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Yamuna Nagar News: बिजली निगम 45 दिन में दे ट्यूबवेल कनेक्शन

संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर Updated Sat, 21 Mar 2026 01:22 AM IST
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Electricity Corporation Must Provide Tubewell Connections Within 45 Days
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संवाद न्यूज एजेंसी
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यमुनानगर। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने साहब सिंह बनाम उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम लिमिटेड (यूएचबीवीएनएल) मामले में उपभोक्ता के पक्ष में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। आयोग ने माना कि शिकायतकर्ता साहब सिंह ने 17 जून 2022 को ट्यूबवेल के लिए बिजली कनेक्शन का आवेदन किया था। विभाग ने बिना उचित कारण के लंबे समय तक कनेक्शन जारी नहीं किया। आयोग ने इसे सेवा में कमी और गंभीर लापरवाही करार दिया।
बिजली निगम ने अपने बचाव में वर्ष 2023 के सेल्स सर्कुलर यू-06/2023 का हवाला दिया, जिसके अनुसार 10 बीएचपी तक के ट्यूबवेल कनेक्शन सोलर ऑफ-ग्रिड मोड से देने की व्यवस्था है। हालांकि आयोग ने साफ कहा कि किसी भी प्रशासनिक आदेश या सर्कुलर को पूर्व प्रभाव (रेट्रोस्पेक्टिव) से लागू नहीं किया जा सकता।
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2022 में किए गए आवेदन पर 2023 के नियम लागू करना कानून के विरुद्ध है। आयोग ने यह भी कहा कि यदि विभाग सोलर विकल्प लागू करना चाहता था, तो उसे समय रहते शिकायतकर्ता को सूचित करना चाहिए था और जमा आवेदन शुल्क लौटाना चाहिए था, जो नहीं किया गया। आयोग ने निर्देश दिए कि यूएचबीवीएनएल 45 दिनों के भीतर शिकायतकर्ता को ट्यूबवेल बिजली कनेक्शन जारी करे, बशर्ते वह आवश्यक अनुमानित राशि जमा करे। यदि तय समय सीमा में कनेक्शन जारी नहीं किया गया, तो विभाग को 5,000 रुपये मुआवजा देना होगा, जो देरी की अवधि तक लागू रहेगा।
आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि निगम सीधे भुगतान करने में असमर्थ होता है, तो वह क्रेडिट वाउचर जारी कर सकता है या राशि को उपभोक्ता के आगामी बिजली बिलों में समायोजित कर सकता है। आयोग ने अपने आदेश में कहा कि प्रशासनिक निर्देशों की आड़ में उपभोक्ता अधिकारों का हनन स्वीकार नहीं किया जा सकता। लंबे समय तक कनेक्शन न देना न केवल अनुचित है, बल्कि किसान की आजीविका पर सीधा प्रभाव डालता है। आदेश की प्रमाणित प्रति दोनों पक्षों को निःशुल्क उपलब्ध कराने और अनुपालन के बाद फाइल रिकॉर्ड रूम में भेजने के निर्देश भी दिए गए हैं। आयोग के अस्टिटेंट रजिस्ट्रार नीरज वालिया ने बताया कि यहां आने वाली हर शिकायत को गंभीरता से लिया जाता है, फिर दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद निर्णय सुनाया जाता है।
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