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Yamuna Nagar News: हैफेड के क्रय अधिकारी के बैंक खातों व संपत्तियों की होगी जांच
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Tue, 24 Mar 2026 01:16 AM IST
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राइस मिल में पड़ी धान की बोरियां। आर्काइव
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संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। जिले में सामने आए 70 करोड़ रुपये के बहुचर्चित धान घोटाले की जांच अब और तेज हो गई है। मामले में गिरफ्तार हैफेड के क्रय अधिकारी अनिल कुमार के बैंक खातों और संपत्तियों की गहन जांच शुरू कर दी गई है। एसआईटी यह पता लगाने में जुटी हैं कि धान खरीद से पहले, दौरान और बाद में उसके खातों में कितनी रकम जमा हुई और यह पैसा कहां से आया।
रिमांड के दौरान अनिल कुमार से उसकी चल-अचल संपत्तियों के बारे में विस्तृत पूछताछ की गई। यह भी जानकारी जुटाई गई कि उसके कितने बैंक खाते हैं और किन-किन बैंकों में संचालित हो रहे हैं। इसके अलावा उसके बच्चों की पढ़ाई, स्कूल और मासिक फीस तक की जानकारी एकत्र की गई है, ताकि उसकी आय और खर्च के बीच अंतर का आकलन किया जा सके।
तीन दिन का पुलिस रिमांड पूरा होने के बाद सोमवार को अनिल कुमार को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। जांच के दौरान उसकी भूमिका फर्जी गेट पास काटने में सामने आई है। प्रतापनगर मंडी में राइस मिल मालिक संदीप सिंगला के साथ मिलकर फर्जी गेट पास जारी किए गए, जिसके जरिए घोटाले को अंजाम दिया गया।
मामले की जांच कर रही एसआईटी अब इस पूरे नेटवर्क की परतें खोलने में जुटी है। टीम यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इस घोटाले में और कौन-कौन लोग शामिल थे और किस स्तर पर मिलीभगत हुई। इसके लिए डिजिटल साक्ष्यों का सहारा लिया जा रहा है। मोबाइल डेटा, कॉल डिटेल रिकॉर्ड और अन्य तकनीकी पहलुओं को खंगाल रही हैं।
पैसों के लेन-देन की भी बारीकी से जांच की जा रही है, ताकि घोटाले की पूरी कड़ी जोड़ी जा सके और इसमें शामिल अन्य लोगों तक पहुंचा जा सके। इसी कड़ी में हैफेड के सीनियर मैनेजर सलेंद्र, जिन्हें पहले ही न्यायिक हिरासत में भेजा जा चुका है, उनकी संपत्तियों और बैंक खातों की भी जांच की जा रही है। राजस्व विभाग और लीड बैंक मैनेजर के माध्यम से उनकी वित्तीय जानकारी जुटाई जा रही है। पुलिस का मानना है कि बैंक लेन-देन और संपत्तियों के विश्लेषण से घोटाले के पैमाने और इसमें शामिल लोगों की भूमिका स्पष्ट हो सकेगी।
धान घोटाले में गिरफ्तार हैफेड के क्रय अधिकारी अनिल कुमार को रिमांड पूरा होने के बाद न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। उनकी प्रॉपर्टी की जांच भी की जाएगी। आने वाले दिनों में इस मामले में और खुलासे होने की संभावना है, जिससे पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश हो सकेगा। - राजकुमार, प्रभारी सीआईए-वन।
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यमुनानगर। जिले में सामने आए 70 करोड़ रुपये के बहुचर्चित धान घोटाले की जांच अब और तेज हो गई है। मामले में गिरफ्तार हैफेड के क्रय अधिकारी अनिल कुमार के बैंक खातों और संपत्तियों की गहन जांच शुरू कर दी गई है। एसआईटी यह पता लगाने में जुटी हैं कि धान खरीद से पहले, दौरान और बाद में उसके खातों में कितनी रकम जमा हुई और यह पैसा कहां से आया।
रिमांड के दौरान अनिल कुमार से उसकी चल-अचल संपत्तियों के बारे में विस्तृत पूछताछ की गई। यह भी जानकारी जुटाई गई कि उसके कितने बैंक खाते हैं और किन-किन बैंकों में संचालित हो रहे हैं। इसके अलावा उसके बच्चों की पढ़ाई, स्कूल और मासिक फीस तक की जानकारी एकत्र की गई है, ताकि उसकी आय और खर्च के बीच अंतर का आकलन किया जा सके।
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तीन दिन का पुलिस रिमांड पूरा होने के बाद सोमवार को अनिल कुमार को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। जांच के दौरान उसकी भूमिका फर्जी गेट पास काटने में सामने आई है। प्रतापनगर मंडी में राइस मिल मालिक संदीप सिंगला के साथ मिलकर फर्जी गेट पास जारी किए गए, जिसके जरिए घोटाले को अंजाम दिया गया।
मामले की जांच कर रही एसआईटी अब इस पूरे नेटवर्क की परतें खोलने में जुटी है। टीम यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इस घोटाले में और कौन-कौन लोग शामिल थे और किस स्तर पर मिलीभगत हुई। इसके लिए डिजिटल साक्ष्यों का सहारा लिया जा रहा है। मोबाइल डेटा, कॉल डिटेल रिकॉर्ड और अन्य तकनीकी पहलुओं को खंगाल रही हैं।
पैसों के लेन-देन की भी बारीकी से जांच की जा रही है, ताकि घोटाले की पूरी कड़ी जोड़ी जा सके और इसमें शामिल अन्य लोगों तक पहुंचा जा सके। इसी कड़ी में हैफेड के सीनियर मैनेजर सलेंद्र, जिन्हें पहले ही न्यायिक हिरासत में भेजा जा चुका है, उनकी संपत्तियों और बैंक खातों की भी जांच की जा रही है। राजस्व विभाग और लीड बैंक मैनेजर के माध्यम से उनकी वित्तीय जानकारी जुटाई जा रही है। पुलिस का मानना है कि बैंक लेन-देन और संपत्तियों के विश्लेषण से घोटाले के पैमाने और इसमें शामिल लोगों की भूमिका स्पष्ट हो सकेगी।
धान घोटाले में गिरफ्तार हैफेड के क्रय अधिकारी अनिल कुमार को रिमांड पूरा होने के बाद न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। उनकी प्रॉपर्टी की जांच भी की जाएगी। आने वाले दिनों में इस मामले में और खुलासे होने की संभावना है, जिससे पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश हो सकेगा। - राजकुमार, प्रभारी सीआईए-वन।