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Yamuna Nagar News: ग्राम सभा के लिए कोरम पूरा नहीं कर सके पचास फीसदी सरपंच
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Mon, 26 Jan 2026 01:19 AM IST
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भंगेड़ी गांव में ग्राम सभा में हिस्सा लेते अधिकारी व ग्रामीण। संवाद
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राजेश कुमार
यमुनानगर। पंचायतीराज विभाग की ओर से अनिवार्य किए गए 30 प्रतिशत मतदाताओं की मौजूदगी के नियम ने सरपंचों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। कोरम पूरा न होने के कारण न तो ग्राम सभा की बैठकें हो पा रही हैं और न ही विकास कार्यों के प्रस्ताव पास हो रहे हैं। अब अगली बैठक करने के लिए 20 प्रतिशत कोरम पूरा करना होगा।
पंचायतीराज विभाग ने आदेश जारी किया था कि किसी भी ग्राम सभा की बैठक तभी वैध मानी जाएगी, जब गांव के कुल मतदाताओं में से कम से कम 40 प्रतिशत लोग उसमें उपस्थित हों। बाद में इसे 30 प्रतिशत किया गया। यदि यह संख्या पूरी नहीं होती तो बैठक निरस्त मानी जाएगी और किसी भी विकास कार्य पर निर्णय नहीं लिया जा सकेगा। इसी नियम के चलते अधिकांश पंचायतों में प्रस्ताव पास नहीं हो पा रहे हैं।
स्थिति यह है कि सरपंच घर-घर लोगों को मनाने में जुटे हुए हैं। कई जगह सरपंच ग्रामीणों के आगे हाथ जोड़कर बैठक में आने की अपील कर रहे हैं। मुनादी करवाई जा रही है, घर-घर जाकर निमंत्रण दिए जा रहे हैं, फिर भी लोग ग्राम सभा की बैठकों से दूरी बनाए हुए हैं। सरपंचों के बार-बार आग्रह के बावजूद ग्रामीण बैठक में पहुंचने को तैयार नहीं हैं।
इस स्थिति ने सरपंचों के उन दावों की भी पोल खोल दी है, जिनमें वे अक्सर यह कहते नजर आते हैं कि उन्होंने अपने कार्यकाल में गांव में लाखों रुपये के विकास कार्य करवाए हैं। यदि वास्तव में विकास कार्यों से ग्रामीण संतुष्ट होते, तो ग्राम सभा की बैठकों में उनकी भागीदारी कहीं अधिक होती, लेकिन हकीकत इससे उलट दिखाई दे रही है।
आंकड़े भी हालात की गंभीरता बयान कर रहे हैं। जिले की 490 पंचायतों में से करीब 50 प्रतिशत पंचायतों में केवल कोरम पूरा न होने के कारण ग्राम सभा की बैठकें नहीं हो सकीं। इसका खामियाजा ग्रामीणों को भुगतना पड़ रहा है। सड़क, नाली, पेयजल, स्ट्रीट लाइट और अन्य जरूरी विकास कार्यों से जुड़े प्रस्ताव लंबित पड़े हैं। संवाद
सर्दी की वजह से भी नहीं आ रहे लोग : ठाठ सिंह
सरपंच एसोसिएशन के जिला प्रधान ठाठ सिंह का कहना है कि सरकार को कोरम वाला निर्णय पर पुनर्विचार करना चाहिए। क्योंकि इन दिनों सर्दी और शीत लहर भी एक बड़ी वजह है, जिसके चलते लोग घरों से बाहर नहीं निकलना चाहते। दूसरा दिहाड़ी मजदूरी करने वाले अपने काम पर चले जाते हैं। महिलाओं को ग्राम सभा की बैठक तक लेकर आना बड़ी चुनौती होता है। विकास कार्यों के यदि प्रस्ताव पास नहीं होंगे तो इसका असर गांवों पर पड़ना तय है।
वर्जन:
जिला की करीब 50 प्रतिशत ग्राम पंचायतें ऐसी हैं जिनमें कोरम पूरा नहीं होने की वजह से ग्राम सभा की बैठकें नहीं हो पाई। अब ग्राम पंचायतें दोबारा प्रयास करेंगी। - नरेंद्र सिंह, डीडीपीओ, यमुनानगर।
ग्राम सभा की बैठक में ग्रामीणों ने रखी समस्याएं
प्रतापनगर। गांव भंगेड़ी में ग्राम सभा का आयोजन किया गया। ग्राम सचिव अब्दुल सत्तार की अगुवाई में हुई इस बैठक में महिलाओं व पुरुषों ने भाग लिया। ग्राम सचिव ने बताया कि ग्रामीणों को वीबी-जीरामजी, प्रधानमंत्री आवास योजना, स्वच्छ भारत मिशन, जल जीवन मिशन, उज्ज्वला योजना, आयुष्मान भारत योजना, सड़क निर्माण, पेयजल व्यवस्था, सार्वजनिक संपत्तियों के रखरखाव एवं अन्य विकासात्मक योजनाओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। ग्राम सभा में लोगों ने पेयजल की अनियमित आपूर्ति, कुछ मार्गों की दुर्दशा, नालियों की सफाई, खेल मैदान व आंगनबाड़ी भवन की मरम्मत, पशु चिकित्सा सुविधा और गांव में अतिरिक्त स्ट्रीट लाइट लगाने जैसी मांगें रखीं। संवाद
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यमुनानगर। पंचायतीराज विभाग की ओर से अनिवार्य किए गए 30 प्रतिशत मतदाताओं की मौजूदगी के नियम ने सरपंचों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। कोरम पूरा न होने के कारण न तो ग्राम सभा की बैठकें हो पा रही हैं और न ही विकास कार्यों के प्रस्ताव पास हो रहे हैं। अब अगली बैठक करने के लिए 20 प्रतिशत कोरम पूरा करना होगा।
पंचायतीराज विभाग ने आदेश जारी किया था कि किसी भी ग्राम सभा की बैठक तभी वैध मानी जाएगी, जब गांव के कुल मतदाताओं में से कम से कम 40 प्रतिशत लोग उसमें उपस्थित हों। बाद में इसे 30 प्रतिशत किया गया। यदि यह संख्या पूरी नहीं होती तो बैठक निरस्त मानी जाएगी और किसी भी विकास कार्य पर निर्णय नहीं लिया जा सकेगा। इसी नियम के चलते अधिकांश पंचायतों में प्रस्ताव पास नहीं हो पा रहे हैं।
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स्थिति यह है कि सरपंच घर-घर लोगों को मनाने में जुटे हुए हैं। कई जगह सरपंच ग्रामीणों के आगे हाथ जोड़कर बैठक में आने की अपील कर रहे हैं। मुनादी करवाई जा रही है, घर-घर जाकर निमंत्रण दिए जा रहे हैं, फिर भी लोग ग्राम सभा की बैठकों से दूरी बनाए हुए हैं। सरपंचों के बार-बार आग्रह के बावजूद ग्रामीण बैठक में पहुंचने को तैयार नहीं हैं।
इस स्थिति ने सरपंचों के उन दावों की भी पोल खोल दी है, जिनमें वे अक्सर यह कहते नजर आते हैं कि उन्होंने अपने कार्यकाल में गांव में लाखों रुपये के विकास कार्य करवाए हैं। यदि वास्तव में विकास कार्यों से ग्रामीण संतुष्ट होते, तो ग्राम सभा की बैठकों में उनकी भागीदारी कहीं अधिक होती, लेकिन हकीकत इससे उलट दिखाई दे रही है।
आंकड़े भी हालात की गंभीरता बयान कर रहे हैं। जिले की 490 पंचायतों में से करीब 50 प्रतिशत पंचायतों में केवल कोरम पूरा न होने के कारण ग्राम सभा की बैठकें नहीं हो सकीं। इसका खामियाजा ग्रामीणों को भुगतना पड़ रहा है। सड़क, नाली, पेयजल, स्ट्रीट लाइट और अन्य जरूरी विकास कार्यों से जुड़े प्रस्ताव लंबित पड़े हैं। संवाद
सर्दी की वजह से भी नहीं आ रहे लोग : ठाठ सिंह
सरपंच एसोसिएशन के जिला प्रधान ठाठ सिंह का कहना है कि सरकार को कोरम वाला निर्णय पर पुनर्विचार करना चाहिए। क्योंकि इन दिनों सर्दी और शीत लहर भी एक बड़ी वजह है, जिसके चलते लोग घरों से बाहर नहीं निकलना चाहते। दूसरा दिहाड़ी मजदूरी करने वाले अपने काम पर चले जाते हैं। महिलाओं को ग्राम सभा की बैठक तक लेकर आना बड़ी चुनौती होता है। विकास कार्यों के यदि प्रस्ताव पास नहीं होंगे तो इसका असर गांवों पर पड़ना तय है।
वर्जन:
जिला की करीब 50 प्रतिशत ग्राम पंचायतें ऐसी हैं जिनमें कोरम पूरा नहीं होने की वजह से ग्राम सभा की बैठकें नहीं हो पाई। अब ग्राम पंचायतें दोबारा प्रयास करेंगी। - नरेंद्र सिंह, डीडीपीओ, यमुनानगर।
ग्राम सभा की बैठक में ग्रामीणों ने रखी समस्याएं
प्रतापनगर। गांव भंगेड़ी में ग्राम सभा का आयोजन किया गया। ग्राम सचिव अब्दुल सत्तार की अगुवाई में हुई इस बैठक में महिलाओं व पुरुषों ने भाग लिया। ग्राम सचिव ने बताया कि ग्रामीणों को वीबी-जीरामजी, प्रधानमंत्री आवास योजना, स्वच्छ भारत मिशन, जल जीवन मिशन, उज्ज्वला योजना, आयुष्मान भारत योजना, सड़क निर्माण, पेयजल व्यवस्था, सार्वजनिक संपत्तियों के रखरखाव एवं अन्य विकासात्मक योजनाओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। ग्राम सभा में लोगों ने पेयजल की अनियमित आपूर्ति, कुछ मार्गों की दुर्दशा, नालियों की सफाई, खेल मैदान व आंगनबाड़ी भवन की मरम्मत, पशु चिकित्सा सुविधा और गांव में अतिरिक्त स्ट्रीट लाइट लगाने जैसी मांगें रखीं। संवाद