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Yamuna Nagar News: इमिग्रेशन कंपनी 2.10 लाख लौटाने के साथ दे 11 हजार रुपये हर्जाना
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Wed, 01 Apr 2026 12:26 AM IST
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जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग कार्यालय। आर्काइव
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संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। विदेश भेजने के नाम पर वीजा न लगने पर राशि वापस न करने के मामले में जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने चंडीगढ़ स्थित इमिग्रेशन कंपनी को सेवा में कमी और अनुचित व्यापारिक व्यवहार का दोषी ठहराते हुए शिकायतकर्ता को 2.10 लाख रुपये वापस करने का आदेश दिया है। साथ ही सात प्रतिशत वार्षिक ब्याज और 11 हजार रुपये बतौर हर्जाना देने के निर्देश भी दिए हैं।
गांव घेसपुर निवासी शिकायतकर्ता दिशांत ने आयोग में दायर याचिका में बताया कि 12वीं पास करने के बाद वह आगे की पढ़ाई और बेहतर भविष्य के लिए विदेश जाना चाहता था। इसी दौरान उसकी मुलाकात संबंधित इमिग्रेशन कंपनी से हुई। कंपनी ने उसे ऑस्ट्रेलिया का वीजा दिलाने का भरोसा दिया और कहा कि उसका वीजा निश्चित रूप से लग जाएगा। कंपनी के आश्वासन पर उसने 14 फरवरी 2025 को 40 हजार रुपये और 8 मार्च 2025 को 1.70 लाख रुपये जमा कराए।
शिकायतकर्ता के अनुसार कंपनी ने लंबे समय तक उसे भरोसे में रखा, लेकिन बाद में पता चला कि उसका वीजा आवेदन खारिज हो चुका है। आरोप है कि कंपनी ने वीजा रिजेक्शन की जानकारी भी समय पर नहीं दी और जब उसने पैसे वापस मांगे तो टालमटोल करती रही। बाद में कंपनी ने अनुबंध की शर्तों का हवाला देते हुए राशि लौटाने से इन्कार कर दिया।
मामले की सुनवाई के दौरान आयोग ने पाया कि कंपनी ने शिकायतकर्ता से पूरी राशि पहले ही ले ली थी, जबकि वीजा आवेदन काफी देर से किया गया। साथ ही, कंपनी आयोग के समक्ष पेश भी नहीं हुई, जिसके चलते उसके खिलाफ एकतरफा कार्रवाई की गई। आयोग ने यह भी माना कि दोनों पक्षों के बीच हुए अनुबंध में शर्तें परस्पर विरोधाभासी थीं।
एक ओर शुल्क को नॉन-रिफंडेबल बताया गया, वहीं दूसरी ओर वीजा रिजेक्ट होने पर कुछ कटौती के बाद राशि लौटाने का उल्लेख भी था। आयोग ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि कंपनी सेवा प्रदान करने में विफल रही और शिकायतकर्ता को मानसिक पीड़ा, आर्थिक नुकसान व समय की हानि उठानी पड़ी। इसलिए कंपनी को निर्देश दिए गए कि वह 45 दिनों के भीतर शिकायतकर्ता को 2.10 लाख रुपये लौटाए। इसके साथ ही 7 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी अदा करे।
तय समय में भुगतान न करने पर ब्याज दर नौ प्रतिशत तक लागू होगी। आयोग ने कंपनी पर 11 हजार रुपये का हर्जाना भी लगाया है, जिसमें मानसिक उत्पीड़न और वाद व्यय शामिल है। आदेश में यह भी कहा गया है कि कंपनी की लापरवाही और गैर-जिम्मेदाराना रवैये के कारण शिकायतकर्ता का एक साल खराब हुआ, जो गंभीर विषय है।
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यमुनानगर। विदेश भेजने के नाम पर वीजा न लगने पर राशि वापस न करने के मामले में जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने चंडीगढ़ स्थित इमिग्रेशन कंपनी को सेवा में कमी और अनुचित व्यापारिक व्यवहार का दोषी ठहराते हुए शिकायतकर्ता को 2.10 लाख रुपये वापस करने का आदेश दिया है। साथ ही सात प्रतिशत वार्षिक ब्याज और 11 हजार रुपये बतौर हर्जाना देने के निर्देश भी दिए हैं।
गांव घेसपुर निवासी शिकायतकर्ता दिशांत ने आयोग में दायर याचिका में बताया कि 12वीं पास करने के बाद वह आगे की पढ़ाई और बेहतर भविष्य के लिए विदेश जाना चाहता था। इसी दौरान उसकी मुलाकात संबंधित इमिग्रेशन कंपनी से हुई। कंपनी ने उसे ऑस्ट्रेलिया का वीजा दिलाने का भरोसा दिया और कहा कि उसका वीजा निश्चित रूप से लग जाएगा। कंपनी के आश्वासन पर उसने 14 फरवरी 2025 को 40 हजार रुपये और 8 मार्च 2025 को 1.70 लाख रुपये जमा कराए।
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शिकायतकर्ता के अनुसार कंपनी ने लंबे समय तक उसे भरोसे में रखा, लेकिन बाद में पता चला कि उसका वीजा आवेदन खारिज हो चुका है। आरोप है कि कंपनी ने वीजा रिजेक्शन की जानकारी भी समय पर नहीं दी और जब उसने पैसे वापस मांगे तो टालमटोल करती रही। बाद में कंपनी ने अनुबंध की शर्तों का हवाला देते हुए राशि लौटाने से इन्कार कर दिया।
मामले की सुनवाई के दौरान आयोग ने पाया कि कंपनी ने शिकायतकर्ता से पूरी राशि पहले ही ले ली थी, जबकि वीजा आवेदन काफी देर से किया गया। साथ ही, कंपनी आयोग के समक्ष पेश भी नहीं हुई, जिसके चलते उसके खिलाफ एकतरफा कार्रवाई की गई। आयोग ने यह भी माना कि दोनों पक्षों के बीच हुए अनुबंध में शर्तें परस्पर विरोधाभासी थीं।
एक ओर शुल्क को नॉन-रिफंडेबल बताया गया, वहीं दूसरी ओर वीजा रिजेक्ट होने पर कुछ कटौती के बाद राशि लौटाने का उल्लेख भी था। आयोग ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि कंपनी सेवा प्रदान करने में विफल रही और शिकायतकर्ता को मानसिक पीड़ा, आर्थिक नुकसान व समय की हानि उठानी पड़ी। इसलिए कंपनी को निर्देश दिए गए कि वह 45 दिनों के भीतर शिकायतकर्ता को 2.10 लाख रुपये लौटाए। इसके साथ ही 7 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी अदा करे।
तय समय में भुगतान न करने पर ब्याज दर नौ प्रतिशत तक लागू होगी। आयोग ने कंपनी पर 11 हजार रुपये का हर्जाना भी लगाया है, जिसमें मानसिक उत्पीड़न और वाद व्यय शामिल है। आदेश में यह भी कहा गया है कि कंपनी की लापरवाही और गैर-जिम्मेदाराना रवैये के कारण शिकायतकर्ता का एक साल खराब हुआ, जो गंभीर विषय है।