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Yamuna Nagar News: छह माह में पानी के 207 नमूने जांच में फेल, 61 में मिला बैक्टीरिया

Mon, 13 Jul 2026 01:10 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर Updated Mon, 13 Jul 2026 01:10 AM IST
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207 water samples failed tests in six months; bacteria found in 61
घर से लिए गए पानी के नमूने की जांच करता कर्मचारी। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
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यमुनानगर। पाइपलाइन के जरिए घरों तक पहुंच रहा पानी लोगों की सेहत के लिए खतरा बन रहा है। जनस्वास्थ्य विभाग की ओर से इस साल जनवरी से 30 जून तक लिए गए 14,055 पानी के नमूनों में से 207 पीने योग्य नहीं पाए गए। इनमें बैक्टीरियोलॉजिकल जांच के दौरान 61 नमूनों में बैक्टीरिया की मौजूदगी मिली।
जिले के कई क्षेत्रों में पेयजल और सीवरेज लाइनें समानांतर गुजरती हैं। वर्षों पुरानी और जर्जर पाइप लाइन में लीकेज होने पर सीवरेज का गंदा पानी पेयजल लाइन में प्रवेश कर जाता है। पानी की आपूर्ति बंद होने या दबाव कम होने की स्थिति में यह खतरा और बढ़ जाता है।
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नतीजतन लोगों के घरों तक पहुंचने वाला पानी बैक्टीरिया से दूषित हो जाता है। नियमित और पर्याप्त मात्रा में क्लोरीनेशन नहीं होने से भी पानी में बैक्टीरिया पनपने की संभावना बढ़ जाती है।
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क्लोरीन पानी में मौजूद हानिकारक सूक्ष्म जीवों को नष्ट करने का सबसे प्रभावी माध्यम है। क्लोरीन निर्धारित मानकों के अनुसार न हो तो पानी की गुणवत्ता प्रभावित होना स्वाभाविक है। इसी तरह शहर के कई क्षेत्रों में पेयजल और सीवरेज की पाइप लाइन एक-दूसरे के समानांतर या बेहद करीब से गुजर रही हैं।
समय के साथ पाइप लाइन पुरानी और जर्जर होने से उनमें दरारें या लीकेज हो जाते हैं। जब सीवरेज लाइन से गंदा पानी रिसता है और उसी स्थान पर पेयजल पाइप लाइन भी क्षतिग्रस्त होती है, तो दूषित पानी पेयजल लाइन में प्रवेश कर जाता है। ट्यूबवेल बंद होने या पाइप लाइन में दबाव कम होने पर नकारात्मक दबाव (नेगेटिव प्रेशर) बनता है, जिससे आसपास का गंदा पानी पेयजल पाइप में खिंच जाता है। इसके अलावा, पाइपलाइन की मरम्मत में लापरवाही, अवैध कनेक्शन और समय पर लीकेज ठीक नहीं होने से भी संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। यही पानी फिर नल से घरों में पहुंचता है।
बुखार, दस्त समेत अन्य बीमारियाें का खतरा
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक बैक्टीरिया युक्त पानी पीने से पेट और आंतों में संक्रमण, उल्टी-दस्त, तेज बुखार, डायरिया, फूड प्वाइजनिंग, टायफाइड और हेपेटाइटिस-ए जैसी बीमारियां हो सकती हैं। छोटे बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर प्रतिरक्षा क्षमता वाले लोगों पर इसका असर अधिक गंभीर हो सकता है। लंबे समय तक दूषित पानी का सेवन शरीर में पोषक तत्वों के अवशोषण को भी प्रभावित करता है और बार-बार संक्रमण का कारण बन सकता है।
स्वास्थ्य विभाग की टीम नियमित रूप से पानी के नमूने ले रही है। जहां पर पानी में दिक्कत मिलती है, इसकी सूचना जनस्वास्थ्य विभाग को दी जाती है, जिससे समस्या को दूर किया जा सके। -डॉ. वागीश गुटैन, जिला निगरानी अधिकारी, स्वास्थ्य विभाग।

पानी का सैंपल टंकी से लिया गया है या फिर नल से, यह रिपोर्ट नेगेटिव आने का बड़ा कारण बनता है। टंकी के पानी की जांच की जाए तो वह ज्यादातर फेल ही आएंगे, क्योंकि लोग टंकियों की सफाई नहीं करवाते हैं। -दिनेश गाबा, एक्सईएन, जनस्वास्थ्य विभाग।

घर से लिए गए पानी के नमूने की जांच करता कर्मचारी। संवाद

घर से लिए गए पानी के नमूने की जांच करता कर्मचारी। संवाद

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