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Sonipat News: ड्रॉ में शामिल हुए किसान पर तय रेट पर जमीन देने से किया इन्कार
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
Updated Tue, 19 May 2026 07:02 PM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
खरखौदा। क्षेत्र के कई गांवों से होकर गुजरने वाली सीकर-नरेला पावर ग्रिड लाइन को लेकर जमीन के मुआवजे पर सहमति बनने के बजाय अब विरोध तेज हो गया है। किसानों ने ड्रॉ में हिस्सा लिया और तय हुई दर पर जमीन देने से मना कर दिया है।
तय रेट को किसानों ने आज के बाजार रेट से काफी कम बताया है। पिछले सप्ताह किसानों ने एसडीएम कार्यालय पर प्रदर्शन कर लाटरी सिस्टम से अपनी जमीन ही देने से इन्कार कर दिया था। क्षेत्र के गांव सोहटी, किडौली, पहलादपुर व निजामपुर खुर्द से नरेला, दिल्ली में बनने वाले पावर ग्रिड की लाइन गुजरनी है।
यह लाइन राजस्थान के सीकर से लाई जा रही है। ऐसे में उक्त गांवों के किसानों ने पहले से तय रेट पर अपनी जमीन देने से इन्कार कर दिया था। इस पर कई दौर की चर्चा होने के बाद कई कमेटियों से जमीन का मूल्यांकन कराकर उसमें से एक पर सहमत होने की सहमति बनी थी।
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बीते सप्ताह किसानों ने प्रदर्शन करते हुए इस पर आपत्ति जताते हुए लाटरी सिस्टम से जमीन के रेट तय कराने से भी मना किया था। साथ ही मुआवजा मिलने से पहले ही काम शुरू करने वालों पर भी कार्रवाई की मांग की थी। इसके बावजूद किसान एसडीएम कार्यालय पहुंचे ओर इस ड्रॉ में हिस्सा लिया।
इसके बाद किसानों ने जमीन का बाजार रेट ज्यादा होने व ड्रॉ में दो करोड 93 लाख रुपये से लेकर चार करोड़ 62 लाख रुपये तक मुआवजा राशि रखे जाने पर जमीन देने से मना कर दिया। किसानों का कहना है कि आज के समय में उनके क्षेत्र में दस करोड़ रुपये प्रति एकड़ बाजार भाव है। इस पर संबंधित कंपनी व किसानों के बीच विवाद गहराता दिख रहा है।
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खरखौदा। क्षेत्र के कई गांवों से होकर गुजरने वाली सीकर-नरेला पावर ग्रिड लाइन को लेकर जमीन के मुआवजे पर सहमति बनने के बजाय अब विरोध तेज हो गया है। किसानों ने ड्रॉ में हिस्सा लिया और तय हुई दर पर जमीन देने से मना कर दिया है।
तय रेट को किसानों ने आज के बाजार रेट से काफी कम बताया है। पिछले सप्ताह किसानों ने एसडीएम कार्यालय पर प्रदर्शन कर लाटरी सिस्टम से अपनी जमीन ही देने से इन्कार कर दिया था। क्षेत्र के गांव सोहटी, किडौली, पहलादपुर व निजामपुर खुर्द से नरेला, दिल्ली में बनने वाले पावर ग्रिड की लाइन गुजरनी है।
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यह लाइन राजस्थान के सीकर से लाई जा रही है। ऐसे में उक्त गांवों के किसानों ने पहले से तय रेट पर अपनी जमीन देने से इन्कार कर दिया था। इस पर कई दौर की चर्चा होने के बाद कई कमेटियों से जमीन का मूल्यांकन कराकर उसमें से एक पर सहमत होने की सहमति बनी थी।
बीते सप्ताह किसानों ने प्रदर्शन करते हुए इस पर आपत्ति जताते हुए लाटरी सिस्टम से जमीन के रेट तय कराने से भी मना किया था। साथ ही मुआवजा मिलने से पहले ही काम शुरू करने वालों पर भी कार्रवाई की मांग की थी। इसके बावजूद किसान एसडीएम कार्यालय पहुंचे ओर इस ड्रॉ में हिस्सा लिया।
इसके बाद किसानों ने जमीन का बाजार रेट ज्यादा होने व ड्रॉ में दो करोड 93 लाख रुपये से लेकर चार करोड़ 62 लाख रुपये तक मुआवजा राशि रखे जाने पर जमीन देने से मना कर दिया। किसानों का कहना है कि आज के समय में उनके क्षेत्र में दस करोड़ रुपये प्रति एकड़ बाजार भाव है। इस पर संबंधित कंपनी व किसानों के बीच विवाद गहराता दिख रहा है।