Yamuna Nagar News: आस्था का दम, छाले नहीं रोक पा रहे कदम
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जगाधरी। सावन की शिवरात्रि नजदीक आते ही वातावरण शिवमयी होता नजर आ रहा है। हर तरफ बोल बम और जय भोले के उद्घोष सुनाई दे रहे हैं। हरिद्वार से गंगाजल लाने में मीलों पैदल चलने से भक्तों के पैरों पर छाले पड़ गए हैंं। शिव के प्रति आस्था ऐसी है कि कदम रुकने का नाम नहीं ले रहे हैं।
कंधों पर कांवड़ और हृदय में भोलेनाथ के प्रति अटूट विश्वास लिए शिवभक्त कठिन राहों पर निरंतर आगे बढ़ रहे हैं। किसी ने संतान प्राप्ति की कामना के साथ कांवड़ उठाई तो किसी ने अपने आशियाने का सपना पूरा होने पर भोलेनाथ के दरबार में आस्था अर्पित की। कांवड़ यात्रा विश्वास, संकल्प और समर्पण की ऐसी साधना है, जिसमें हर कदम शिव के नाम से शक्ति पाता है।
एक श्रद्धालु ने बेटे की मनोकामना पूरी होने पर दो बार कांवड़ लाने का प्रण लिया था। वहीं एक अन्य भक्त ने अपना मकान बनने की मन्नत मांगी थी। किसी ने मां के अच्छे स्वास्थ्य के लिए तो किसी ने सिर्फ आस्था में कांवड़ उठाई है। मनोकामना पूर्ण होने पर कांवड़ उठाकर भोलेनाथ के प्रति कृतज्ञता व्यक्त कर रहे हैं। संवाद
बेटे की मांगी थी मन्नत
कुरुक्षेत्र के मोहननगर निवासी सुषमा कश्यप ने बताया कि उन्हें पुत्र की चाह थी। उन्होंने देवों के देव महादेव के चरणों में माथा टेका और पुत्र होने पर दो बार हरिद्वार से कांवड़ में गंगाजल लाकर सावन शिवरात्रि में अभिषेक करने का प्रण लिया। उसके घर पुत्र हुआ तो उसने अपना प्रण पूरा किया। सुषमा ने बताया कि दो वर्ष पूरे हो चुके हैं और इस बार वह तीसरी कांवड़ लेकर जा रही हैं। उन्होंने कहा कि कांवड़ लाने में पांव में छाले पड़ जाते हैं, लेकिन भोले बाबा की शक्ति से भक्तों के कदम बढ़ते जाते हैं।
मकान बनने पर उठाई थी कांवड़
कैथल के प्रेम कुमार ने बताया कि उन्होंने भोले बाबा से प्रार्थना की थी उसे एक आशियाना दें दें। बाबा ने उनकी पुकार सुन ली और इसमें आ रही सभी अड़चने दूर होती गई। इसके बाद उनका मकान बन गया। परिवार अपने मकान में रहने लगा। मकान बनने पर उसने पांच कांवड़ लाने का प्रण लिया था। उसका यह प्रण पूरा हो चुका है और करीब 12 साल से वे लगातार कांवड़ लेकर आ रहे हैं और बाबा की कृपा से आगे भी लेकर आएंगे। उन्होंने कहा कि उन्हें कांवड़ लाने में किसी प्रकार की परेशानी नहीं होती है।
छह वर्ष से ला रहे हैं कांवड़
हरिद्वार से लुधियाना के जगराओं के लिए कांवड़ लेकर निकले अंकुश ने बताया कि उन्होंने भोले बाबा से कोई मन्नत नहीं मानी है। करीब छह वर्ष से कांवड़ लेकर आ रहे हैं और यात्रा करने से ही उनके सभी काम पूरे हो जाते हैं। क्षेत्र के लोगों से कांवड़ की महिमा बचपन से सुनते आ रहे हैं। क्षेत्र के लोग 25 वर्ष से लगातार कांवड़ ला रहे हैं। लोगों ने अपने अनुभव बताए तो उनकी इसमें आस्था बढ़ती चली गई। इसके बाद उन्होंने भी कांवड़ लाने का मन बना लिया। इससे उनके सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं।

अंबाला के गांव भरेड़ी खुर्द के विशाल की कांवड़ में अयोध्या के रामलला की प्रतिमा का स्वरूप सजाया- फोटो : 1

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