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Sonipat News: एमसीएच भवन की गुणवत्ता जांच पर नया विवाद, निजी एजेंसी से जांच कराने पर उठे सवाल

Tue, 30 Jun 2026 04:56 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत Updated Tue, 30 Jun 2026 04:56 AM IST
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New controversy over quality check of MCH building; questions raised regarding inspection by private agency.
सोनीपत। नागरिक अस्पताल परिसर में लोक निर्माण विभाग (बीएंडआर) की तरफ से निर्माणाधीन मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य (एमसीएच) भवन की गुणवत्ता को लेकर विवाद एक बार फिर सुर्खियों में है। सरकारी गुणवत्ता जांच में निर्माण कार्य में कथित अनियमितताएं सामने आने और संबंधित अधिकारियों के निलंबन के बाद अब मामले में नया मोड़ आ गया है।
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बताया जा रहा है कि पहले की जांच रिपोर्ट को अप्रभावी बनाने और जिम्मेदारों को राहत दिलाने के लिए एक निजी एजेंसी की रिपोर्ट को आधार बनाने की तैयारी की जा रही है। कुछ समय पूर्व क्वालिटी एश्योरेंस अथॉरिटी ने निर्माणाधीन एमसीएच भवन से विभिन्न निर्माण सामग्री के नमूने एकत्र कर उनकी जांच कराई थी।
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इस जांच में गुणवत्ता संबंधी गंभीर कमियां और मानकों के उल्लंघन की बात सामने आई थी। रिपोर्ट के आधार पर मुख्यमंत्री के निर्देश पर विभाग ने त्वरित कार्रवाई करते हुए एक एसडीओ और दो जूनियर इंजीनियरों को निलंबित कर दिया था।
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निजी एजेंसी की रिपोर्ट पर बढ़ा संशय
मामले से जुड़े सूत्रों का दावा है कि अब कुछ लोग विभागीय और संभावित कानूनी कार्रवाई को प्रभावित करने के उद्देश्य से एक स्थानीय निजी एजेंसी के माध्यम से दोबारा सैंपल जांच करवा रहे हैं। आरोप है कि इस जांच में निर्माण कार्य को संतोषजनक बताते हुए ऐसी रिपोर्ट तैयार की गई है जो पहले की सरकारी रिपोर्ट से अलग निष्कर्ष प्रस्तुत करती है। आरोप लगाने वाले कह रहे हैं कि जब सरकारी क्वालिटी एश्योरेंस अथॉरिटी ने निर्माण सामग्री में खामियां दर्ज की हैं तब एक स्थानीय निजी एजेंसी की रिपोर्ट के आधार पर पूरे मामले को समाप्त करने का प्रयास कई गंभीर सवालों को जन्म देता है।


मामले की स्वतंत्र एवं उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए। अस्पताल जैसी महत्वपूर्ण और संवेदनशील परियोजना में गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता न केवल सरकारी धन के दुरुपयोग का मामला है बल्कि भविष्य में मरीजों की सुरक्षा से भी सीधा जुड़ा हुआ विषय है। पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके और यदि किसी स्तर पर लापरवाही या अनियमितता हुई है तो दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।


- देवेंद्र गौतम, संस्थापक, अन्याय के विरुद्ध, न्याय युद्ध मंच
विभाग के आधिकारिक रुख का इंतजार
सरकारी और निजी एजेंसी की रिपोर्टों में कथित विरोधाभास के बीच अब सबकी निगाहें लोक निर्माण विभाग के आधिकारिक पक्ष पर टिकी हैं। अंतिम रूप से किस जांच रिपोर्ट को मान्यता दी जाएगी और यदि दोनों निष्कर्ष अलग-अलग हैं तो उसके पीछे क्या कारण हैं यह स्पष्ट होना अभी बाकी है। जब तक विभाग की ओर से स्थिति स्पष्ट नहीं की जाती तब तक यह मामला सार्वजनिक चर्चा और सवालों के केंद्र में बना रहने की संभावना है।
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