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Yamuna Nagar News: एक हफ्ते में एलसीएलओ को सीपीएलओ में बदलने के दिए आदेश
Sun, 02 Aug 2026 03:51 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Sun, 02 Aug 2026 03:51 AM IST
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पंचायत मंत्री कृष्णलाल पंवार को मांगपत्र देते यूनियन के पदाधिकारी। स्रोत : यूनियन
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मतलौडा। पंचायत मंत्री कृष्ण लाल पंवार ने एलसीएलओ (लोकल कमेटी लोकल ऑपरेटर) कर्मचारियों की समस्याओं पर कड़ा संज्ञान लिया है। उन्होंने पंचायत विभाग के मुख्य सचिव विजेंद्र कुमार को तुरंत फोन किया। मंत्री ने एक सप्ताह के भीतर सभी एलसीएलओ को सीपीएलओ (क्रीड पंचायत लोकल ऑपरेटर) में बदलने का आदेश दिया। यह निर्देश शनिवार को मतलौडा स्थित उनके आवास पर कर्मचारी प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात के बाद दिए गए।
कर्मचारियों ने मुलाकात के दौरान मंत्री को अपनी स्थिति से अवगत कराया। एलसीएलओ कर्मचारी यूनियन (सीटू) के राज्य प्रधान पवन डागर ने बताया कि क्रीड के तहत प्रदेश की सात हजार ग्राम पंचायतों में कर्मचारियों की नियुक्ति होनी थी। इन कर्मचारियों को फैमिली आईडी, आय प्रमाण पत्र, राशन कार्ड, निवास प्रमाण पत्र और पेंशन सत्यापन जैसी सेवाएं देनी थीं। चयन प्रक्रिया के बाद करीब साढ़े तीन हजार कर्मचारियों का पदनाम सीपीएलओ के बजाय एलसीएलओ कर दिया गया। उन्हें न तो कोई काम दिया जा रहा है और न ही मानदेय मिल रहा है। दूसरी तरफ, कार्यरत सीपीएलओ को मात्र छह हजार रुपये वेतन दिया जा रहा है। यह राशि न्यूनतम मजदूरी दर से भी काफी कम है।
यूनियन के राज्य कार्यकारिणी सदस्य रोहित धानिया ने कहा कि जब तक सभी एलसीएलओ को सीपीएलओ में परिवर्तित नहीं किया जाता, तब तक यह संघर्ष जारी रहेगा। कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर मंत्री से हस्तक्षेप की अपील की थी। मंत्री के इस निर्देश से हजारों कर्मचारियों को राहत मिलने की उम्मीद है। इस मौके पर दीपक देशवाल, रीत नैन, अनिल नरवाल, मंजू गुलिया, सुनीता, नसीम अहमद, सुरेंद्र जांगड़ा, प्रदीप चहल और शीला सहित कई सदस्य मौजूद रहे। संवाद
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कर्मचारियों ने मुलाकात के दौरान मंत्री को अपनी स्थिति से अवगत कराया। एलसीएलओ कर्मचारी यूनियन (सीटू) के राज्य प्रधान पवन डागर ने बताया कि क्रीड के तहत प्रदेश की सात हजार ग्राम पंचायतों में कर्मचारियों की नियुक्ति होनी थी। इन कर्मचारियों को फैमिली आईडी, आय प्रमाण पत्र, राशन कार्ड, निवास प्रमाण पत्र और पेंशन सत्यापन जैसी सेवाएं देनी थीं। चयन प्रक्रिया के बाद करीब साढ़े तीन हजार कर्मचारियों का पदनाम सीपीएलओ के बजाय एलसीएलओ कर दिया गया। उन्हें न तो कोई काम दिया जा रहा है और न ही मानदेय मिल रहा है। दूसरी तरफ, कार्यरत सीपीएलओ को मात्र छह हजार रुपये वेतन दिया जा रहा है। यह राशि न्यूनतम मजदूरी दर से भी काफी कम है।
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यूनियन के राज्य कार्यकारिणी सदस्य रोहित धानिया ने कहा कि जब तक सभी एलसीएलओ को सीपीएलओ में परिवर्तित नहीं किया जाता, तब तक यह संघर्ष जारी रहेगा। कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर मंत्री से हस्तक्षेप की अपील की थी। मंत्री के इस निर्देश से हजारों कर्मचारियों को राहत मिलने की उम्मीद है। इस मौके पर दीपक देशवाल, रीत नैन, अनिल नरवाल, मंजू गुलिया, सुनीता, नसीम अहमद, सुरेंद्र जांगड़ा, प्रदीप चहल और शीला सहित कई सदस्य मौजूद रहे। संवाद
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