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Yamuna Nagar News: बिना सूचना कर्ज की अवधि बढ़ाने के लिए कंपनी जिम्मेदार
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Mon, 23 Mar 2026 12:56 AM IST
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जिला उपभोक्ता आयोग। आर्काइव
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संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। हर महीने समय पर ईएमआई भरते रहने के बावजूद जब लोन की अवधि अचानक बढ़ी हुई नजर आए, तो यह किसी भी परिवार के लिए हैरानी की बात होती है। यमुनानगर में एक ऐसा ही मामला सामने आया, जहां एक परिवार को अपने लोन खाते का स्टेटमेंट मिलने पर पता चला कि उनकी किस्तों की संख्या 120 से बढ़ाकर 140 कर दी गई है।
जिले के बूड़िया निवासी राजिंद्र सिंह, उनकी पत्नी सुनीता और बेटे शक्ति गिल ने उपभोक्ता आयोग में दी शिकायत में बताया कि उन्होंने वर्ष 2018 में 25 लाख रुपये का लोन लिया था। उस समय उन्हें 10 साल यानी 120 माह में लोन चुकाने की बात कही गई थी और करीब 35,868 रुपये मासिक किस्त तय हुई थी। परिवार का कहना है कि उन्होंने नियमित रूप से किस्तें जमा करवाईं और किसी तरह की चूक नहीं की।
अप्रैल 2023 में जब उन्होंने लोन खाते का स्टेटमेंट लिया तो तस्वीर बदल चुकी थी। स्टेटमेंट में लोन अवधि 140 माह दिखाई दे रही थी। यह देखकर परिवार हैरान रह गया। उन्होंने कंपनी से जवाब मांगा, लेकिन स्पष्ट जानकारी नहीं मिली। इसके बाद उन्होंने कानूनी नोटिस भेजा और मामला उपभोक्ता आयोग तक पहुंच गया।
सुनवाई के दौरान वित्त कंपनी ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि लोन फ्लोटिंग ब्याज दर पर था और ब्याज दर में बदलाव होने पर अवधि या ईएमआई में परिवर्तन संभव है। कंपनी का दावा था कि यह सब लोन एग्रीमेंट के तहत किया गया। हालांकि जिला उपभोक्ता आयोग ने इस दलील को पूरी तरह स्वीकार नहीं किया। आयोग ने पाया कि कंपनी यह साबित नहीं कर सकी कि उसने लोन अवधि बढ़ाने से पहले उपभोक्ताओं को कोई लिखित सूचना दी थी।
आयोग ने साफ कहा कि इस तरह का बदलाव बिना जानकारी दिए करना सेवा में कमी है। वहीं, ब्याज दर को 12 प्रतिशत से घटाकर 7 प्रतिशत करने की मांग पर आयोग ने शिकायतकर्ताओं को राहत नहीं दी, क्योंकि इसके समर्थन में ठोस सबूत पेश नहीं किए जा सके। फैसले में आयोग ने स्पष्ट किया कि वित्तीय संस्थानों को पारदर्शिता बरतनी चाहिए और उपभोक्ता के लोन खाते में किसी भी बड़े बदलाव से पहले उसे सूचित करना जरूरी है।
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यमुनानगर। हर महीने समय पर ईएमआई भरते रहने के बावजूद जब लोन की अवधि अचानक बढ़ी हुई नजर आए, तो यह किसी भी परिवार के लिए हैरानी की बात होती है। यमुनानगर में एक ऐसा ही मामला सामने आया, जहां एक परिवार को अपने लोन खाते का स्टेटमेंट मिलने पर पता चला कि उनकी किस्तों की संख्या 120 से बढ़ाकर 140 कर दी गई है।
जिले के बूड़िया निवासी राजिंद्र सिंह, उनकी पत्नी सुनीता और बेटे शक्ति गिल ने उपभोक्ता आयोग में दी शिकायत में बताया कि उन्होंने वर्ष 2018 में 25 लाख रुपये का लोन लिया था। उस समय उन्हें 10 साल यानी 120 माह में लोन चुकाने की बात कही गई थी और करीब 35,868 रुपये मासिक किस्त तय हुई थी। परिवार का कहना है कि उन्होंने नियमित रूप से किस्तें जमा करवाईं और किसी तरह की चूक नहीं की।
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अप्रैल 2023 में जब उन्होंने लोन खाते का स्टेटमेंट लिया तो तस्वीर बदल चुकी थी। स्टेटमेंट में लोन अवधि 140 माह दिखाई दे रही थी। यह देखकर परिवार हैरान रह गया। उन्होंने कंपनी से जवाब मांगा, लेकिन स्पष्ट जानकारी नहीं मिली। इसके बाद उन्होंने कानूनी नोटिस भेजा और मामला उपभोक्ता आयोग तक पहुंच गया।
सुनवाई के दौरान वित्त कंपनी ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि लोन फ्लोटिंग ब्याज दर पर था और ब्याज दर में बदलाव होने पर अवधि या ईएमआई में परिवर्तन संभव है। कंपनी का दावा था कि यह सब लोन एग्रीमेंट के तहत किया गया। हालांकि जिला उपभोक्ता आयोग ने इस दलील को पूरी तरह स्वीकार नहीं किया। आयोग ने पाया कि कंपनी यह साबित नहीं कर सकी कि उसने लोन अवधि बढ़ाने से पहले उपभोक्ताओं को कोई लिखित सूचना दी थी।
आयोग ने साफ कहा कि इस तरह का बदलाव बिना जानकारी दिए करना सेवा में कमी है। वहीं, ब्याज दर को 12 प्रतिशत से घटाकर 7 प्रतिशत करने की मांग पर आयोग ने शिकायतकर्ताओं को राहत नहीं दी, क्योंकि इसके समर्थन में ठोस सबूत पेश नहीं किए जा सके। फैसले में आयोग ने स्पष्ट किया कि वित्तीय संस्थानों को पारदर्शिता बरतनी चाहिए और उपभोक्ता के लोन खाते में किसी भी बड़े बदलाव से पहले उसे सूचित करना जरूरी है।