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Yamuna Nagar News: नेत्रदान की रोशनी से दुनिया के रंग देख रहे जरूरतमंद

संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर Updated Wed, 10 Jun 2026 01:25 AM IST
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The needy are seeing the colors of the world thanks to the light of eye donation
जिला अस्पताल में लोगों की आंखों की जांच करतीं काउंसलर मनीषा। संवाद - फोटो : रामेश्वर दास
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संवाद न्यूज एजेंसी

यमुनानगर। जिले में नेत्रदान के प्रति बढ़ती जागरूकता एक सकारात्मक बदलाव लाया है। अब कई परिवार अपने प्रियजनों के निधन के बाद उनकी आंखें दान कर दूसरों के जीवन में रोशनी पहुंचाने का संकल्प ले रहे हैं। कभी वर्षभर में केवल दो लोग ही नेत्रदान करने थे। अब यह संख्या बढ़कर 14 तक पहुंच गई है।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से लगातार चलाए जा रहे जागरूकता कार्यक्रमों और सामाजिक भागीदारी के कारण लोगों की सोच में परिवर्तन आया है। 2019 में दो नेत्रदान हुए थे। इसके बाद दो साल तक कोरोना महामारी रही। 2022 में चार, 2023 में आठ, 2024 में 14, 2025 में 13 और इस साल में अभी तक पांच लोग नेत्रदान कर चुके हैं।
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जिले में हाल के महीनों में सामने आए कई उदाहरण समाज के लिए प्रेरणास्रोत बने हैं। इसी वर्ष मार्च में थाना जठलाना क्षेत्र के गांव मंधार में ट्रैक्टर की चपेट में आने से 14 वर्षीय उत्कर्ष की मृत्यु हो गई थी। गमगीन माहौल के बीच परिवार ने साहसिक निर्णय लेते हुए उसकी दोनों आंखें दान कर दीं, ताकि किसी और के जीवन में उजाला लौट सके।
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परिवार की इस पहल की क्षेत्रभर में सराहना हुई। इसी प्रकार गांव बरसान की 82 वर्षीय बीरबती कांबोज के परिजनों ने न केवल उनकी आंखें दान कीं बल्कि उनकी पूरी देह चिकित्सा अनुसंधान के लिए समर्पित कर मानव सेवा का अनूठा उदाहरण प्रस्तुत किया। वहीं शहर की कालिंदी कॉलोनी निवासी 75 वर्षीय राजकुमारी वोहरा की आंखें भी उनके निधन के बाद परिजनों ने दान कराईं। ऐसे उदाहरणों से अन्य परिवार भी प्रेरित हो रहे हैं।
मई में 225 मरीजों के हुए ऑपरेशन : डॉ. गोयल

जिला नागरिक अस्पताल के नेत्र रोग विशेषज्ञ एवं पीएमओ डॉ. विपुल गोयल ने बताया कि अस्पताल में नेत्र रोगियों के उपचार की सभी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं। हर माह औसतन 200 से 220 मरीजों की आंखों के ऑपरेशन किए जा रहे हैं। मई माह में 225 सफल ऑपरेशन हुए। मरीजों को ऑपरेशन, दवाइयां और चश्मे की सुविधा निःशुल्क उपलब्ध कराई जा रही है। मरीजों की बढ़ती संख्या के कारण एक माह तक की प्रतीक्षा सूची चल रही है, हालांकि मधुमेह से पीड़ित मरीजों को प्राथमिकता के आधार पर उपचार दिया जाता है।
मृत्यु के आठ घंटे बाद तक दान की जा सकती हैं आंखें

स्वास्थ्य विभाग की काउंसलर मनीषा का कहना है कि नेत्रदान ऐसा महादान है, जिससे किसी नेत्रहीन व्यक्ति को नई दृष्टि और नया जीवन मिल सकता है। किसी व्यक्ति के निधन के बाद छह से आठ घंटे के भीतर ही आंखें दान की जा सकती हैं। इस दौरान यह ध्यान रखना चाहिए कि आंखें खुली नहीं रहनी चाहिए। यदि मृतक की आंखें खुली हैं तो उन्हें बंद कर देना चाहिए। यदि पंखा चल रहा है तो उसे बंद कर देना चाहिए। ऐसे समय में परिजन डायल 112 या एंबुलेंस कंट्रोल रूम पर सूचना देकर नेत्रदान की प्रक्रिया शुरू करवा सकते हैं। विभाग द्वारा गांवों, स्कूलों और सामाजिक संस्थाओं के सहयोग से शिविर आयोजित कर लोगों को जागरूक किया जा रहा है। यदि समाज इसी तरह आगे आता रहा तो आने वाले वर्षों में नेत्रदान की संख्या में और वृद्धि होगी तथा अनेक जरूरतमंदों के जीवन में रोशनी पहुंच सकेगी।
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