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Yamuna Nagar News: 70 करोड़ के धान घोटाले में बर्खास्त चार अधिकारी हो सकते हैं गिरफ्तार
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Fri, 20 Mar 2026 01:13 AM IST
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विनोद कुमार।
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संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। जिले में सामने आए 70 करोड़ रुपये के धान घोटाले में कार्रवाई का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। खाद्य एवं आपूर्ति विभाग से बर्खास्त किए गए एएफएसओ देवेंद्र कुमार और इंस्पेक्टर सविता, मनोज कुमार व विनोद कुमार पर अब गिरफ्तारी की तलवार भी लटक गई है।
आरोपी राइस मिलर संदीप सिंगला से हुई पूछताछ में भी इनके नाम सामने आए थे। ऐसे में एसआईटी अब इनसे सीधे पूछताछ कर पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने की तैयारी में है। चूंकि चारों अधिकारी सेवा से बर्खास्त हो चुके हैं, मामले में हैफेड के सीनियर मैनेजर सलेंद्र गिरफ्तार हो चुके हैं।
डीएफएससी कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार इंस्पेक्टर सविता पिछले करीब आठ वर्षों से यमुनानगर में तैनात थीं। वर्ष 2012 में सब इंस्पेक्टर के रूप में भर्ती हुईं सविता को 2020 में पदोन्नत कर इंस्पेक्टर बनाया गया था। वह छछरौली क्षेत्र की निवासी हैं और उन्हें उसी क्षेत्र की अनाज मंडी में तैनात किया गया।
स्थानीय होने के कारण उनका राइस मिलरों से मजबूत नेटवर्क बन गया, जिसका फायदा घोटाले में उठाया गया। वहीं विनोद कुमार वर्ष 2025 में और रेवाड़ी निवासी मनोज कुमार वर्ष 2024 में ट्रांसफर होकर यमुनानगर आए थे। एएफएसओ देवेंद्र कुमार का मार्च 2025 में तबादला यहां हुआ था।
चारों अधिकारियों को विभाग के निदेशक ने व्यक्तिगत सुनवाई का अवसर दिया था। किसी ने भी अपनी गलती स्वीकार नहीं की। इंस्पेक्टर विनोद कुमार की ड्यूटी प्रतापनगर मंडी में थी, उनकी आईडी से आरोपी मिलर संदीप सिंगला की फर्मों मेसर्स श्री बद्री विशाल फूड्स और श्री जी एग्रो फूड्स के नाम गेट पास जारी किए गए।
सुनवाई में उन्होंने दावा किया कि यह सब उच्चाधिकारियों के दबाव में हुआ। इंस्पेक्टर सविता की आईडी से छछरौली स्थित मैसर्ज सिंगला एग्रो फूड्स को धान आवंटित किया गया। 14 नवंबर 2025 की जांच में वहां धान की कमी पाई गई। सविता ने अपने बचाव में कहा कि धान मिल में भेज दिया गया था और आगे की जिम्मेदारी मिलर की है।
रणजीतपुर मंडी में तैनात इंस्पेक्टर मनोज कुमार यादव की आईडी से मेसर्स श्री बालाजी एग्रो इंडस्ट्रीज को धान भेजा गया। जांच में यहां भी एक ही परिसर में दो राइस मिल चलती मिलीं। मनोज कुमार को 17 मार्च को सुनवाई के लिए बुलाया गया था, लेकिन उन्होंने मेडिकल भेजकर पेशी से बचने का प्रयास किया। इसे मामले में देरी की कोशिश मानते हुए विभाग ने उन्हें भी बर्खास्त कर दिया। एएफएसओ देवेंद्र कुमार पर आरोप है कि उन्होंने प्रतापनगर मंडी में सुपरवाइजर रहते हुए एक ही परिसर में कई मिल संचालित होने की जानकारी छिपाई। उन्होंने सफाई दी कि उनके पास 82 राइस मिल और सात मंडियों का कार्यभार था, जिसके चलते वे इस गड़बड़ी पर ध्यान नहीं दे सके।
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आरोपी राइस मिलर संदीप सिंगला से हुई पूछताछ में भी इनके नाम सामने आए थे। ऐसे में एसआईटी अब इनसे सीधे पूछताछ कर पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने की तैयारी में है। चूंकि चारों अधिकारी सेवा से बर्खास्त हो चुके हैं, मामले में हैफेड के सीनियर मैनेजर सलेंद्र गिरफ्तार हो चुके हैं।
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डीएफएससी कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार इंस्पेक्टर सविता पिछले करीब आठ वर्षों से यमुनानगर में तैनात थीं। वर्ष 2012 में सब इंस्पेक्टर के रूप में भर्ती हुईं सविता को 2020 में पदोन्नत कर इंस्पेक्टर बनाया गया था। वह छछरौली क्षेत्र की निवासी हैं और उन्हें उसी क्षेत्र की अनाज मंडी में तैनात किया गया।
स्थानीय होने के कारण उनका राइस मिलरों से मजबूत नेटवर्क बन गया, जिसका फायदा घोटाले में उठाया गया। वहीं विनोद कुमार वर्ष 2025 में और रेवाड़ी निवासी मनोज कुमार वर्ष 2024 में ट्रांसफर होकर यमुनानगर आए थे। एएफएसओ देवेंद्र कुमार का मार्च 2025 में तबादला यहां हुआ था।
चारों अधिकारियों को विभाग के निदेशक ने व्यक्तिगत सुनवाई का अवसर दिया था। किसी ने भी अपनी गलती स्वीकार नहीं की। इंस्पेक्टर विनोद कुमार की ड्यूटी प्रतापनगर मंडी में थी, उनकी आईडी से आरोपी मिलर संदीप सिंगला की फर्मों मेसर्स श्री बद्री विशाल फूड्स और श्री जी एग्रो फूड्स के नाम गेट पास जारी किए गए।
सुनवाई में उन्होंने दावा किया कि यह सब उच्चाधिकारियों के दबाव में हुआ। इंस्पेक्टर सविता की आईडी से छछरौली स्थित मैसर्ज सिंगला एग्रो फूड्स को धान आवंटित किया गया। 14 नवंबर 2025 की जांच में वहां धान की कमी पाई गई। सविता ने अपने बचाव में कहा कि धान मिल में भेज दिया गया था और आगे की जिम्मेदारी मिलर की है।
रणजीतपुर मंडी में तैनात इंस्पेक्टर मनोज कुमार यादव की आईडी से मेसर्स श्री बालाजी एग्रो इंडस्ट्रीज को धान भेजा गया। जांच में यहां भी एक ही परिसर में दो राइस मिल चलती मिलीं। मनोज कुमार को 17 मार्च को सुनवाई के लिए बुलाया गया था, लेकिन उन्होंने मेडिकल भेजकर पेशी से बचने का प्रयास किया। इसे मामले में देरी की कोशिश मानते हुए विभाग ने उन्हें भी बर्खास्त कर दिया। एएफएसओ देवेंद्र कुमार पर आरोप है कि उन्होंने प्रतापनगर मंडी में सुपरवाइजर रहते हुए एक ही परिसर में कई मिल संचालित होने की जानकारी छिपाई। उन्होंने सफाई दी कि उनके पास 82 राइस मिल और सात मंडियों का कार्यभार था, जिसके चलते वे इस गड़बड़ी पर ध्यान नहीं दे सके।

विनोद कुमार।

विनोद कुमार।

विनोद कुमार।

विनोद कुमार।