{"_id":"69beebc7c007e68a7c02cdc7","slug":"the-ragi-jatha-recounted-the-martyrdom-through-kirtan-yamuna-nagar-news-c-246-1-sknl1023-153193-2026-03-22","type":"story","status":"publish","title_hn":"Yamuna Nagar News: रागी जत्थे ने कीर्तन से किया शहादत का बखान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Yamuna Nagar News: रागी जत्थे ने कीर्तन से किया शहादत का बखान
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Sun, 22 Mar 2026 12:34 AM IST
विज्ञापन
साढौरा के पीर बुद्धु शाह गुरुद्वारा साहिब में कीर्तन करता रागी जत्था। स्वयं
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
साढौरा। अमर शहीद पीर बुद्धु शाह जी का 322वां शहीदी दिवस शनिवार को उनके जन्म स्थान पीर बुद्धु शाह गुरुद्वारा में अत्यंत श्रद्धा भाव से मनाया गया। शुक्रवार को आरंभ हुए अखंड पाठ के विधिवत संपन्न होने पर कीर्तन दरबार का आयोजन हुआ।
इस दौरान भाई अमनदीप सिंह ने बताया कि पीर बुद्धू शाह की शहादत सिख इतिहास में त्याग और वफादारी का एक बेजोड़ प्रतीक है। उन्होंने गुरु गोबिंद सिंह जी के प्रति अपनी अटूट निष्ठा के लिए न केवल अपने बेटों का बलिदान दिया, बल्कि स्वयं भी मुगलों के हाथों शहीद हुए। आज भी साढौरा में पीर बुद्धू शाह का जन्म स्थान और उनके नाम पर बना गुरुद्वारा उनकी महान शहादत की याद दिलाता है।
भाई रणजीत सिंह व हजूरी रागी भाई मोहन सिंह ने भी पीर बुद्धू शाह की शहादत का बखान करते हुए संगतों को अपनी वाणी से निहाल किया। इस दौरान कलगीधर ट्रस्ट बड़ू साहिब की अकाल आदमी से आए नन्हें बालकों ने प्राचीन काल के तार वाले वाद्य यंत्रों पर कीर्तन करके संगतों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इसके बाद गुरु का लंगर बरताया गया।
प्रबंधक कमेटी के प्रधान लक्ष्मण सिंह खालसा ने बताया कि इसका आयोजन पीर बुद्धू शाह सेवा सोसायटी, गुरुद्वारा कमेटी तथा सिख संगतों के सहयोग से किया गया। इस आयोजन में एचएसजीएमसी के प्रधान जगदीश सिंह झिंडा व बलदेव सिंह कायमपुर का भरपूर सहयोग रहा। इस दौरान सतनाम सिंह, कुलविंद्र सिंह चड्ढा, त्रिलोक सिंह, गुरप्रीत सिंह व परमदीप सिंह भी मौजूद रहे।
Trending Videos
साढौरा। अमर शहीद पीर बुद्धु शाह जी का 322वां शहीदी दिवस शनिवार को उनके जन्म स्थान पीर बुद्धु शाह गुरुद्वारा में अत्यंत श्रद्धा भाव से मनाया गया। शुक्रवार को आरंभ हुए अखंड पाठ के विधिवत संपन्न होने पर कीर्तन दरबार का आयोजन हुआ।
इस दौरान भाई अमनदीप सिंह ने बताया कि पीर बुद्धू शाह की शहादत सिख इतिहास में त्याग और वफादारी का एक बेजोड़ प्रतीक है। उन्होंने गुरु गोबिंद सिंह जी के प्रति अपनी अटूट निष्ठा के लिए न केवल अपने बेटों का बलिदान दिया, बल्कि स्वयं भी मुगलों के हाथों शहीद हुए। आज भी साढौरा में पीर बुद्धू शाह का जन्म स्थान और उनके नाम पर बना गुरुद्वारा उनकी महान शहादत की याद दिलाता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
भाई रणजीत सिंह व हजूरी रागी भाई मोहन सिंह ने भी पीर बुद्धू शाह की शहादत का बखान करते हुए संगतों को अपनी वाणी से निहाल किया। इस दौरान कलगीधर ट्रस्ट बड़ू साहिब की अकाल आदमी से आए नन्हें बालकों ने प्राचीन काल के तार वाले वाद्य यंत्रों पर कीर्तन करके संगतों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इसके बाद गुरु का लंगर बरताया गया।
प्रबंधक कमेटी के प्रधान लक्ष्मण सिंह खालसा ने बताया कि इसका आयोजन पीर बुद्धू शाह सेवा सोसायटी, गुरुद्वारा कमेटी तथा सिख संगतों के सहयोग से किया गया। इस आयोजन में एचएसजीएमसी के प्रधान जगदीश सिंह झिंडा व बलदेव सिंह कायमपुर का भरपूर सहयोग रहा। इस दौरान सतनाम सिंह, कुलविंद्र सिंह चड्ढा, त्रिलोक सिंह, गुरप्रीत सिंह व परमदीप सिंह भी मौजूद रहे।