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मेरी बगिया : कंक्रीट की छत पर सजी हरियाली
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
Updated Sun, 01 Feb 2026 09:40 PM IST
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फोटो :: सोनीपत के मॉडल टाउन में पौधों की देखभाल करती ममता डूडेजा। संवाद
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सोनीपत। तेजी से फैलते शहरीकरण और कंक्रीट के बढ़ते दबाव के बीच हरियाली को सहेजना आज किसी चुनौती से कम नहीं है। ऐसे में मॉडल टाउन निवासी ममता डूडेजा ने अपने शौक और समर्पण से साबित कर दिया है कि इच्छा मजबूत हो तो छत भी बगिया में तब्दील हो सकती है।
ममता डूडेजा की छत आज हार-सिंगार, रजनीगंधा, वैजयंती और अन्य सुगंधित फूलों की खुशबू से सराबोर रहती है, जो पूरे घर को ताजगी और सुकून से भर देती है। ममता ने बागवानी की शुरुआत महज पांच गमलों से की थी। समय के साथ यह शौक उनकी दिनचर्या का हिस्सा बन गया।
आज उनकी छत पर 60 से अधिक पौधे लहलहा रहे हैं। फूलों के साथ-साथ उन्होंने औषधीय और सजावटी पौधों को भी स्थान दिया है जिससे यह प्रयास न सिर्फ सौंदर्य बढ़ा रहा है बल्कि स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिहाज से भी लाभकारी साबित हो रहा है।
शौक बना सेहत और सुकून का साधन
ममता डूडेजा बताती हैं कि पौधों की देखभाल उनके लिए ध्यान और योग जैसा अनुभव है। सुबह और शाम पौधों के बीच समय बिताने से मानसिक तनाव दूर होता है और दिनभर की थकान अपने-आप उतर जाती है। उनका कहना है कि हर पौधा उन्हें सकारात्मक ऊर्जा देता है और घर का वातावरण भी शुद्ध बना रहता है।
पड़ोसियों के लिए बनी प्रेरणा
ममता की इस हरी-भरी छत ने आसपास के लोगों का भी ध्यान खींचा है। पड़ोसी और परिचित उनसे पौधों की किस्मों, रोपण और देखभाल के तरीकों के बारे में जानकारी लेने आते हैं। कई लोगों ने उनकी प्रेरणा से अपनी छतों और बालकनियों में भी पौधे लगाने शुरू कर दिए हैं।
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ममता डूडेजा की छत आज हार-सिंगार, रजनीगंधा, वैजयंती और अन्य सुगंधित फूलों की खुशबू से सराबोर रहती है, जो पूरे घर को ताजगी और सुकून से भर देती है। ममता ने बागवानी की शुरुआत महज पांच गमलों से की थी। समय के साथ यह शौक उनकी दिनचर्या का हिस्सा बन गया।
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आज उनकी छत पर 60 से अधिक पौधे लहलहा रहे हैं। फूलों के साथ-साथ उन्होंने औषधीय और सजावटी पौधों को भी स्थान दिया है जिससे यह प्रयास न सिर्फ सौंदर्य बढ़ा रहा है बल्कि स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिहाज से भी लाभकारी साबित हो रहा है।
शौक बना सेहत और सुकून का साधन
ममता डूडेजा बताती हैं कि पौधों की देखभाल उनके लिए ध्यान और योग जैसा अनुभव है। सुबह और शाम पौधों के बीच समय बिताने से मानसिक तनाव दूर होता है और दिनभर की थकान अपने-आप उतर जाती है। उनका कहना है कि हर पौधा उन्हें सकारात्मक ऊर्जा देता है और घर का वातावरण भी शुद्ध बना रहता है।
पड़ोसियों के लिए बनी प्रेरणा
ममता की इस हरी-भरी छत ने आसपास के लोगों का भी ध्यान खींचा है। पड़ोसी और परिचित उनसे पौधों की किस्मों, रोपण और देखभाल के तरीकों के बारे में जानकारी लेने आते हैं। कई लोगों ने उनकी प्रेरणा से अपनी छतों और बालकनियों में भी पौधे लगाने शुरू कर दिए हैं।
