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Bilaspur News: 8750 नशीली गोलियों के मामले में आरोपी बरी
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
Updated Wed, 29 Apr 2026 11:41 PM IST
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अदालत से
विशेष न्यायाधीश घुमारवीं की अदालत ने सुनाया निर्णय
पुलिस गवाहों के बयानों में मिले विरोधाभास का मिला आरोपी को लाभ
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। थाना तलाई में दर्ज नशीली दवाओं की तस्करी के एक मामले में विशेष न्यायाधीश घुमारवीं की अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने आरोपी को साक्ष्य के अभाव में दोषमुक्त करार दिया है। पुलिस आरोपी के कब्जे से भारी मात्रा में नशीली गोलियां बरामद होने का दावा साबित करने में नाकाम रही।
अभियोजन पक्ष की कहानी के अनुसार, 26 मार्च 2018 को एएसआई की टीम कामरड़ा क्षेत्र में गश्त पर थी। दोपहर करीब 1:00 बजे आरोपी संजय कुमार को दो बैग के साथ पकड़ा गया। तलाशी के दौरान बैग से 7090 अल्प्राजोलम गोलियां, 1660 ट्रामाडोल कैप्सूल और 10 मिफेप्रिस्टोन की गोलियां बरामद करने का दावा किया गया था। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट की धाराओं के तहत केस दर्ज कर चालान पेश किया था। सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के वकील ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर कई सवाल उठाए, जिन्हें अदालत ने सही माना। जांच अधिकारी ने कहा कि उन्होंने जब्त दवाएं पुलिस स्टेशन में ड्रग इंस्पेक्टर को दिखाई थीं। अदालत ने इस पर सवाल उठाया कि यदि सामान मौके पर ही सील कर दिया गया था, तो उसे दोबारा खोलकर इंस्पेक्टर को दिखाना जांच को संदिग्ध बनाता है। इससे साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ की संभावना पैदा हुई। मामले के स्वतंत्र गवाह अदालत में होस्टाइल हो गए। उन्होंने पुलिस की थ्योरी का समर्थन नहीं किया। अदालत ने पाया कि एनडीपीएस एक्ट की धारा 55 (जब्त माल की सुरक्षित कस्टडी और री-सीलिंग) का पालन सही तरीके से नहीं किया गया। माल को सीधे मालखाना मुंशी के पास जमा कर दिया गया, जबकि नियमानुसार इसे एसएचओ द्वारा सत्यापित किया जाना चाहिए था। पुलिस गवाहों के बयानों में यह स्पष्ट नहीं हो सका कि मौके पर जब्ती मेमो और रुक्का वास्तव में किसने लिखा था। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि एनडीपीएस कानून में सजा बेहद सख्त है, इसलिए सजा देने के लिए सबूतों का पुख्ता होना अनिवार्य है। इस मामले में पुलिस की जांच में कई कड़ियां गायब थीं और कानूनी प्रक्रियाओं का उल्लंघन हुआ था। ऐसे में प्रिंसिपल ऑफ प्रीपॉन्डरेंस ऑफ प्रोबेबिलिटी और बेनेफिट ऑफ डाउट के आधार पर आरोपी को सभी आरोपों से बरी कर दिया गया।
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संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। थाना तलाई में दर्ज नशीली दवाओं की तस्करी के एक मामले में विशेष न्यायाधीश घुमारवीं की अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने आरोपी को साक्ष्य के अभाव में दोषमुक्त करार दिया है। पुलिस आरोपी के कब्जे से भारी मात्रा में नशीली गोलियां बरामद होने का दावा साबित करने में नाकाम रही।
अभियोजन पक्ष की कहानी के अनुसार, 26 मार्च 2018 को एएसआई की टीम कामरड़ा क्षेत्र में गश्त पर थी। दोपहर करीब 1:00 बजे आरोपी संजय कुमार को दो बैग के साथ पकड़ा गया। तलाशी के दौरान बैग से 7090 अल्प्राजोलम गोलियां, 1660 ट्रामाडोल कैप्सूल और 10 मिफेप्रिस्टोन की गोलियां बरामद करने का दावा किया गया था। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट की धाराओं के तहत केस दर्ज कर चालान पेश किया था। सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के वकील ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर कई सवाल उठाए, जिन्हें अदालत ने सही माना। जांच अधिकारी ने कहा कि उन्होंने जब्त दवाएं पुलिस स्टेशन में ड्रग इंस्पेक्टर को दिखाई थीं। अदालत ने इस पर सवाल उठाया कि यदि सामान मौके पर ही सील कर दिया गया था, तो उसे दोबारा खोलकर इंस्पेक्टर को दिखाना जांच को संदिग्ध बनाता है। इससे साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ की संभावना पैदा हुई। मामले के स्वतंत्र गवाह अदालत में होस्टाइल हो गए। उन्होंने पुलिस की थ्योरी का समर्थन नहीं किया। अदालत ने पाया कि एनडीपीएस एक्ट की धारा 55 (जब्त माल की सुरक्षित कस्टडी और री-सीलिंग) का पालन सही तरीके से नहीं किया गया। माल को सीधे मालखाना मुंशी के पास जमा कर दिया गया, जबकि नियमानुसार इसे एसएचओ द्वारा सत्यापित किया जाना चाहिए था। पुलिस गवाहों के बयानों में यह स्पष्ट नहीं हो सका कि मौके पर जब्ती मेमो और रुक्का वास्तव में किसने लिखा था। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि एनडीपीएस कानून में सजा बेहद सख्त है, इसलिए सजा देने के लिए सबूतों का पुख्ता होना अनिवार्य है। इस मामले में पुलिस की जांच में कई कड़ियां गायब थीं और कानूनी प्रक्रियाओं का उल्लंघन हुआ था। ऐसे में प्रिंसिपल ऑफ प्रीपॉन्डरेंस ऑफ प्रोबेबिलिटी और बेनेफिट ऑफ डाउट के आधार पर आरोपी को सभी आरोपों से बरी कर दिया गया।
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