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Yamuna Nagar News: पीपीपी में लखपति बन गए मजदूर, राशन मिलना बंद
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Wed, 10 Jun 2026 01:34 AM IST
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क्रीड कार्यालय में पीपीपी की त्रुटियां ठीक कराने पहुंचे लोग। संवाद
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संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। परिवार पहचान पत्र (पीपीपी) में दर्ज गलत जानकारियां गरीब और मजदूर वर्ग के लिए बड़ी मुसीबत बनती जा रही हैं। जिन लोगों की रोजाना की कमाई मुश्किल से 100 से 200 रुपये है, उन्हें सरकारी रिकॉर्ड में लाखों रुपये सालाना आय वाला दिखा दिया गया है। इससे उनका राशन बंद हो गया।
जिले के नागरिक संसाधन सूचना विभाग (क्रीड) के कार्यालय में प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग विभिन्न प्रकार की त्रुटियां ठीक कराने पहुंच रहे हैं। सबसे अधिक परेशानी जन्मतिथि और आय संबंधी गलतियों को लेकर सामने आ रही है। कार्यालय के आंकड़ों के अनुसार हर माह जन्मतिथि में सुधार के करीब 1000 आवेदन प्राप्त हो रहे हैं।
इसके अलावा मृत्यु के बाद नाम हटाने के लगभग 250, वैवाहिक स्थिति अपडेट कराने के 300, माता-पिता के नाम में सुधार के 150, तलाक के बाद पति या पत्नी का नाम हटाने के 100 और आय संबंधी त्रुटियों को ठीक कराने के करीब 100 आवेदन हर महीने पहुंच रहे हैं। मानकपुर की मंदरेशो, काट्टरवाली के सलमा, ललहाड़ी के रिंकी कुमार का कहना है कि न तो उन्होंने आय बढ़ाने के लिए कोई आवेदन किया और न ही उनकी आर्थिक स्थिति में कोई बदलाव आया।
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सिके बाद पीपीपी में उनकी वार्षिक आय लाखों रुपये दर्ज कर दी गई। इससे सरकारी योजनाओं का लाभ मिलना बंद हो गया है। प्रचंड गर्मी के बीच रोजाना बड़ी संख्या में लोग क्रीड कार्यालय पहुंच रहे हैं। कई लोग सुबह से शाम तक अपनी बारी का इंतजार करते हैं। उनकी समस्या का समाधान महीनों तक नहीं हो पाता।
सालाना आय तीन से पांच लाख दर्ज
व्यासपुर के आंबेडकर नगर निवासी बलिंद्र कुमार ने बताया कि वह सड़क किनारे अस्थायी दुकान लगाकर जूतों की मरम्मत करता है। दिनभर मेहनत करने के बाद भी 100 से 150 रुपये ही कमा पाता है। पहले उसकी आय कम दर्ज थी, लेकिन अब सरकारी रिकॉर्ड में सालाना आय तीन से पांच लाख रुपये के बीच दिखाई जा रही है। उसने समाधान शिविर, सीएम विंडो और क्रीड कार्यालय में कई बार शिकायत दी, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ। आय बढ़ने के कारण उसका राशन भी बंद हो गया है।
आवेदन के बाद नहीं हुआ सुधार
व्यासपुर के मुकेश कुमार ने बताया कि वह मेहनत मजदूरी करके परिवार का पालन-पोषण कर रहा है। पहले उसकी सालाना आय 1.80 लाख रुपये से कम थी, लेकिन अब रिकॉर्ड में तीन लाख रुपये से अधिक दर्शाई जा रही है। जबकि वास्तविकता में उसकी आय में कोई वृद्धि नहीं हुई। उन्होंने बताया कि कई बार सीएससी केंद्रों और संबंधित कार्यालयों में आवेदन करने के बावजूद त्रुटि ठीक नहीं हो रही। ऑनलाइन रिक्वेस्ट के नाम पर सैकड़ों रुपये खर्च हो चुके हैं, लेकिन राहत नहीं मिली।
वर्जन:
पीपीपी में गलतियां ठीक कराने के लिए लोग ऑनलाइन रिक्वेस्ट डाल सकते हैं। इसक बाद टीम मौके पर जाकर निरीक्षण करती हैं। जो रिपोर्ट आती है, उसके हिसाब से ही आय कम ज्यादा की जाती है। - अखिल शर्मा, जिला प्रबंधक, क्रीड कार्यालय।
यमुनानगर। परिवार पहचान पत्र (पीपीपी) में दर्ज गलत जानकारियां गरीब और मजदूर वर्ग के लिए बड़ी मुसीबत बनती जा रही हैं। जिन लोगों की रोजाना की कमाई मुश्किल से 100 से 200 रुपये है, उन्हें सरकारी रिकॉर्ड में लाखों रुपये सालाना आय वाला दिखा दिया गया है। इससे उनका राशन बंद हो गया।
जिले के नागरिक संसाधन सूचना विभाग (क्रीड) के कार्यालय में प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग विभिन्न प्रकार की त्रुटियां ठीक कराने पहुंच रहे हैं। सबसे अधिक परेशानी जन्मतिथि और आय संबंधी गलतियों को लेकर सामने आ रही है। कार्यालय के आंकड़ों के अनुसार हर माह जन्मतिथि में सुधार के करीब 1000 आवेदन प्राप्त हो रहे हैं।
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इसके अलावा मृत्यु के बाद नाम हटाने के लगभग 250, वैवाहिक स्थिति अपडेट कराने के 300, माता-पिता के नाम में सुधार के 150, तलाक के बाद पति या पत्नी का नाम हटाने के 100 और आय संबंधी त्रुटियों को ठीक कराने के करीब 100 आवेदन हर महीने पहुंच रहे हैं। मानकपुर की मंदरेशो, काट्टरवाली के सलमा, ललहाड़ी के रिंकी कुमार का कहना है कि न तो उन्होंने आय बढ़ाने के लिए कोई आवेदन किया और न ही उनकी आर्थिक स्थिति में कोई बदलाव आया।
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सालाना आय तीन से पांच लाख दर्ज
व्यासपुर के आंबेडकर नगर निवासी बलिंद्र कुमार ने बताया कि वह सड़क किनारे अस्थायी दुकान लगाकर जूतों की मरम्मत करता है। दिनभर मेहनत करने के बाद भी 100 से 150 रुपये ही कमा पाता है। पहले उसकी आय कम दर्ज थी, लेकिन अब सरकारी रिकॉर्ड में सालाना आय तीन से पांच लाख रुपये के बीच दिखाई जा रही है। उसने समाधान शिविर, सीएम विंडो और क्रीड कार्यालय में कई बार शिकायत दी, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ। आय बढ़ने के कारण उसका राशन भी बंद हो गया है।
आवेदन के बाद नहीं हुआ सुधार
व्यासपुर के मुकेश कुमार ने बताया कि वह मेहनत मजदूरी करके परिवार का पालन-पोषण कर रहा है। पहले उसकी सालाना आय 1.80 लाख रुपये से कम थी, लेकिन अब रिकॉर्ड में तीन लाख रुपये से अधिक दर्शाई जा रही है। जबकि वास्तविकता में उसकी आय में कोई वृद्धि नहीं हुई। उन्होंने बताया कि कई बार सीएससी केंद्रों और संबंधित कार्यालयों में आवेदन करने के बावजूद त्रुटि ठीक नहीं हो रही। ऑनलाइन रिक्वेस्ट के नाम पर सैकड़ों रुपये खर्च हो चुके हैं, लेकिन राहत नहीं मिली।
वर्जन:
पीपीपी में गलतियां ठीक कराने के लिए लोग ऑनलाइन रिक्वेस्ट डाल सकते हैं। इसक बाद टीम मौके पर जाकर निरीक्षण करती हैं। जो रिपोर्ट आती है, उसके हिसाब से ही आय कम ज्यादा की जाती है। - अखिल शर्मा, जिला प्रबंधक, क्रीड कार्यालय।