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Sonipat News: खरखौदा अस्पताल की इकलौती एंबुलेंस हुई बेदम
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फोटो: सोनीपत के खरखौदा स्थित उपमंडल नागरिक अस्पताल में खड़ी कंडम एंबुलेंस। संवाद
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खरखौदा। औद्योगिक क्षेत्र के रूप में तेजी से विकसित हो रहे खरखौदा में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाएं इकलौती पुरानी एंबुलेंस के भरोसे चल रही हैं। नागरिक अस्पताल की एकमात्र एंबुलेंस की सेवा अवधि करीब छह माह पहले पूरी हो चुकी है। ऐसे में केएमपी एक्सप्रेस-वे, राष्ट्रीय राजमार्ग और अन्य व्यस्त मार्गों पर होने वाले सड़क हादसों के बीच समय पर मरीजों को उपचार उपलब्ध कराना चुनौती बना हुआ है।
अस्पताल की पुरानी एंबुलेंस को चालू होने में ही 20 से 30 मिनट तक का समय लग जाता है। आपातकालीन स्थिति में यह देरी मरीजों के लिए गंभीर साबित हो सकती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि किसी बड़े सड़क हादसे में एक साथ कई लोग घायल हो जाएं तो मौजूदा व्यवस्था पर्याप्त नहीं है।
मारुति सुजुकी प्लांट सहित अन्य औद्योगिक इकाइयों के संचालन से क्षेत्र में वाहनों की आवाजाही लगातार बढ़ी है। इसके चलते सड़क दुर्घटनाओं की आशंका भी बढ़ गई है। ऐसे में पुरानी और अविश्वसनीय एंबुलेंस व्यवस्था स्वास्थ्य सेवाओं के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है।
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स्थानीय निवासी हरीश, राजेश और सोमपाल ने बताया कि पहले अस्पताल में एक से अधिक एंबुलेंस उपलब्ध थीं लेकिन अब पूरी आपातकालीन व्यवस्था एक ही पुरानी एंबुलेंस पर निर्भर है। इसके कारण कई बार मरीजों को निजी एंबुलेंस का सहारा लेना पड़ता है जिससे आर्थिक बोझ बढ़ने के साथ इलाज में भी देरी होती है।
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नई एम्बुलेंस की उठी मांग
स्थानीय लोगों का कहना है कि खरखौदा जैसे तेजी से विकसित हो रहे क्षेत्र के लिए आधुनिक लाइफ सपोर्ट सिस्टम से लैस कम से कम एक नई स्टैंडर्ड एंबुलेंस उपलब्ध कराई जानी चाहिए। उनका कहना है कि समय पर और प्रभावी आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित करने के लिए जिला स्वास्थ्य विभाग को इस दिशा में जल्द कदम उठाने चाहिए।
वर्जन
खरखौदा के नागरिक अस्पताल में एंबुलेंस नहीं खराब होने की जानकारी नहीं है। अगर एंबुलेंस में खराबी मिलती है तो उसकी जानकारी लेकर जांच कराई जाएगी। नियमों के तहत एंबुलेंस का संचालन किया जा रहा है।
डॉ. मंजीत राठी, नोडल अधिकारी, आरटीएस
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अस्पताल की पुरानी एंबुलेंस को चालू होने में ही 20 से 30 मिनट तक का समय लग जाता है। आपातकालीन स्थिति में यह देरी मरीजों के लिए गंभीर साबित हो सकती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि किसी बड़े सड़क हादसे में एक साथ कई लोग घायल हो जाएं तो मौजूदा व्यवस्था पर्याप्त नहीं है।
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मारुति सुजुकी प्लांट सहित अन्य औद्योगिक इकाइयों के संचालन से क्षेत्र में वाहनों की आवाजाही लगातार बढ़ी है। इसके चलते सड़क दुर्घटनाओं की आशंका भी बढ़ गई है। ऐसे में पुरानी और अविश्वसनीय एंबुलेंस व्यवस्था स्वास्थ्य सेवाओं के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है।
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स्थानीय निवासी हरीश, राजेश और सोमपाल ने बताया कि पहले अस्पताल में एक से अधिक एंबुलेंस उपलब्ध थीं लेकिन अब पूरी आपातकालीन व्यवस्था एक ही पुरानी एंबुलेंस पर निर्भर है। इसके कारण कई बार मरीजों को निजी एंबुलेंस का सहारा लेना पड़ता है जिससे आर्थिक बोझ बढ़ने के साथ इलाज में भी देरी होती है।
नई एम्बुलेंस की उठी मांग
स्थानीय लोगों का कहना है कि खरखौदा जैसे तेजी से विकसित हो रहे क्षेत्र के लिए आधुनिक लाइफ सपोर्ट सिस्टम से लैस कम से कम एक नई स्टैंडर्ड एंबुलेंस उपलब्ध कराई जानी चाहिए। उनका कहना है कि समय पर और प्रभावी आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित करने के लिए जिला स्वास्थ्य विभाग को इस दिशा में जल्द कदम उठाने चाहिए।
वर्जन
खरखौदा के नागरिक अस्पताल में एंबुलेंस नहीं खराब होने की जानकारी नहीं है। अगर एंबुलेंस में खराबी मिलती है तो उसकी जानकारी लेकर जांच कराई जाएगी। नियमों के तहत एंबुलेंस का संचालन किया जा रहा है।
डॉ. मंजीत राठी, नोडल अधिकारी, आरटीएस