत इकाई ने नागरिक गोष्ठी कराई। डॉ. भीमराव अंबेडकर राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय मूट कोर्ट हॉल में इसकी अध्यक्षता निफ्टम के निदेशक डॉ. हरेंद्र सिंह ओबरॉय ने की। मुख्य वक्ता प्रांत प्रचारक प्रमुख राजेश और विशेष वक्ता कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. वीरेंद्र सिंह रहे।
कार्यक्रम में 250 से अधिक डीन, प्रिंसिपल, डायरेक्टर, रजिस्ट्रार, कुलपति, शिक्षक आदि उपस्थित रहे। डॉ. हरेंद्र सिंह ने कहा कि संघ का मूल विचार समाज को जोड़ना है। आधुनिकता को अपनाने के चक्कर में हम अपनी सभ्यता और परंपराओं से दूर हो रहे हैं।
उन्होंने कहा कि यदि समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाना है तो उसकी शुरुआत स्वयं से ही करनी होगी। कुलसचिव डॉ. वीरेंद्र सिंह ने कहा कि पंच परिवर्तन का पहला विषय परिवार प्रबोधन है। पूर्व पीढ़ियों ने दादी-नानी की कहानियों के माध्यम से मौखिक इतिहास और संस्कार सीखे लेकिन आज मोबाइल और टीवी ने उनका स्थान ले लिया है।
यदि हम मौखिक परंपराओं से दूर होंगे तो हमारे योद्धाओं और इतिहास को विकृत रूप में प्रस्तुत किया जाएगा। उन्होंने परिवार के साथ मिल-बांटकर कम से कम दिन में एक बार भोजन करने, सप्ताह में यज्ञ-पाठ एवं हनुमान चालीसा के पाठ का आग्रह किया।
मुख्य वक्ता राजेश ने कहा कि आज हम नौवें गुरु तेग बहादुर के बलिदान की 350वीं वर्षगांठ भी स्मरण कर रहे हैं। राष्ट्र और समाज के हित में कई संगठन बने उसी परंपरा में वर्ष 1925 में डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना की।
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कार्यक्रम में 250 से अधिक डीन, प्रिंसिपल, डायरेक्टर, रजिस्ट्रार, कुलपति, शिक्षक आदि उपस्थित रहे। डॉ. हरेंद्र सिंह ने कहा कि संघ का मूल विचार समाज को जोड़ना है। आधुनिकता को अपनाने के चक्कर में हम अपनी सभ्यता और परंपराओं से दूर हो रहे हैं।
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उन्होंने कहा कि यदि समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाना है तो उसकी शुरुआत स्वयं से ही करनी होगी। कुलसचिव डॉ. वीरेंद्र सिंह ने कहा कि पंच परिवर्तन का पहला विषय परिवार प्रबोधन है। पूर्व पीढ़ियों ने दादी-नानी की कहानियों के माध्यम से मौखिक इतिहास और संस्कार सीखे लेकिन आज मोबाइल और टीवी ने उनका स्थान ले लिया है।
यदि हम मौखिक परंपराओं से दूर होंगे तो हमारे योद्धाओं और इतिहास को विकृत रूप में प्रस्तुत किया जाएगा। उन्होंने परिवार के साथ मिल-बांटकर कम से कम दिन में एक बार भोजन करने, सप्ताह में यज्ञ-पाठ एवं हनुमान चालीसा के पाठ का आग्रह किया।
मुख्य वक्ता राजेश ने कहा कि आज हम नौवें गुरु तेग बहादुर के बलिदान की 350वीं वर्षगांठ भी स्मरण कर रहे हैं। राष्ट्र और समाज के हित में कई संगठन बने उसी परंपरा में वर्ष 1925 में डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना की।