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Yamuna Nagar News: सड़क हादसों में जा रही लोगों की जान, कारण तलाशने में सुस्ती

Mon, 17 Aug 2026 01:02 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर Updated Mon, 17 Aug 2026 01:02 AM IST
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Lives lost in road accidents; sluggishness in identifying causes
सहारनपुर रोड पर खड़े खराब वाहनों के पास से निकलते वाहन। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
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यमुनानगर। जिले की सड़कों पर हर दिन लोगों की जान जा रही हैं। प्रशासन हादसों की मूल वजह जानने को लेकर जरा भी गंभीर नजर नहीं आ रहा। वहीं प्राथमिकी महज दो वाहनों की टक्कर का विवरण बनकर रह गई है। हादसा किन तकनीकी या बुनियादी खामियों के कारण हुआ, इसकी तह तक जाने का प्रयास नहीं किया जा रहा है।
जिले में इस साल जनवरी से अब तक 271 सड़क हादसे हो चुके हैं। इनमें 141 लोगों की जान गई, जबकि 156 लोग गंभीर और 83 लोगों को हल्की चोट लगी। 318 लोगों को हादसों में चोट नहीं लगी। वर्ष 2025 में 242 लोगों की सड़क हादसों में मौत हुई थी और 283 लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे। वर्ष 2024 में 227 लोगों की जान गई थी और 172 लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे।
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हादसों के सटीक कारणों का विश्लेषण करने और ब्लैक स्पॉट्स की पहचान के लिए सरकार ने इंटीग्रेटेड रोड एक्सीडेंट डेटाबेस (आईआरएडी) प्रणाली लागू की थी। हालांकि, जमीनी हकीकत यह है कि आईआरएडी की टीम दुर्घटनास्थल के दो वर्ग किलोमीटर के दायरे में औपचारिकता पूरी करती है, जिससे हादसे की मूल वजह जैसे सड़क की खराब बनावट, अंधेरा या अवैध मॉडिफिकेशन सामने नहीं आ पाती।
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नया वाहन खरीदने के बाद लोग उसमें जानलेवा मॉडिफिकेशन करवा रहे हैं। वाहनों में कंपनी से मिलने वाली पीली लाइटों को हटाकर 100 से 400 वाट तक की अत्यधिक तेज सफेद एलईडी या एचआईडी लाइटें लगाई जा रही हैं। रात के समय यह रोशनी सामने से आ रहे चालकों की आंखों में चकाचौंध पैदा कर देती है।
इससे कुछ पल के लिए उन्हें कुछ दिखाई नहीं देता और भीषण टक्कर हो जाती है। इसके अलावा, कई लोग वाहनों की बैक-लाइट्स पर काली टेप लगवा लेते हैं, जिससे रात में पीछे से आ रहे वाहन चालकों को आगे चल रही गाड़ी का अंदाजा नहीं मिल पाता।
हादसों की बड़ी वजह
राज्य सड़क सुरक्षा परिषद के सदस्य एडवोकेट सुशील आर्य का कहना है कि सड़कों पर बने जानलेवा गड्ढे, तीखे मोड़ों पर सांकेतिक बोर्ड का न होना, बंद पड़ी ट्रैफिक सिग्नल लाइटें, और सड़कों पर पसरा अंधेरा हादसों की मुख्य वजह बन रहे हैं। स्टेट व नेशनल हाईवे से जुड़ने वाली लिंक सड़कों पर स्पीड ब्रेकर का अभाव और डिवाइडरों पर रिफ्लेक्टर न होना स्थिति को और घातक बना रहा है। लोग वाहन लेकर लिंक मार्ग से अचानक सड़क पर चढ़ जाते हैं और हादसे का शिकार हो जाते हैं। जब तक हादसों की इन असली वजहों पर सख्त प्रशासनिक प्रहार नहीं होगा, तब तक सड़कों पर असमय खत्म होती जिंदगियों का यह सिलसिला नहीं थमेगा।

हादसों की असल वजह का पता लगाने के लिए अधिकारियों को बोला गया है। पुलिस के साथ-साथ संबंधित विभाग को मौके पर जाकर हादसों की वजह का मौके पर जाकर पता करने के लिए कहा गया है। - हैरतजीत कौर, जिला परिवहन अधिकारी, यमुनानगर।
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