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पहले घंटे में मां का दूध बच्चे के लिए अमृत : डॉ. जितेंद्र
Mon, 03 Aug 2026 12:35 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Mon, 03 Aug 2026 12:35 AM IST
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अस्पताल में महिलाओं को स्तनपान के बारे में जागरूक करते स्वास्थ्यकर्मी। विभाग
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संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। विश्व स्तनपान सप्ताह के अवसर पर सात अगस्त तक जिले के सभी सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में व्यापक जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। सिविल सर्जन डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि जन्म के पहले एक घंटे के भीतर स्तनपान शुरू करना और जन्म से छह माह तक केवल मां का दूध देना नवजात के स्वस्थ जीवन की सबसे अच्छी शुरुआत है।
उन्होंने बताया कि मां का पहला गाढ़ा पीला दूध (कोलोस्ट्रम) शिशु के लिए प्रथम टीके की तरह काम करता है, जो संक्रमणों से बचाने और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में अहम भूमिका निभाता है। जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. पुनीत कालरा ने बताया कि मां का दूध शिशु के लिए संपूर्ण, सुरक्षित और संतुलित आहार है। इससे निमोनिया, दस्त, कुपोषण और अन्य संक्रामक रोगों का खतरा कम होता है, जबकि शारीरिक और मानसिक विकास बेहतर होता है।
उन्होंने कहा कि स्तनपान माताओं के लिए भी लाभकारी है। इससे प्रसव के बाद शरीर जल्दी सामान्य होता है और स्तन व डिम्बग्रंथि कैंसर सहित टाइप-2 मधुमेह का जोखिम कम होता है। भारत सरकार के एमएए (मदर्स एब्सोल्यूट अफेक्शन) कार्यक्रम के तहत संस्थागत प्रसव के तुरंत बाद स्तनपान शुरू कराने, छह माह तक केवल स्तनपान और उसके बाद दो वर्ष या उससे अधिक समय तक पूरक आहार के साथ स्तनपान जारी रखने के लिए माताओं को प्रोत्साहित किया जा रहा है। अभियान के तहत गर्भवती और धात्री महिलाओं के साथ उनके परिवारों को स्तनपान के महत्व, सही तकनीक और इसके स्वास्थ्य लाभों की जानकारी दी जाएगी।
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यमुनानगर। विश्व स्तनपान सप्ताह के अवसर पर सात अगस्त तक जिले के सभी सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में व्यापक जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। सिविल सर्जन डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि जन्म के पहले एक घंटे के भीतर स्तनपान शुरू करना और जन्म से छह माह तक केवल मां का दूध देना नवजात के स्वस्थ जीवन की सबसे अच्छी शुरुआत है।
उन्होंने बताया कि मां का पहला गाढ़ा पीला दूध (कोलोस्ट्रम) शिशु के लिए प्रथम टीके की तरह काम करता है, जो संक्रमणों से बचाने और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में अहम भूमिका निभाता है। जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. पुनीत कालरा ने बताया कि मां का दूध शिशु के लिए संपूर्ण, सुरक्षित और संतुलित आहार है। इससे निमोनिया, दस्त, कुपोषण और अन्य संक्रामक रोगों का खतरा कम होता है, जबकि शारीरिक और मानसिक विकास बेहतर होता है।
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उन्होंने कहा कि स्तनपान माताओं के लिए भी लाभकारी है। इससे प्रसव के बाद शरीर जल्दी सामान्य होता है और स्तन व डिम्बग्रंथि कैंसर सहित टाइप-2 मधुमेह का जोखिम कम होता है। भारत सरकार के एमएए (मदर्स एब्सोल्यूट अफेक्शन) कार्यक्रम के तहत संस्थागत प्रसव के तुरंत बाद स्तनपान शुरू कराने, छह माह तक केवल स्तनपान और उसके बाद दो वर्ष या उससे अधिक समय तक पूरक आहार के साथ स्तनपान जारी रखने के लिए माताओं को प्रोत्साहित किया जा रहा है। अभियान के तहत गर्भवती और धात्री महिलाओं के साथ उनके परिवारों को स्तनपान के महत्व, सही तकनीक और इसके स्वास्थ्य लाभों की जानकारी दी जाएगी।

अस्पताल में महिलाओं को स्तनपान के बारे में जागरूक करते स्वास्थ्यकर्मी। विभाग
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