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Bilaspur News: एक करोड़ की राशि स्वीकृत, फिर भी जमीन, इच्छाशक्ति के अभाव में अटकी योजना
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
Updated Wed, 29 Apr 2026 11:05 PM IST
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दीपक शर्मा
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निकाय चुनाव मुद्दा
हर बार वादों में सिमटा मुद्दा, इस बार जनता ने मांगा समयबद्ध रोडमैप
1995 में नगर निकाय के रूप में अस्तित्व में आई नगर परिषद घुमारवीं
नगर पंचायत से नगर परिषद बनने तक विकास के कई दावे नहीं उतरे धरातल पर
संवाद न्यूज एजेंसी
घुमारवीं(बिलासपुर)। वर्ष 1995 में नगर निकाय के रूप में अस्तित्व में आई नगर परिषद घुमारवीं 30 वर्ष बाद भी कूड़ा प्रबंधन जैसी मूलभूत समस्या का स्थायी समाधान नहीं खोज पाई है। नगर पंचायत से नगर परिषद बनने तक विकास के कई दावे किए गए, लेकिन शहर से रोजाना निकलने वाले कचरे के निपटान के लिए आज तक कोई स्थायी संयंत्र स्थापित नहीं हो सका। अब यही मुद्दा निकाय चुनावों में सबसे बड़ा चुनावी हथियार बन गया है।
हर चुनाव में उम्मीदवार कूड़ा संयंत्र लगाने के बड़े-बड़े वादे करते हैं। घोषणाएं होती हैं, योजनाएं बनाई जाती हैं और जनता से समर्थन लिया जाता है, लेकिन चुनाव खत्म होते ही यह मुद्दा फाइलों और बैठकों तक सीमित होकर रह जाता है। यही कारण है कि नगर परिषद आज भी अस्थायी डंपिंग साइटों के सहारे शहर का कचरा उठाने को मजबूर है। करीब 17 वर्ष पहले कूड़ा संयंत्र स्थापित करने के लिए एक करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गई थी। बताया जाता है कि यह बजट आज भी उपयोग नहीं हो पाया है। मुख्य कारण उपयुक्त भूमि का अभाव और राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी मानी जा रही है, जिससे यह योजना अब तक कागजों में ही अटकी हुई है। पहले बजोहा वार्ड में संयंत्र स्थापित करने की योजना बनाई गई थी, लेकिन स्थानीय लोगों के विरोध के चलते प्रशासन और नगर परिषद को पीछे हटना पड़ा। इसके बाद भदशीं गांव के पास निजी भूमि पर अस्थायी रूप से कचरा डालने की व्यवस्था की गई, मगर वहां भी ग्रामीणों के विरोध और राजनीतिक हस्तक्षेप के चलते इसे बंद करना पड़ा। मेला ग्राउंड, सीर खड्ड और अन्य स्थानों पर भी अस्थायी डंपिंग की गई, लेकिन हर जगह विरोध, पर्यावरणीय चिंताओं और कानूनी अड़चनों ने इस समस्या को और उलझा दिया। नतीजतन नगर परिषद आज तक किसी स्थायी समाधान तक नहीं पहुंच सकी है। अब शहर में कूड़े का संकट लगातार गंभीर होता जा रहा है। अस्थायी व्यवस्था भी जवाब देने लगी हैं और कई जगहों पर गंदगी व दुर्गंध से लोगों का जीना मुश्किल हो रहा है। ऐसे में चुनावी माहौल में जनता का फोकस बुनियादी सुविधाओं से हटकर सीधे कूड़ा प्रबंधन पर आ गया है। शहरवासियों का कहना है कि इस बार वे सड़कों, पार्कों और लाइटों से ज्यादा कूड़े के स्थायी समाधान पर ध्यान देंगे। स्पष्ट रूप से कहा जा रहा है कि वोट उसी उम्मीदवार को मिलेगा, जो कचरा प्रबंधन के लिए ठोस, व्यावहारिक और समयबद्ध योजना पेश करेगा।
इनसेट
हर चुनाव में कूड़ा संयंत्र का मुद्दा उठाया जाता है, लेकिन जीतने के बाद नेता इसे भूल जाते हैं। शहर अब अस्थायी इंतजामों से नहीं चल सकता। 5 दीपक शर्मा, स्थानीय निवासी
इनसेट
नगर परिषद की सबसे बड़ी विफलता कूड़ा प्रबंधन है। करोड़ों रुपये स्वीकृत होने के बावजूद आज तक समाधान न निकलना प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाता है। - महेंद्र पाल रतवान, स्थानीय दुकानदार
इनसेट
पिछले 30 वर्ष से कूड़ा संयंत्र न बनना नगर परिषद की नाकामी है। समय रहते समाधान नहीं निकाला गया तो आने वाले वर्षों में गंभीर पर्यावरणीय संकट खड़ा हो सकता है। - राजपाल उप्पल, स्थानीय निवासी व दुकानदार
इनसेट
शहर का विकास केवल भवन और सड़कें बनाने से नहीं होता। जब तक कूड़ा प्रबंधन मजबूत नहीं होगा, विकास के सभी दावे अधूरे रहेंगे। इस बार उम्मीदवारों से जवाब लेकर ही वोट देंगे। -जगतपाल, स्थानीय निवासी व दुकानदार
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हर बार वादों में सिमटा मुद्दा, इस बार जनता ने मांगा समयबद्ध रोडमैप
1995 में नगर निकाय के रूप में अस्तित्व में आई नगर परिषद घुमारवीं
नगर पंचायत से नगर परिषद बनने तक विकास के कई दावे नहीं उतरे धरातल पर
संवाद न्यूज एजेंसी
घुमारवीं(बिलासपुर)। वर्ष 1995 में नगर निकाय के रूप में अस्तित्व में आई नगर परिषद घुमारवीं 30 वर्ष बाद भी कूड़ा प्रबंधन जैसी मूलभूत समस्या का स्थायी समाधान नहीं खोज पाई है। नगर पंचायत से नगर परिषद बनने तक विकास के कई दावे किए गए, लेकिन शहर से रोजाना निकलने वाले कचरे के निपटान के लिए आज तक कोई स्थायी संयंत्र स्थापित नहीं हो सका। अब यही मुद्दा निकाय चुनावों में सबसे बड़ा चुनावी हथियार बन गया है।
हर चुनाव में उम्मीदवार कूड़ा संयंत्र लगाने के बड़े-बड़े वादे करते हैं। घोषणाएं होती हैं, योजनाएं बनाई जाती हैं और जनता से समर्थन लिया जाता है, लेकिन चुनाव खत्म होते ही यह मुद्दा फाइलों और बैठकों तक सीमित होकर रह जाता है। यही कारण है कि नगर परिषद आज भी अस्थायी डंपिंग साइटों के सहारे शहर का कचरा उठाने को मजबूर है। करीब 17 वर्ष पहले कूड़ा संयंत्र स्थापित करने के लिए एक करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गई थी। बताया जाता है कि यह बजट आज भी उपयोग नहीं हो पाया है। मुख्य कारण उपयुक्त भूमि का अभाव और राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी मानी जा रही है, जिससे यह योजना अब तक कागजों में ही अटकी हुई है। पहले बजोहा वार्ड में संयंत्र स्थापित करने की योजना बनाई गई थी, लेकिन स्थानीय लोगों के विरोध के चलते प्रशासन और नगर परिषद को पीछे हटना पड़ा। इसके बाद भदशीं गांव के पास निजी भूमि पर अस्थायी रूप से कचरा डालने की व्यवस्था की गई, मगर वहां भी ग्रामीणों के विरोध और राजनीतिक हस्तक्षेप के चलते इसे बंद करना पड़ा। मेला ग्राउंड, सीर खड्ड और अन्य स्थानों पर भी अस्थायी डंपिंग की गई, लेकिन हर जगह विरोध, पर्यावरणीय चिंताओं और कानूनी अड़चनों ने इस समस्या को और उलझा दिया। नतीजतन नगर परिषद आज तक किसी स्थायी समाधान तक नहीं पहुंच सकी है। अब शहर में कूड़े का संकट लगातार गंभीर होता जा रहा है। अस्थायी व्यवस्था भी जवाब देने लगी हैं और कई जगहों पर गंदगी व दुर्गंध से लोगों का जीना मुश्किल हो रहा है। ऐसे में चुनावी माहौल में जनता का फोकस बुनियादी सुविधाओं से हटकर सीधे कूड़ा प्रबंधन पर आ गया है। शहरवासियों का कहना है कि इस बार वे सड़कों, पार्कों और लाइटों से ज्यादा कूड़े के स्थायी समाधान पर ध्यान देंगे। स्पष्ट रूप से कहा जा रहा है कि वोट उसी उम्मीदवार को मिलेगा, जो कचरा प्रबंधन के लिए ठोस, व्यावहारिक और समयबद्ध योजना पेश करेगा।
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हर चुनाव में कूड़ा संयंत्र का मुद्दा उठाया जाता है, लेकिन जीतने के बाद नेता इसे भूल जाते हैं। शहर अब अस्थायी इंतजामों से नहीं चल सकता। 5 दीपक शर्मा, स्थानीय निवासी
इनसेट
नगर परिषद की सबसे बड़ी विफलता कूड़ा प्रबंधन है। करोड़ों रुपये स्वीकृत होने के बावजूद आज तक समाधान न निकलना प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाता है। - महेंद्र पाल रतवान, स्थानीय दुकानदार
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पिछले 30 वर्ष से कूड़ा संयंत्र न बनना नगर परिषद की नाकामी है। समय रहते समाधान नहीं निकाला गया तो आने वाले वर्षों में गंभीर पर्यावरणीय संकट खड़ा हो सकता है। - राजपाल उप्पल, स्थानीय निवासी व दुकानदार
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शहर का विकास केवल भवन और सड़कें बनाने से नहीं होता। जब तक कूड़ा प्रबंधन मजबूत नहीं होगा, विकास के सभी दावे अधूरे रहेंगे। इस बार उम्मीदवारों से जवाब लेकर ही वोट देंगे। -जगतपाल, स्थानीय निवासी व दुकानदार

दीपक शर्मा

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