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Yamuna Nagar News: महंगी फीड से 260 रुपये किलो पहुंचा चिकन
Fri, 24 Jul 2026 01:45 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Fri, 24 Jul 2026 01:45 AM IST
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यमुनानगर में पोल्ट्री फार्म पर मुर्गियां। संवाद
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संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। पोल्ट्री कारोबार इन दिनों बढ़ती लागत की मार झेल रहा है। मक्की, सोयाबीन, फीड और दवाओं के दाम बढ़ने से ब्रायलर मुर्गी तैयार करना पहले के मुकाबले काफी महंगा हो गया है। कुछ समय पहले तक 180 रुपये प्रति किलोग्राम बिकने वाला चिकन अब 260 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गया है।
पोल्ट्री कारोबारियों के अनुसार सबसे अधिक बढ़ोतरी फीड और कच्चे माल के दामों में हुई है। पहले पोल्ट्री फीड करीब 37 रुपये प्रति किलोग्राम मिल जाती थी, लेकिन अब इसकी कीमत बढ़कर करीब 50 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई है। इसी प्रकार मक्की, जो फीड का प्रमुख घटक है, पहले करीब दो हजार रुपये प्रति क्विंटल के आसपास उपलब्ध थी।
अब इसकी कीमत गुणवत्ता के अनुसार 2400 से 2600 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गई है। मक्की की आवक बिहार, ओड़ीसा, मध्यप्रदेश से आती है। पिछले दिनों पेट्रोल, डीजल के जो रेट बढ़े हैं उससे किराया भी बढ़ गया है। कारोबारियों का कहना है कि सोयाबीन, जो ब्रायलर मुर्गियों के लिए प्रोटीन का मुख्य स्रोत है, उसके दामों में भी लगातार बढ़ोतरी हुई है।
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सोयाबीन की आपूर्ति मुख्य रूप से मध्यप्रदेश से होती है और वहां कीमत बढ़ने का असर स्थानीय बाजार पर भी पड़ा है। इसके अलावा दवाइयों और अन्य जरूरी सामग्री के महंगे होने से उत्पादन लागत लगातार बढ़ती जा रही है। ब्रायलर मुर्गी को तैयार होने में सामान्य तौर पर 27 से 50 दिन का समय लगता है।
इस दौरान फीड, दवाइयों और देखभाल पर होने वाला खर्च पहले की तुलना में काफी बढ़ गया है। वहीं गर्मी के मौसम में उत्पादन भी करीब 10 प्रतिशत तक घट गया है, जिससे पोल्ट्री फार्म संचालकों पर दोहरी मार पड़ रही है। यमुनानगर जिले में व्यासपुर, लेदी, रादौर, सरस्वतीनगर, दराजपुर, साढौरा, फतेहपुर और साबापुर क्षेत्र पोल्ट्री कारोबार के प्रमुख केंद्र हैं। जिले में केवल ब्रायलर तैयार करने वाले 200 से अधिक पोल्ट्री फार्म संचालित हैं।
कारोबारियों की बढ़ सकती हैं मुश्किलें : भंवर सिंह
पोल्ट्री फार्म एसोसिएशन यमुनानगर के प्रधान भंवर सिंह का कहना है कि पोल्ट्री फार्म में ब्रायलर तैयार करना पहले की तुलना में काफी महंगा हो गया है। फीड, मक्की, सोयाबीन और दवाइयों की कीमतों में लगातार वृद्धि हो रही है। ऐसे में उत्पादन लागत बढ़ने का असर बाजार में चिकन के दामों पर भी पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि यदि कच्चे माल की कीमतों पर नियंत्रण नहीं हुआ तो आने वाले समय में पोल्ट्री कारोबारियों की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।
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यमुनानगर। पोल्ट्री कारोबार इन दिनों बढ़ती लागत की मार झेल रहा है। मक्की, सोयाबीन, फीड और दवाओं के दाम बढ़ने से ब्रायलर मुर्गी तैयार करना पहले के मुकाबले काफी महंगा हो गया है। कुछ समय पहले तक 180 रुपये प्रति किलोग्राम बिकने वाला चिकन अब 260 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गया है।
पोल्ट्री कारोबारियों के अनुसार सबसे अधिक बढ़ोतरी फीड और कच्चे माल के दामों में हुई है। पहले पोल्ट्री फीड करीब 37 रुपये प्रति किलोग्राम मिल जाती थी, लेकिन अब इसकी कीमत बढ़कर करीब 50 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई है। इसी प्रकार मक्की, जो फीड का प्रमुख घटक है, पहले करीब दो हजार रुपये प्रति क्विंटल के आसपास उपलब्ध थी।
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अब इसकी कीमत गुणवत्ता के अनुसार 2400 से 2600 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गई है। मक्की की आवक बिहार, ओड़ीसा, मध्यप्रदेश से आती है। पिछले दिनों पेट्रोल, डीजल के जो रेट बढ़े हैं उससे किराया भी बढ़ गया है। कारोबारियों का कहना है कि सोयाबीन, जो ब्रायलर मुर्गियों के लिए प्रोटीन का मुख्य स्रोत है, उसके दामों में भी लगातार बढ़ोतरी हुई है।
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सोयाबीन की आपूर्ति मुख्य रूप से मध्यप्रदेश से होती है और वहां कीमत बढ़ने का असर स्थानीय बाजार पर भी पड़ा है। इसके अलावा दवाइयों और अन्य जरूरी सामग्री के महंगे होने से उत्पादन लागत लगातार बढ़ती जा रही है। ब्रायलर मुर्गी को तैयार होने में सामान्य तौर पर 27 से 50 दिन का समय लगता है।
इस दौरान फीड, दवाइयों और देखभाल पर होने वाला खर्च पहले की तुलना में काफी बढ़ गया है। वहीं गर्मी के मौसम में उत्पादन भी करीब 10 प्रतिशत तक घट गया है, जिससे पोल्ट्री फार्म संचालकों पर दोहरी मार पड़ रही है। यमुनानगर जिले में व्यासपुर, लेदी, रादौर, सरस्वतीनगर, दराजपुर, साढौरा, फतेहपुर और साबापुर क्षेत्र पोल्ट्री कारोबार के प्रमुख केंद्र हैं। जिले में केवल ब्रायलर तैयार करने वाले 200 से अधिक पोल्ट्री फार्म संचालित हैं।
कारोबारियों की बढ़ सकती हैं मुश्किलें : भंवर सिंह
पोल्ट्री फार्म एसोसिएशन यमुनानगर के प्रधान भंवर सिंह का कहना है कि पोल्ट्री फार्म में ब्रायलर तैयार करना पहले की तुलना में काफी महंगा हो गया है। फीड, मक्की, सोयाबीन और दवाइयों की कीमतों में लगातार वृद्धि हो रही है। ऐसे में उत्पादन लागत बढ़ने का असर बाजार में चिकन के दामों पर भी पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि यदि कच्चे माल की कीमतों पर नियंत्रण नहीं हुआ तो आने वाले समय में पोल्ट्री कारोबारियों की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।