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Yamuna Nagar News: कलेसर पार्क के बफर जोन में 30 अवैध निर्माण
Tue, 07 Jul 2026 01:53 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Tue, 07 Jul 2026 01:53 AM IST
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कलेसर नेशनल पार्क की सीमा में हुए अवैध निर्माण। विभाग
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संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। करीब 11,570 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला कलेसर नेशनल पार्क तेंदुओं सहित कई दुर्लभ वन्य प्राणियों का सुरक्षित आश्रय माना जाता है। पार्क के बफर में अवैध निर्माण इनके प्राकृतिक आवास के लिए चुनौती बनते जा रहे हैं। वन्य प्राणी विभाग होटल, ढाबे, रेस्टोरेंट, फार्म हाउस और अन्य प्रकार के 30 अवैध निर्माण को नोटिस देकर कार्रवाई की तैयारी में जुटा है।
वन विभाग के ताजा आंकड़ों के अनुसार कलेसर नेशनल पार्क में वर्तमान में करीब 47 तेंदुए मौजूद हैं। इनके अलावा जंगली सुअर, नीलगाय, खरगोश समेत अन्य वन्य जीव यहां की जैव विविधता का हिस्सा हैं और तेंदुओं की भोजन श्रृंखला को संतुलित बनाए रखते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि पार्क की सीमा के आसपास बढ़ती मानवीय गतिविधियां और अवैध निर्माण वन्य प्राणियों की प्राकृतिक आवाजाही में बाधा बन रहे हैं। नियमों के अनुसार नेशनल पार्क की सीमा से बाहर 1900 मीटर के दायरे में किसी भी प्रकार का निर्माण प्रतिबंधित है।
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इसके बावजूद वर्षों से इस क्षेत्र में कई व्यावसायिक और निजी निर्माण खड़े हो चुके हैं। यदि समय रहते इन पर रोक नहीं लगाई गई तो भविष्य में मानव और वन्य जीवों के बीच संघर्ष की घटनाएं भी बढ़ सकती हैं।
यही वजह है कि पिछले कुछ सालों में तेंदुए जंगल से बाहर आ रहे हैं। फिर आरोप लग रहे हैं कि तेंदुए आबादी में घुस आए। जबकि जंगल के आसपास का इलाका वन्य प्राणियों का ही होता है। वन्य प्राणी विभाग के अधिकारी अब चिह्नित निर्माणों का रिकॉर्ड तैयार कर रहे हैं। विभागीय स्तर पर कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद संबंधित मामलों में नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
संरक्षित क्षेत्र की संवेदनशीलता को देखते हुए नियमों का पालन कराना आवश्यक है। कलेसर गांव के सरपंच ज्ञान सिंह का कहना है कि जंगल के एरिया में बड़ी संख्या में अवैध निर्माण हुए हैं। ज्यादातर होटलों में अनैतिक गतिविधियां चल रही है। वह कई बार इसकी शिकायत भी कर चुके हैं। इन पर अंकुश लगाना जरूरी है।
बफर जोन में निर्माण पर प्रतिबंध
नेशनल पार्क के आसपास का बफर जोन वन्य जीवों के लिए सुरक्षा कवच का कार्य करता है। यह क्षेत्र जंगल और आबादी के बीच संतुलन बनाए रखता है तथा वन्य प्राणियों की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करता है। यदि इस क्षेत्र में होटल, फार्म हाउस, रेस्टोरेंट या अन्य निर्माण होने लगे तो शोर, रोशनी और मानवीय गतिविधियां बढ़ जाती हैं, जिससे वन्य जीव अपने प्राकृतिक व्यवहार में बदलाव करने लगते हैं। कई बार वे भोजन और आवास की तलाश में आबादी की ओर भी रुख कर लेते हैं।
विभाग का उद्देश्य वन्य प्राणियों के प्राकृतिक आवास का संरक्षण करना है। नियमों का पालन सभी के लिए अनिवार्य है और उल्लंघन पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। -ज्योति कुमार, इंस्पेक्टर, वन्य प्राणी विभाग।
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यमुनानगर। करीब 11,570 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला कलेसर नेशनल पार्क तेंदुओं सहित कई दुर्लभ वन्य प्राणियों का सुरक्षित आश्रय माना जाता है। पार्क के बफर में अवैध निर्माण इनके प्राकृतिक आवास के लिए चुनौती बनते जा रहे हैं। वन्य प्राणी विभाग होटल, ढाबे, रेस्टोरेंट, फार्म हाउस और अन्य प्रकार के 30 अवैध निर्माण को नोटिस देकर कार्रवाई की तैयारी में जुटा है।
वन विभाग के ताजा आंकड़ों के अनुसार कलेसर नेशनल पार्क में वर्तमान में करीब 47 तेंदुए मौजूद हैं। इनके अलावा जंगली सुअर, नीलगाय, खरगोश समेत अन्य वन्य जीव यहां की जैव विविधता का हिस्सा हैं और तेंदुओं की भोजन श्रृंखला को संतुलित बनाए रखते हैं।
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विशेषज्ञों का कहना है कि पार्क की सीमा के आसपास बढ़ती मानवीय गतिविधियां और अवैध निर्माण वन्य प्राणियों की प्राकृतिक आवाजाही में बाधा बन रहे हैं। नियमों के अनुसार नेशनल पार्क की सीमा से बाहर 1900 मीटर के दायरे में किसी भी प्रकार का निर्माण प्रतिबंधित है।
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इसके बावजूद वर्षों से इस क्षेत्र में कई व्यावसायिक और निजी निर्माण खड़े हो चुके हैं। यदि समय रहते इन पर रोक नहीं लगाई गई तो भविष्य में मानव और वन्य जीवों के बीच संघर्ष की घटनाएं भी बढ़ सकती हैं।
यही वजह है कि पिछले कुछ सालों में तेंदुए जंगल से बाहर आ रहे हैं। फिर आरोप लग रहे हैं कि तेंदुए आबादी में घुस आए। जबकि जंगल के आसपास का इलाका वन्य प्राणियों का ही होता है। वन्य प्राणी विभाग के अधिकारी अब चिह्नित निर्माणों का रिकॉर्ड तैयार कर रहे हैं। विभागीय स्तर पर कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद संबंधित मामलों में नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
संरक्षित क्षेत्र की संवेदनशीलता को देखते हुए नियमों का पालन कराना आवश्यक है। कलेसर गांव के सरपंच ज्ञान सिंह का कहना है कि जंगल के एरिया में बड़ी संख्या में अवैध निर्माण हुए हैं। ज्यादातर होटलों में अनैतिक गतिविधियां चल रही है। वह कई बार इसकी शिकायत भी कर चुके हैं। इन पर अंकुश लगाना जरूरी है।
बफर जोन में निर्माण पर प्रतिबंध
नेशनल पार्क के आसपास का बफर जोन वन्य जीवों के लिए सुरक्षा कवच का कार्य करता है। यह क्षेत्र जंगल और आबादी के बीच संतुलन बनाए रखता है तथा वन्य प्राणियों की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करता है। यदि इस क्षेत्र में होटल, फार्म हाउस, रेस्टोरेंट या अन्य निर्माण होने लगे तो शोर, रोशनी और मानवीय गतिविधियां बढ़ जाती हैं, जिससे वन्य जीव अपने प्राकृतिक व्यवहार में बदलाव करने लगते हैं। कई बार वे भोजन और आवास की तलाश में आबादी की ओर भी रुख कर लेते हैं।
विभाग का उद्देश्य वन्य प्राणियों के प्राकृतिक आवास का संरक्षण करना है। नियमों का पालन सभी के लिए अनिवार्य है और उल्लंघन पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। -ज्योति कुमार, इंस्पेक्टर, वन्य प्राणी विभाग।