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Yamuna Nagar News: बिजली कटौती से छोटे उद्योग बेहाल, बढ़ी उत्पादन लागत
Mon, 13 Jul 2026 12:52 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Mon, 13 Jul 2026 12:52 AM IST
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बिजली लाइन की मरम्मत करते लाइनमैन मिट्ठू राम। स्वयं
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संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। बरसात के मौसम में लगातार हो रही बिजली कटौती का असर जिले के छोटे उद्योगों पर साफ दिखाई देने लगा है। बार-बार लग रहे बिजली कट के कारण बर्तन उद्योग, प्लाईवुड इकाइयों सहित कई छोटे कारोबार प्रभावित हो रहे हैं। उत्पादन बाधित होने से उद्योग संचालकों को डीजल और पेट्रोल से मशीनें चलानी पड़ रही हैं, जिससे लागत बढ़ने के साथ उत्पादों की कीमतों पर भी असर पड़ने लगा है।
बर्तन कारोबारियों का कहना है कि बिजली जाने पर मशीनें बंद हो जाती हैं और मजदूरों को घंटों काम रुकने के कारण खाली बैठना पड़ता है। इससे उत्पादन प्रभावित होने के साथ समय पर ऑर्डर पूरे करना भी मुश्किल हो रहा है। उनका कहना है कि यदि यही स्थिति बनी रही तो छोटे उद्योगों के सामने आर्थिक संकट गहरा सकता है।
प्लाईवुड कारोबारी नितेश कक्कड़, अमन खत्री व अन्य कारोबारियों का कहना है कि प्लाईवुड उद्योग पूरी तरह बिजली पर निर्भर है। बिजली कटौती का कोई निश्चित समय नहीं होने से उत्पादन की योजना प्रभावित हो रही है। मजबूरी में जनरेटर चलाकर काम करना पड़ रहा है, जिससे डीजल का अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ रहा है।
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इससे उत्पादन लागत बढ़ रही है और कारोबार में लाभ नहीं हो रहा है। अगर लाइट चले जाने पर छोटे जरनेटर का प्रयोग किया जाता है तो एक घंटे में करीब 16 लीटर डीजल की खपत होती है और अगर छोटे जरनेटर का प्रयोग काम के हिसाब से करते हैं तो प्रतिघंटे के हिसाब से 10 लीटर डीजल की खपत होती है जिसका अतिरिक्त खर्च बढ़ जाता है।
उद्योग संचालकों का कहना है कि लगातार बढ़ती लागत के कारण तैयार उत्पादों की कीमतों में भी बढ़ोतरी करनी पड़ रही है, जिसका असर बाजार और ग्राहकों पर पड़ रहा है। उन्होंने बिजली निगम से औद्योगिक क्षेत्रों में निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग करते हुए कहा कि नियमित बिजली मिलने से उत्पादन बढ़ेगा और छोटे उद्योगों को राहत मिलेगी
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यमुनानगर। बरसात के मौसम में लगातार हो रही बिजली कटौती का असर जिले के छोटे उद्योगों पर साफ दिखाई देने लगा है। बार-बार लग रहे बिजली कट के कारण बर्तन उद्योग, प्लाईवुड इकाइयों सहित कई छोटे कारोबार प्रभावित हो रहे हैं। उत्पादन बाधित होने से उद्योग संचालकों को डीजल और पेट्रोल से मशीनें चलानी पड़ रही हैं, जिससे लागत बढ़ने के साथ उत्पादों की कीमतों पर भी असर पड़ने लगा है।
बर्तन कारोबारियों का कहना है कि बिजली जाने पर मशीनें बंद हो जाती हैं और मजदूरों को घंटों काम रुकने के कारण खाली बैठना पड़ता है। इससे उत्पादन प्रभावित होने के साथ समय पर ऑर्डर पूरे करना भी मुश्किल हो रहा है। उनका कहना है कि यदि यही स्थिति बनी रही तो छोटे उद्योगों के सामने आर्थिक संकट गहरा सकता है।
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प्लाईवुड कारोबारी नितेश कक्कड़, अमन खत्री व अन्य कारोबारियों का कहना है कि प्लाईवुड उद्योग पूरी तरह बिजली पर निर्भर है। बिजली कटौती का कोई निश्चित समय नहीं होने से उत्पादन की योजना प्रभावित हो रही है। मजबूरी में जनरेटर चलाकर काम करना पड़ रहा है, जिससे डीजल का अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ रहा है।
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इससे उत्पादन लागत बढ़ रही है और कारोबार में लाभ नहीं हो रहा है। अगर लाइट चले जाने पर छोटे जरनेटर का प्रयोग किया जाता है तो एक घंटे में करीब 16 लीटर डीजल की खपत होती है और अगर छोटे जरनेटर का प्रयोग काम के हिसाब से करते हैं तो प्रतिघंटे के हिसाब से 10 लीटर डीजल की खपत होती है जिसका अतिरिक्त खर्च बढ़ जाता है।
उद्योग संचालकों का कहना है कि लगातार बढ़ती लागत के कारण तैयार उत्पादों की कीमतों में भी बढ़ोतरी करनी पड़ रही है, जिसका असर बाजार और ग्राहकों पर पड़ रहा है। उन्होंने बिजली निगम से औद्योगिक क्षेत्रों में निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग करते हुए कहा कि नियमित बिजली मिलने से उत्पादन बढ़ेगा और छोटे उद्योगों को राहत मिलेगी