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Yamuna Nagar News: राइस मिलर का तीन बार रिमांड, अहम खुलासे नहीं

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 25 Jan 2026 01:41 AM IST
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The rice miller was remanded three times, but no significant revelations were made
जगाधरी की एक राइस मिल में रखी धान की बोरियां। संवाद
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संवाद न्यूज एजेंसी
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यमुनानगर। जिले में सामने आए 75 करोड़ों रुपये के धान घोटाले की जांच पर अब सवाल खड़े होने लगे हैं। पुलिस आरोपी राइस मिलर संदीप सिंगला को लगातार रिमांड पर तो ले रही है, लेकिन अब तक इस बहुचर्चित मामले में कोई ठोस और बड़ा खुलासा सामने नहीं आ पाया है। राइस मिलर सिंगला ने रिमांड में जो अहम खुलासे किए हैं वह आज भी रहस्य बने हुए हैं।
मामले की जांच थाना पुलिस से लेकर एसआईटी को सौंपी गई, इसके बावजूद जांच की रफ्तार सुस्त है। अभी तक मामले में कोई दूसरी गिरफ्तारी नहीं हो पाई है। धान घोटाले का मामला 13 नवंबर को उस समय उजागर हुआ था, जब खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के निदेशक अंशज कुमार ने जांच के दौरान जिले में करोड़ों रुपये की अनियमितताओं का पर्दाफाश किया।
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जांच में प्रतापनगर की चार, छछरौली की दो और रणजीतपुर की एक राइस मिल में बड़े पैमाने पर धान की हेराफेरी पाई गई थी। ये सभी सातों राइस मिलें छछरौली निवासी संदीप सिंगला और उनकी पार्टनर व पत्नी रीतिका सिंगला के नाम पर पंजीकृत पाई गईं। मामला सामने आने के बाद प्रतापनगर, छछरौली और रणजीतपुर चौकी में संबंधित राइस मिल संचालकों के खिलाफ केस दर्ज किए गए।
गिरफ्तारी के बाद से संदीप सिंगला न्यायिक हिरासत में जेल में बंद था। एसआईटी अब तक तीसरी बार संदीप सिंगला को जेल से पांच दिन के प्रोडक्शन रिमांड पर लेकर पूछताछ कर चुकी है, लेकिन अब तक यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि मिलर ने किन अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत के नाम लिए हैं।
जांच में देरी को लेकर यह आशंका भी जताई जा रही है कि इसका फायदा घोटाले में शामिल अन्य आरोपी उठा सकते हैं। समय रहते यदि कड़ी कार्रवाई और खुलासे नहीं हुए तो सबूतों के साथ छेड़छाड़ की संभावना से भी इन्कार नहीं किया जा सकता। इस बीच इसी माह जिला खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रक (डीएफएससी) जतिन मित्तल का तबादला हो चुका है। इस तबादले को भी धान घोटाले से जोड़कर देखा जा रहा है, हालांकि विभागीय स्तर पर इसे सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया बताया। वहीं पूरे मामले को लेकर भारतीय किसान यूनियन ने भी सख्त रुख अपनाया हुआ है। भाकियू के प्रदेश अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी के नेतृत्व में 16 जनवरी को जिला सचिवालय पर जोरदार प्रदर्शन हो चुका है। चढूनी ने घोटाले में शामिल अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज करने और मामले की सीबीआई जांच कराने की मांग की थी। एसआईटी जांच को गति देकर कब तक बड़े खुलासे करती है या फिर यह मामला भी फाइलों में उलझ कर रह जाएगा, इस पर सबकी नजर लगी हुई है।
पांच अधिकारियों के खिलाफ हो चुकी कार्रवाई

घोटाले में संलिप्तता पाए जाने पर अब तक हैफेड और खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के कई अधिकारियों पर गाज गिर चुकी है। हैफेड ने दिसंबर माह में यमुनानगर में तैनात सीनियर मैनेजर सलिंद्र, दो फील्ड इंस्पेक्टर राजेश और चंद्रमोहन तथा टेक्निकल ऑफिसर अनिल कुमार को निलंबित किया था। इसके कुछ दिन बाद खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के निदेशक ने यमुनानगर में तैनात एएफएसओ देवेंद्र कुमार और प्रतापनगर में कार्यरत इंस्पेक्टर विनोद कुमार को भी निलंबित कर दिया। दोनों अधिकारियों को कैथल के डीएफएससी कार्यालय से अटैच किया गया है।
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