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Yamuna Nagar News: पानीपत की टीम ने दी जयमल फत्ता सांग की प्रस्तुति
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Sun, 22 Mar 2026 12:24 AM IST
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साढौरा के डीएवी कॉलेज में सांग की प्रस्तुति देती पानीपत की टीम। संस्थान
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संवाद न्यूज एजेंसी
साढौरा। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के युवा एवं सांस्कृतिक विभाग के सौजन्य से डीएवी कॉलेज साढौरा में चल रहा 11वें रत्नावली युवा सांग महोत्सव चौथे दिन आर्य पीजी कॉलेज पानीपत की टीम की प्रस्तुति के साथ संपन्न हुआ। इस टीम ने मेवाड़ के सिसोदिया वंश के सेनापतियों जयमल व फत्ता की शौर्य गाथा पर आधारित इस सांग की बखूबी प्रस्तुति दी।
टीम के प्रभारी नरेश कुमार ने बताया विनय, अंकित, सागर, गुलशन, कार्तिक, आर्यन, राहुल व रुस्तम ने सांग पर अभिनय किया। श्रीपाल व साजिद हारमोनियम पर, ढोलक पर धर्मवीर, बलवान नगाड़े पर रहे। प्रिंसिपल डॉ. तेजबीर सिंह ने बताया कि जयमल और फत्ता की मुख्य थीम चित्तौड़गढ़ की घेराबंदी के दौरान अकबर की मुगल सेना के खिलाफ उनके सर्वोच्च बलिदान, अदम्य साहस, मातृभूमि की रक्षा और वीरगति को प्राप्त होने की है।
यह कहानी शौर्य, राजपूत स्वाभिमान, कल्ला जी के साथ मिलकर लड़े गए युद्ध और अंतिम बलिदान का प्रतीक है। उनकी वीरता से प्रभावित होकर, मुगल सम्राट अकबर ने उनकी हाथी पर सवार मूर्तियाँ आगरे के किले के द्वार पर स्थापित करवाईं, जो आज भी उनके शौर्य का प्रमाण हैं। लाडवा के आईजीएन कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. कुशलपाल सिंह ने बतौर मुख्य अतिथि स्टाफ और छात्रों को सांग महोत्सव के आयोजन पर बधाई दी और साथ ही प्रतिभागी छात्रों का हौसला बढ़ाया।
महोत्सव के कन्वीनर डॉ. छत्रपाल सिंह व ऑर्गेनाइजिंग सेक्रेट्री डॉ योगेश सिंह मोहन ने बताया कि चार दिन तक चले इस आयोजन में पहले दिन आरकेएसडी कॉलेज कैथल, दूसरे दिन एसडी पीजी कॉलेज पानीपत, तीसरे दिन यूटीडी कुरुक्षेत्र महाविद्यालय एवं अंतिम दिन आर्य पीजी कॉलेज पानीपत की टीमों ने अपनी प्रस्तुति दी। प्राचार्य डॉ. तेजवीर सिंह ने मुख्य अतिथि डॉ कुशल पाल सिंह तथा गेस्ट आफ ओनर अनिल संधू का विद्यार्थियों का उत्साह बढ़ाने के लिए धन्यवाद किया।
उन्होंने कॉलेज की कल्चरल कमेटी को इस आयोजन के लिए बधाई देते हुए भविष्य में भी हरियाणवी संस्कृति के प्रचार हेतु ऐसे आयोजन करवाते रहने पर बल दिया। इस अवसर पर डॉ. एसके दुबे, डॉ. दर्शन लाल, डॉ. छत्रपाल सिंह, डॉ. योगेश सिंह मोहन, डॉ. गुरमेज सिंह, प्रो. सुनीता, प्रो. नेहा, प्रो. जसप्रीत, प्रो. नीरज गेरा, प्रो. जॉनी, प्रो. रितु, प्रो. नैंसी व प्रो. साहिल भी मौजूद रहे।
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साढौरा। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के युवा एवं सांस्कृतिक विभाग के सौजन्य से डीएवी कॉलेज साढौरा में चल रहा 11वें रत्नावली युवा सांग महोत्सव चौथे दिन आर्य पीजी कॉलेज पानीपत की टीम की प्रस्तुति के साथ संपन्न हुआ। इस टीम ने मेवाड़ के सिसोदिया वंश के सेनापतियों जयमल व फत्ता की शौर्य गाथा पर आधारित इस सांग की बखूबी प्रस्तुति दी।
टीम के प्रभारी नरेश कुमार ने बताया विनय, अंकित, सागर, गुलशन, कार्तिक, आर्यन, राहुल व रुस्तम ने सांग पर अभिनय किया। श्रीपाल व साजिद हारमोनियम पर, ढोलक पर धर्मवीर, बलवान नगाड़े पर रहे। प्रिंसिपल डॉ. तेजबीर सिंह ने बताया कि जयमल और फत्ता की मुख्य थीम चित्तौड़गढ़ की घेराबंदी के दौरान अकबर की मुगल सेना के खिलाफ उनके सर्वोच्च बलिदान, अदम्य साहस, मातृभूमि की रक्षा और वीरगति को प्राप्त होने की है।
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यह कहानी शौर्य, राजपूत स्वाभिमान, कल्ला जी के साथ मिलकर लड़े गए युद्ध और अंतिम बलिदान का प्रतीक है। उनकी वीरता से प्रभावित होकर, मुगल सम्राट अकबर ने उनकी हाथी पर सवार मूर्तियाँ आगरे के किले के द्वार पर स्थापित करवाईं, जो आज भी उनके शौर्य का प्रमाण हैं। लाडवा के आईजीएन कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. कुशलपाल सिंह ने बतौर मुख्य अतिथि स्टाफ और छात्रों को सांग महोत्सव के आयोजन पर बधाई दी और साथ ही प्रतिभागी छात्रों का हौसला बढ़ाया।
महोत्सव के कन्वीनर डॉ. छत्रपाल सिंह व ऑर्गेनाइजिंग सेक्रेट्री डॉ योगेश सिंह मोहन ने बताया कि चार दिन तक चले इस आयोजन में पहले दिन आरकेएसडी कॉलेज कैथल, दूसरे दिन एसडी पीजी कॉलेज पानीपत, तीसरे दिन यूटीडी कुरुक्षेत्र महाविद्यालय एवं अंतिम दिन आर्य पीजी कॉलेज पानीपत की टीमों ने अपनी प्रस्तुति दी। प्राचार्य डॉ. तेजवीर सिंह ने मुख्य अतिथि डॉ कुशल पाल सिंह तथा गेस्ट आफ ओनर अनिल संधू का विद्यार्थियों का उत्साह बढ़ाने के लिए धन्यवाद किया।
उन्होंने कॉलेज की कल्चरल कमेटी को इस आयोजन के लिए बधाई देते हुए भविष्य में भी हरियाणवी संस्कृति के प्रचार हेतु ऐसे आयोजन करवाते रहने पर बल दिया। इस अवसर पर डॉ. एसके दुबे, डॉ. दर्शन लाल, डॉ. छत्रपाल सिंह, डॉ. योगेश सिंह मोहन, डॉ. गुरमेज सिंह, प्रो. सुनीता, प्रो. नेहा, प्रो. जसप्रीत, प्रो. नीरज गेरा, प्रो. जॉनी, प्रो. रितु, प्रो. नैंसी व प्रो. साहिल भी मौजूद रहे।