{"_id":"69d3bb7c77b66274020776b9","slug":"the-body-of-sagar-who-died-while-cutting-a-tree-in-the-netherlands-arrived-sonipat-news-c-197-1-snp1001-152015-2026-04-06","type":"story","status":"publish","title_hn":"Sonipat News: नीदरलैंड में पेड़ काटते समय जान गंवाने वाले सागर का शव पहुंचा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Sonipat News: नीदरलैंड में पेड़ काटते समय जान गंवाने वाले सागर का शव पहुंचा
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
Updated Mon, 06 Apr 2026 07:26 PM IST
विज्ञापन
फोटो :: सोनीपत के गांव माजरी में सागर राणा के शव को लेकर जाते परिजन व ग्रामीण। संवाद
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
गन्नौर (सोनीपत)। विदेश गए गन्नौर के गांव माजरी निवासी सागर राणा (23) अब सिर्फ यादों में रह गए हैं। नीदरलैंड में पेड़ से गिरने के कारण जान गंवाने वाले सागर का शव सोमवार को गांव पहुंचा। लोगों के दर्शन के बाद सोमवार को ही अंतिम संस्कार कर दिया गया।
सागर के चचेरे भाई संदीप राणा ने बताया कि उनके भाई को एक एजेंसी ने फ्रांस की सेना में भर्ती कराने का झांसा देकर टूरिस्ट वीजा पर भेजा था लेकिन वहां उसे न तो नौकरी मिली और न ही कोई स्थायी काम। मजबूरी में वह कम वेतन पर निजी कंपनी में काम करने लगे।
बेहतर कमाई की तलाश में वह इसी साल जनवरी में नीदरलैंड चले गए थे। वहां पर छोटे-मोटे काम करते हुए परिवार की उम्मीदों को जिंदा रखे हुए थे। 21 मार्च को सीढ़ी पर खड़े होकर पेड़ काटते समय वह नीचे गिर गए। इससे सिर में गंभीर चोट लगने पर उनको अस्पताल में भर्ती कराया गया। दो बार ऑपरेशन के बावजूद 25 मार्च को उन्होंने दम तोड़ दिया था।
कर्ज और जमीन बेचकर भेजा था विदेश
परिवार ने सागर को विदेश भेजने के लिए करीब 35 लाख रुपये जुटाए थे। इसके लिए डेढ़ बीघा जमीन और घर तक बेच दिया था। बाकी रकम रिश्तेदारों से उधार लिए थे। अब परिवार ताऊ के घर रह रहा है।
इलाज और शव लाने में बढ़ा आर्थिक बोझ
सागर के इलाज और शव को भारत लाने में अब तक करीब 50 लाख रुपये खर्च हो चुके हैं। यह रकम भी परिवार ने कर्ज लेकर जुटाई है। विदेश में उनके साथ काम करने वाले साथियों ने भी आर्थिक मदद की लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका।
माता-पिता को अभी तक जान जाने की नहीं थी जानकारी
सागर का शव सोमवार को दिल्ली हवाई अड्डे पर पहुंचा। वहां से उसे गांव लाया गया। पिता संजय और मां नीलम को अब तक बेटे की हादसे में जान चले जाने की जानकारी नहीं दी गई थी लेकिन जब शव घर पहुंचा तो परिजनों में कोहराम मच गया। गांव के लोग लगातार परिवार को सांत्वना देने पहुंच रहे हैं।
12वीं के बाद ही संभाली जिम्मेदारी
सागर ने 12वीं कक्षा के बाद ही परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने का जिम्मा उठाया और विदेश चला गया था। उनके छोटे भाई कमल भी पढ़ाई बीच में छोड़ चुके हैं। सागर राणा की मौत ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि बेहतर भविष्य की तलाश में विदेश जाने वाले युवाओं के सपने किस तरह जोखिम में पड़ जाते हैं।
Trending Videos
गन्नौर (सोनीपत)। विदेश गए गन्नौर के गांव माजरी निवासी सागर राणा (23) अब सिर्फ यादों में रह गए हैं। नीदरलैंड में पेड़ से गिरने के कारण जान गंवाने वाले सागर का शव सोमवार को गांव पहुंचा। लोगों के दर्शन के बाद सोमवार को ही अंतिम संस्कार कर दिया गया।
सागर के चचेरे भाई संदीप राणा ने बताया कि उनके भाई को एक एजेंसी ने फ्रांस की सेना में भर्ती कराने का झांसा देकर टूरिस्ट वीजा पर भेजा था लेकिन वहां उसे न तो नौकरी मिली और न ही कोई स्थायी काम। मजबूरी में वह कम वेतन पर निजी कंपनी में काम करने लगे।
विज्ञापन
विज्ञापन
बेहतर कमाई की तलाश में वह इसी साल जनवरी में नीदरलैंड चले गए थे। वहां पर छोटे-मोटे काम करते हुए परिवार की उम्मीदों को जिंदा रखे हुए थे। 21 मार्च को सीढ़ी पर खड़े होकर पेड़ काटते समय वह नीचे गिर गए। इससे सिर में गंभीर चोट लगने पर उनको अस्पताल में भर्ती कराया गया। दो बार ऑपरेशन के बावजूद 25 मार्च को उन्होंने दम तोड़ दिया था।
कर्ज और जमीन बेचकर भेजा था विदेश
परिवार ने सागर को विदेश भेजने के लिए करीब 35 लाख रुपये जुटाए थे। इसके लिए डेढ़ बीघा जमीन और घर तक बेच दिया था। बाकी रकम रिश्तेदारों से उधार लिए थे। अब परिवार ताऊ के घर रह रहा है।
इलाज और शव लाने में बढ़ा आर्थिक बोझ
सागर के इलाज और शव को भारत लाने में अब तक करीब 50 लाख रुपये खर्च हो चुके हैं। यह रकम भी परिवार ने कर्ज लेकर जुटाई है। विदेश में उनके साथ काम करने वाले साथियों ने भी आर्थिक मदद की लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका।
माता-पिता को अभी तक जान जाने की नहीं थी जानकारी
सागर का शव सोमवार को दिल्ली हवाई अड्डे पर पहुंचा। वहां से उसे गांव लाया गया। पिता संजय और मां नीलम को अब तक बेटे की हादसे में जान चले जाने की जानकारी नहीं दी गई थी लेकिन जब शव घर पहुंचा तो परिजनों में कोहराम मच गया। गांव के लोग लगातार परिवार को सांत्वना देने पहुंच रहे हैं।
12वीं के बाद ही संभाली जिम्मेदारी
सागर ने 12वीं कक्षा के बाद ही परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने का जिम्मा उठाया और विदेश चला गया था। उनके छोटे भाई कमल भी पढ़ाई बीच में छोड़ चुके हैं। सागर राणा की मौत ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि बेहतर भविष्य की तलाश में विदेश जाने वाले युवाओं के सपने किस तरह जोखिम में पड़ जाते हैं।

फोटो :: सोनीपत के गांव माजरी में सागर राणा के शव को लेकर जाते परिजन व ग्रामीण। संवाद