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Yamuna Nagar News: स्कंदमाता की आराधना कर संतान के लिए मांगी सुख-समृद्धि
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Tue, 24 Mar 2026 01:03 AM IST
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रंग बिरंगे फूलों से सजा जगाधरी का देवी भवन मंदिर। संवाद
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संवाद न्यूज एजेंसी
जगाधरी। चैत्र नवरात्र की पंचमी तिथि पर सोमवार को भक्तों ने महाशक्ति के पंचम स्वरूप स्कंदमाता की पूजा की। इस दौरान जिलेभर के मंदिरों में सुबह शाम संकीर्तन व पूजन हुआ। इससे चौक, गली-मोहल्लों में जय माता की के घोष सुनाई दिए। श्रद्धालुओं ने स्कंदमाता की पूजा कर संतान के साथ परिवार के सुख-समृद्धि का वरदान मांगा। वहीं, षष्ठी तिथि पर मां कात्यायनी की पूजा का विधान है। मां कात्यायनी की पूजा से सुयोग्य जीवन साथी का आशीर्वाद मिलता है।
सोमवार को मंदिरों में पहुंचकर श्रद्धालुओं ने मां की प्रतिमा के सम्मुख माता टेका और धूप, दीप, पुष्प, फल, नवैद्य, मिष्ठान इत्यादि अर्पित कर पूजा की। इस दौरान सबसे ज्यादा भीड़ माता रानी के मंदिर के अलावा प्राचीन, ऐतिहासिक व पौराणिक मंदिरों में देखने को मिली। मंदिरों के अलावा घरों, दुकानों, कार्यालयों व प्रतिष्ठानों पर भी भक्तों ने मां की स्तुति की। इस दौरान जगाधरी के प्राचीन एवं ऐतिहासिक मंदिर में देवी भवन मंदिर, रेलवे स्टेशन स्थित श्रीमूर्ति देवी मंदिर, पातालेश्वर महादेव मंदिर, कालेश्वर महादेव मठ मंदिर, भंभौली स्थित स्वयं-भू महादेव मंदिर, आदिबद्री केदारनाथ मंदिर, अमादलपुर स्थित सूर्यकुंड मंदिर में भारी भीड़ रही। वहीं, षष्ठी तिथि पर मंगलवार को महाशक्ति के षष्ठम रूप मां कात्यायनी की पूजा होगी। पंडित रमन वत्स ने बताया कि मां कात्यायनी दुष्ट दलन करने वाली हैं। इनकी पूजा साधक को अभय दान देती है। महादैत्य महिषासुर का मर्दन करने के कारण मां कात्यायनी को महिषासुर मर्दनी भी कहा जाता है। मां का यह स्वरूप बहुत करुणामयी व ममतामयी माना जाता है।
मान्यता है कि मां ने महर्षि कात्यायन की तपस्या से प्रसन्न होकर उनके घर पुत्री के रूप में जन्म लिया था। कात्यायन की पुत्री होने से उनका नाम कात्यायनी पड़ा है। मां कात्यायनी का स्वरूप भव्य व अत्यंत चमकीला और सवारी सिंह है। उनका ऊपर उठा एक दाहिना हाथ अभय मुद्रा में है। दूसरी दाहिनी भुजा वर मुद्रा में है। उनके एक हाथ में तलवार और दूसरे में कमल पुष्प है। पंडित रमन ने बताया कि मान्यताओं के अनुसार जिनके विवाह में अड़चनें आती है, उन्हें मां कात्यायनी की पूजा करनी चाहिए। मां कात्यायनी की स्तुति से आज्ञा चक्र जाग्रति की सिद्धियां प्राप्त होती हैं। वहीं, मां की साधना से रोग, शोक, संताप और भय से भी मुक्ति मिलती है। शिक्षा क्षेत्र में सफलता के लिए मां कात्यायनी की पूजा करनी चाहिए। मां के आशीर्वाद से सुयोग्य जीवन साथी की प्राप्ति होती है।
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जगाधरी। चैत्र नवरात्र की पंचमी तिथि पर सोमवार को भक्तों ने महाशक्ति के पंचम स्वरूप स्कंदमाता की पूजा की। इस दौरान जिलेभर के मंदिरों में सुबह शाम संकीर्तन व पूजन हुआ। इससे चौक, गली-मोहल्लों में जय माता की के घोष सुनाई दिए। श्रद्धालुओं ने स्कंदमाता की पूजा कर संतान के साथ परिवार के सुख-समृद्धि का वरदान मांगा। वहीं, षष्ठी तिथि पर मां कात्यायनी की पूजा का विधान है। मां कात्यायनी की पूजा से सुयोग्य जीवन साथी का आशीर्वाद मिलता है।
सोमवार को मंदिरों में पहुंचकर श्रद्धालुओं ने मां की प्रतिमा के सम्मुख माता टेका और धूप, दीप, पुष्प, फल, नवैद्य, मिष्ठान इत्यादि अर्पित कर पूजा की। इस दौरान सबसे ज्यादा भीड़ माता रानी के मंदिर के अलावा प्राचीन, ऐतिहासिक व पौराणिक मंदिरों में देखने को मिली। मंदिरों के अलावा घरों, दुकानों, कार्यालयों व प्रतिष्ठानों पर भी भक्तों ने मां की स्तुति की। इस दौरान जगाधरी के प्राचीन एवं ऐतिहासिक मंदिर में देवी भवन मंदिर, रेलवे स्टेशन स्थित श्रीमूर्ति देवी मंदिर, पातालेश्वर महादेव मंदिर, कालेश्वर महादेव मठ मंदिर, भंभौली स्थित स्वयं-भू महादेव मंदिर, आदिबद्री केदारनाथ मंदिर, अमादलपुर स्थित सूर्यकुंड मंदिर में भारी भीड़ रही। वहीं, षष्ठी तिथि पर मंगलवार को महाशक्ति के षष्ठम रूप मां कात्यायनी की पूजा होगी। पंडित रमन वत्स ने बताया कि मां कात्यायनी दुष्ट दलन करने वाली हैं। इनकी पूजा साधक को अभय दान देती है। महादैत्य महिषासुर का मर्दन करने के कारण मां कात्यायनी को महिषासुर मर्दनी भी कहा जाता है। मां का यह स्वरूप बहुत करुणामयी व ममतामयी माना जाता है।
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मान्यता है कि मां ने महर्षि कात्यायन की तपस्या से प्रसन्न होकर उनके घर पुत्री के रूप में जन्म लिया था। कात्यायन की पुत्री होने से उनका नाम कात्यायनी पड़ा है। मां कात्यायनी का स्वरूप भव्य व अत्यंत चमकीला और सवारी सिंह है। उनका ऊपर उठा एक दाहिना हाथ अभय मुद्रा में है। दूसरी दाहिनी भुजा वर मुद्रा में है। उनके एक हाथ में तलवार और दूसरे में कमल पुष्प है। पंडित रमन ने बताया कि मान्यताओं के अनुसार जिनके विवाह में अड़चनें आती है, उन्हें मां कात्यायनी की पूजा करनी चाहिए। मां कात्यायनी की स्तुति से आज्ञा चक्र जाग्रति की सिद्धियां प्राप्त होती हैं। वहीं, मां की साधना से रोग, शोक, संताप और भय से भी मुक्ति मिलती है। शिक्षा क्षेत्र में सफलता के लिए मां कात्यायनी की पूजा करनी चाहिए। मां के आशीर्वाद से सुयोग्य जीवन साथी की प्राप्ति होती है।

रंग बिरंगे फूलों से सजा जगाधरी का देवी भवन मंदिर। संवाद