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Sonipat News: छत और आंगन हरियाली ,से सजे, खुशबू से महकी बगिया
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
Updated Mon, 12 Jan 2026 01:41 AM IST
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फोटो :11: सोनीपत के सेक्टर-15 स्थित अपनी बगिया में डॉ. अनीता सिंह।
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सोनीपत। आपाधापी और कंक्रीट के बीच शहर में जब कहीं हरियाली से भरा आंगन और फूलों से सजी छत दिखाई दे जाए तो मन प्रफुल्लित हो उठता है। ऐसा ही सुकून भरा दृश्य डॉ. अनीता सिंह के घर में देखने के लिए मिलता है। उन्होंने छत और आंगन को प्रकृति का एक जीवंत और सुगंधित संसार बना दिया है।
सेक्टर-15 स्थित डॉ. अनीता सिंह के 400 गज में बने घर की बगिया में कदम रखते ही खुशबू मन को मोह लेती है। गुलाबरी गुलाब अपनी कोमल पंखुड़ियों से आकर्षित करते हैं तो रोज मेरी गोल्ड और सॉन्ग ऑफ मेरी गोल्ड की सुनहरी आभा पूरे वातावरण को उल्लास से भर देती है।
गुड़हल के खिले हुए फूल बगिया की सुंदरता को और निखारते हैं। बगिया की विशेषता केवल रंगों तक सीमित नहीं है बल्कि यहां सुगंधों का भी अद्भुत संगम देखने के लिए मिलता है। हरसिंगार की मंद-मंद खुशबू, वैजयंती और रजनीगंधा कीमहक, मधुमालती की लताओं से फैलती सुगंध पूरे घर को प्राकृतिक ऊर्जा से भर देती है।
आस्था और स्वास्थ्य का प्रतीक तुलसी का पौधा आंगन की शोभा बढ़ाता है। वहीं स्नैक प्लांट जैसे इनडोर पौधे घर के भीतर शुद्ध हवा और सकारात्मक वातावरण बनाए रखते हैं। इसके साथ ही ड्रैगन ट्री, बांस, गिलोय, पत्थरचट्टा व पाम की सात अलग-अलग वैरायटी हैं।
आंगन में फलदार पौधे लगाए गए हैं ताकि घर के सदस्यों को ताजे फल सहज ही मिल सकें। इनमें आम, आड़ू, जामुन, चीकू, पपीता व संतरा शामिल हैं। घर में पीछे की ओर डॉ. अनीता सिंह ने किचन गॉर्डन भी विकसित किया है जहां उगी ताजी सब्जियां न केवल स्वास्थ्यवर्धक हैं बल्कि आत्मनिर्भरता का संदेश भी देती हैं।
सीमित स्थान में तैयार यह किचन गॉर्डन बताता है कि थोड़े प्रयास से हर घर प्रकृति से जुड़ सकता है। टीकाराम महाविद्यालय की सेवानिवृत्त उप प्राचार्य डॉ. अनीता सिंह कहती है कि पर्यावरण संरक्षण का सबसे प्रभावी माध्यम पौधरोपण है जबकि आंतरिक संरक्षण के लिए मेडिटेशन अत्यंत आवश्यक है।
उनके लिए बगिया केवल पौधों का संग्रह नहीं बल्कि ध्यान, संतुलन और सकारात्मक जीवन शैली की प्रतीक है। उनकी यह बगिया समाज को प्रेरणा देती है कि हर व्यक्ति को अपने घर की छत या आंगन में थोड़ी सी हरियाली सजा लेनी चाहिए। इससे न केवल पर्यावरण सुरक्षित होगा बल्कि जीवन भी अधिक स्वस्थ, शांत और आनंदमय बन सकेगा।
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सेक्टर-15 स्थित डॉ. अनीता सिंह के 400 गज में बने घर की बगिया में कदम रखते ही खुशबू मन को मोह लेती है। गुलाबरी गुलाब अपनी कोमल पंखुड़ियों से आकर्षित करते हैं तो रोज मेरी गोल्ड और सॉन्ग ऑफ मेरी गोल्ड की सुनहरी आभा पूरे वातावरण को उल्लास से भर देती है।
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गुड़हल के खिले हुए फूल बगिया की सुंदरता को और निखारते हैं। बगिया की विशेषता केवल रंगों तक सीमित नहीं है बल्कि यहां सुगंधों का भी अद्भुत संगम देखने के लिए मिलता है। हरसिंगार की मंद-मंद खुशबू, वैजयंती और रजनीगंधा कीमहक, मधुमालती की लताओं से फैलती सुगंध पूरे घर को प्राकृतिक ऊर्जा से भर देती है।
आस्था और स्वास्थ्य का प्रतीक तुलसी का पौधा आंगन की शोभा बढ़ाता है। वहीं स्नैक प्लांट जैसे इनडोर पौधे घर के भीतर शुद्ध हवा और सकारात्मक वातावरण बनाए रखते हैं। इसके साथ ही ड्रैगन ट्री, बांस, गिलोय, पत्थरचट्टा व पाम की सात अलग-अलग वैरायटी हैं।
आंगन में फलदार पौधे लगाए गए हैं ताकि घर के सदस्यों को ताजे फल सहज ही मिल सकें। इनमें आम, आड़ू, जामुन, चीकू, पपीता व संतरा शामिल हैं। घर में पीछे की ओर डॉ. अनीता सिंह ने किचन गॉर्डन भी विकसित किया है जहां उगी ताजी सब्जियां न केवल स्वास्थ्यवर्धक हैं बल्कि आत्मनिर्भरता का संदेश भी देती हैं।
सीमित स्थान में तैयार यह किचन गॉर्डन बताता है कि थोड़े प्रयास से हर घर प्रकृति से जुड़ सकता है। टीकाराम महाविद्यालय की सेवानिवृत्त उप प्राचार्य डॉ. अनीता सिंह कहती है कि पर्यावरण संरक्षण का सबसे प्रभावी माध्यम पौधरोपण है जबकि आंतरिक संरक्षण के लिए मेडिटेशन अत्यंत आवश्यक है।
उनके लिए बगिया केवल पौधों का संग्रह नहीं बल्कि ध्यान, संतुलन और सकारात्मक जीवन शैली की प्रतीक है। उनकी यह बगिया समाज को प्रेरणा देती है कि हर व्यक्ति को अपने घर की छत या आंगन में थोड़ी सी हरियाली सजा लेनी चाहिए। इससे न केवल पर्यावरण सुरक्षित होगा बल्कि जीवन भी अधिक स्वस्थ, शांत और आनंदमय बन सकेगा।