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Yamuna Nagar News: निरीक्षण के लिए स्कूल में 30 से 40 मिनट रुकेंगे अधिकारी
Mon, 03 Aug 2026 12:11 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Mon, 03 Aug 2026 12:11 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। राजकीय स्कूलों में निरीक्षण के नाम पर अब शिक्षा विभाग के अधिकारियों की खानापूर्ति नहीं चलेगी। अब स्कूल का निरीक्षण करने वाले अधिकारियों को कम से कम 30 से 40 मिनट तक स्कूल में रहना होगा और वहां की वास्तविक स्थिति का जायजा लेकर रिपोर्ट तैयार करनी होगी।
अधिकारियों को निरीक्षण के दौरान केवल फोटो खिंचवाने या रजिस्टर में हस्ताक्षर करने तक सीमित नहीं रहना होगा, बल्कि विद्यार्थियों के सीखने के स्तर से लेकर स्कूल की मूलभूत सुविधाओं तक की जांच करनी होगी। निरीक्षण के बाद तैयार की गई रिपोर्ट एडीसी को भेजनी होगी, जिसमें स्कूल की कमियों और सुधार की जरूरतों का स्पष्ट उल्लेख करना होगा।
प्रशासन की ओर से खासतौर पर उन स्कूलों को प्राथमिकता दी जाएगी, जहां पिछले 60 दिनों से किसी अधिकारी ने निरीक्षण नहीं किया है। दूरदराज के क्षेत्रों में स्थित स्कूलों में भी नियमित विजिट सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। निरीक्षण का उद्देश्य केवल कमियां निकालना नहीं, बल्कि स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता और व्यवस्थाओं में सुधार लाना है।
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शिक्षा विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि बालवाटिका से लेकर कक्षा तीन तक के विद्यार्थियों में हिंदी और गणित के निपुण लक्ष्यों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा कराया जाए। इसके लिए उपचारात्मक शिक्षण (रिमेडिएशन), स्पॉट असेसमेंट और टीएलएम (टीचिंग लर्निंग मेटेरियल) के प्रभावी उपयोग पर विशेष ध्यान देने के लिए कहा गया।
निरीक्षण के दौरान अधिकारी विद्यार्थियों की वर्कबुक, शिक्षक गाइड, शिक्षण पद्धति, पाठ्यक्रम की प्रगति के साथ-साथ शौचालय, पेयजल, साफ-सफाई और स्कूल भवनों की स्थिति की भी जांच करेंगे। अभिभावकों की भागीदारी बढ़ाने के लिए निपुण पैरेंट एप से अधिक से अधिक अभिभावकों को जोड़ने के निर्देश दिए गए हैं। हर माह तीसरे शनिवार को अभिभावक-शिक्षक बैठक आयोजित करने और विद्यार्थियों को समय पर पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध कराने के लिए जल्द भेजने को कहा गया है।
बच्चों व शिक्षकों से पता चलेंगी कमियां : एडीसी
मामले में एडीसी नवीन आहूजा का कहना है कि निरीक्षण के नाम पर केवल औपचारिकता पूरी करने का कोई फायदा नहीं है। जब तक निरीक्षण करने वाला अधिकारी स्कूल में समय नहीं बीताएगा तो उसे वहां की कमियों का पता कैसे चलेगा। यह तभी हो सकता है कि जब से कम से कम 30 से 40 मिनट या इससे अधिक समय तक स्कूल में रहे। इस दौरान बच्चों व स्टाफ से भी बात करनी होगी जो कमियां सामने आएंगी उन्हें दूर करेंगे।
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यमुनानगर। राजकीय स्कूलों में निरीक्षण के नाम पर अब शिक्षा विभाग के अधिकारियों की खानापूर्ति नहीं चलेगी। अब स्कूल का निरीक्षण करने वाले अधिकारियों को कम से कम 30 से 40 मिनट तक स्कूल में रहना होगा और वहां की वास्तविक स्थिति का जायजा लेकर रिपोर्ट तैयार करनी होगी।
अधिकारियों को निरीक्षण के दौरान केवल फोटो खिंचवाने या रजिस्टर में हस्ताक्षर करने तक सीमित नहीं रहना होगा, बल्कि विद्यार्थियों के सीखने के स्तर से लेकर स्कूल की मूलभूत सुविधाओं तक की जांच करनी होगी। निरीक्षण के बाद तैयार की गई रिपोर्ट एडीसी को भेजनी होगी, जिसमें स्कूल की कमियों और सुधार की जरूरतों का स्पष्ट उल्लेख करना होगा।
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प्रशासन की ओर से खासतौर पर उन स्कूलों को प्राथमिकता दी जाएगी, जहां पिछले 60 दिनों से किसी अधिकारी ने निरीक्षण नहीं किया है। दूरदराज के क्षेत्रों में स्थित स्कूलों में भी नियमित विजिट सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। निरीक्षण का उद्देश्य केवल कमियां निकालना नहीं, बल्कि स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता और व्यवस्थाओं में सुधार लाना है।
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शिक्षा विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि बालवाटिका से लेकर कक्षा तीन तक के विद्यार्थियों में हिंदी और गणित के निपुण लक्ष्यों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा कराया जाए। इसके लिए उपचारात्मक शिक्षण (रिमेडिएशन), स्पॉट असेसमेंट और टीएलएम (टीचिंग लर्निंग मेटेरियल) के प्रभावी उपयोग पर विशेष ध्यान देने के लिए कहा गया।
निरीक्षण के दौरान अधिकारी विद्यार्थियों की वर्कबुक, शिक्षक गाइड, शिक्षण पद्धति, पाठ्यक्रम की प्रगति के साथ-साथ शौचालय, पेयजल, साफ-सफाई और स्कूल भवनों की स्थिति की भी जांच करेंगे। अभिभावकों की भागीदारी बढ़ाने के लिए निपुण पैरेंट एप से अधिक से अधिक अभिभावकों को जोड़ने के निर्देश दिए गए हैं। हर माह तीसरे शनिवार को अभिभावक-शिक्षक बैठक आयोजित करने और विद्यार्थियों को समय पर पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध कराने के लिए जल्द भेजने को कहा गया है।
बच्चों व शिक्षकों से पता चलेंगी कमियां : एडीसी
मामले में एडीसी नवीन आहूजा का कहना है कि निरीक्षण के नाम पर केवल औपचारिकता पूरी करने का कोई फायदा नहीं है। जब तक निरीक्षण करने वाला अधिकारी स्कूल में समय नहीं बीताएगा तो उसे वहां की कमियों का पता कैसे चलेगा। यह तभी हो सकता है कि जब से कम से कम 30 से 40 मिनट या इससे अधिक समय तक स्कूल में रहे। इस दौरान बच्चों व स्टाफ से भी बात करनी होगी जो कमियां सामने आएंगी उन्हें दूर करेंगे।