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Yamuna Nagar News: जिले की 20 में से 13 एंबुलेंस जर्जर, खतरे में मरीज

संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर Updated Tue, 19 May 2026 01:28 AM IST
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13 out of the district's 20 ambulances are dilapidated; patients at risk
जिला नागरिक अस्पताल में कंट्रोल रूम के बाहर खड़ी एंबुलेंस। संवाद
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संवाद न्यूज एजेंसी

यमुनानगर। स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ मानी जाने वाली एंबुलेंस व्यवस्था बदहाल होती जा रही है। जिले में स्वास्थ्य विभाग के पास संचालित 20 एंबुलेंस में से 13 एंबुलेंस जर्जर हालत में पहुंच चुकी हैं। नई एंबुलेंस नहीं मिलने के कारण इन्हीं पुराने और जर्जर वाहनों के सहारे आपातकालीन सेवाएं चलाई जा रही हैं।
इससे रास्ते में एंबुलेंस खराब होने का खतरा बना रहता है, जिससे मरीजों की जान जोखिम में पड़ सकती है। जिला स्वास्थ्य विभाग की ओर से नई एंबुलेंस उपलब्ध कराने के लिए कई बार मुख्यालय को पत्र भेजे जा चुके हैं। सिविल सर्जन कार्यालय ने 13 नई एंबुलेंस की मांग के साथ 20 आधुनिक मोबाइल डाटा टर्मिनल सिस्टम (एमडीटीएस) से लैस एंबुलेंस उपलब्ध कराने का प्रस्ताव भी सरकार को भेजा है। अभी तक विभाग को सिर्फ आश्वासन ही मिला है। जिले में जो एंबुलेंस जर्जर हो चुकी हैं, वे सभी वर्ष 2018 मॉडल की हैं। सरकारी नियमों के मुताबिक कोई भी वाहन तीन लाख किलोमीटर चलने के बाद कंडम माना जाता है। जिले की कई एंबुलेंस इस सीमा को काफी पहले पार कर चुकी हैं। ज्यादातर एंबुलेंस चार लाख किलोमीटर से अधिक चल चुकी हैं। लगातार अधिक दूरी तय करने और लंबे समय तक उपयोग के कारण इनकी तकनीकी स्थिति खराब हो चुकी है।
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अक्सर किसी न किसी एंबुलेंस में खराबी आने के कारण उसे मरम्मत के लिए वर्कशॉप या मैकेनिक के पास खड़ा करना पड़ता है। इससे जिले में उपलब्ध एंबुलेंस की संख्या और कम हो जाती है। हालत ज्यादा खराब होने के चलते समय से पहले इनकी सर्विस करवानी जरूरी है।
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कई बार एक साथ दो से तीन एंबुलेंस खराब होने पर आपातकालीन सेवाओं पर सीधा असर पड़ता है। एंबुलेंस की खराब हालत का प्रभाव अब रिस्पॉन्स टाइम पर भी दिखाई देने लगा है। पहले कॉल आने के बाद एंबुलेंस औसतन 10 मिनट में मौके पर पहुंच जाती थी। अब यह समय बढ़कर करीब 12 मिनट तक पहुंच गया है। ग्रामीण क्षेत्रों में यह समय और अधिक हो जाता है।
गंभीर मरीजों, सड़क हादसों और गर्भवती महिलाओं के मामलों में देरी भारी पड़ सकती है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि नई एंबुलेंस मिलने तक इन्हीं वाहनों से सेवाएं जारी रखनी पड़ रही हैं। विभाग ने आधुनिक तकनीक से लैस नई एंबुलेंस की मांग की है, जिनमें जीपीएस आधारित ट्रैकिंग और एमडीटीएस सिस्टम होगा। इससे कंट्रोल रूम को एंबुलेंस की लोकेशन की सटीक जानकारी मिलेगी और मरीजों तक तेजी से पहुंचने में मदद मिलेगी।
नई एंबुलेंस उपलब्ध करवाने के लिए मुख्यालय को लिखा है। उम्मीद है जल्द ही नई एंबुलेंस मिल जाएंगी। यह सही है कि कई एंबुलेंस जर्जर हो चुकी हैं। मरम्मत कराकर चलाया जा रहा है। -डॉ. सुशीला सैनी, डिप्टी सिविल सर्जन।
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