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Bilaspur News: 2000 नशीली गोलियां मिलने के बाद दवा विक्रेता पर कार्रवाई
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दस दिन के लिए लाइसेंस किया निलंबित, पुराने बिल और रिकॉर्ड खंगाले जा रहे
एनडीपीएस दायरे में आने वाली दवाओं की खरीद-बिक्री और भंडारण पर रोक
संवाद न्यूज एजेंसी
घुमारवीं (बिलासपुर)। घुमारवीं में कूरियर के जरिये नशीली दवाइयों की खेप मंगवाने के मामले में ड्रग कंट्रोल विभाग ने संबंधित दवा विक्रेता के खिलाफ बड़ी विभागीय कार्रवाई की है। विभाग ने दवा विक्रेता का लाइसेंस 10 दिन के लिए अस्थायी तौर पर निलंबित कर दिया है। इसके साथ ही एनडीपीएस के दायरे में आने वाली दवाइयों की खरीद, बिक्री और भंडारण पर आगामी आदेशों तक पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है।
विभागीय जांच में अब इस मामले को लेकर एक और बड़ा खुलासा हुआ है। जांच में सामने आया है कि मामला केवल बरामद हुई 2000 गोलियों तक सीमित नहीं था, बल्कि संबंधित दवाइयों की खरीद-बिक्री का सिलसिला काफी समय से चल रहा था। जांच के दौरान सामने आए रिकॉर्ड को देखकर विभाग भी हैरान रह गया। बता दें कि पिछले दिनों ड्रग कंट्रोल विभाग ने गुप्त सूचना के आधार पर कार्रवाई करते हुए घुमारवीं स्थित एक कूरियर कार्यालय से टेपेंटाडोल की करीब 2000 गोलियां बरामद की थीं। यह खेप एक स्थानीय दवा विक्रेता के नाम पर पहुंची थी। दवा निरीक्षक दिनेश गौतम के नेतृत्व में की गई कार्रवाई के दौरान पार्सल को कब्जे में लेकर जांच की गई थी। बॉक्स के अंदर दवाइयों के साथ कंपनी के बिल भी बरामद हुए थे, जिनमें दवा मंगवाने वाले का नाम और पता दर्ज था। प्रारंभिक जांच में खेप काला अंब स्थित एक कंपनी से मंगवाई गई थी।
मामले की जांच आगे बढ़ने के बाद विभाग ने संबंधित दवा विक्रेता से दवाइयों की खरीद और बिक्री से जुड़े रिकॉर्ड, बिल और अन्य दस्तावेज खंगाले। जांच में सामने आया कि बरामद हुई 2000 गोलियां इस पूरे मामले का केवल एक हिस्सा थीं। विभागीय जांच में ऐसे तथ्य सामने आए हैं, जिनसे पता चला कि संबंधित दवाइयों की खरीद और बिक्री का सिलसिला काफी पहले से चल रहा था। रिकॉर्ड की जांच के दौरान दवाइयों की बिक्री से जुड़े कई पहलू सामने आए, जिन्हें देखकर विभाग के अधिकारी भी हैरान रह गए। मामला सामने आने के बाद विभाग ने दवाइयों के नमूने लेकर उन्हें जांच के लिए प्रयोगशाला भेज दिया था। साथ ही संबंधित दवा विक्रेता को नोटिस जारी कर दवाइयों की खरीद-बिक्री से संबंधित बिल, रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेज तलब किए गए थे। अब विभाग ने प्रारंभिक विभागीय कार्रवाई करते हुए दवा विक्रेता का लाइसेंस 10 दिन के लिए अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया है। इसके अलावा विभाग ने एनडीपीएस के तहत आने वाली दवाइयों को लेकर भी सख्त कदम उठाया है। विभाग के अनुसार फिलहाल की गई कार्रवाई अस्थायी तौर पर है, जबकि मामले की जांच अभी जारी है। जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर कार्रवाई का दायरा और बढ़ाया जा सकता है। विभाग पुराने खरीद रिकॉर्ड, बिलों और बिक्री से संबंधित दस्तावेजों की जांच कर रहा है। यदि आगे जांच में और अनियमितताएं सामने आती हैं तो संबंधित दवा विक्रेता के खिलाफ और कड़ी विभागीय कार्रवाई की जा सकती है।
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कोट
मामला सामने आने के बाद संबंधित दवा विक्रेता के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की गई है और उसका लाइसेंस 10 दिन के लिए अस्थायी तौर पर निलंबित किया गया है। एनडीपीएस के तहत आने वाली दवाइयों की खरीद, बिक्री और भंडारण पर आगामी आदेशों तक रोक लगाई गई है। मामले की जांच अभी जारी है और जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे भी कार्रवाई की जाएगी।
-दिनेश गौतम, ड्रग इंस्पेक्टर, घुमारवीं
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एनडीपीएस दायरे में आने वाली दवाओं की खरीद-बिक्री और भंडारण पर रोक
संवाद न्यूज एजेंसी
घुमारवीं (बिलासपुर)। घुमारवीं में कूरियर के जरिये नशीली दवाइयों की खेप मंगवाने के मामले में ड्रग कंट्रोल विभाग ने संबंधित दवा विक्रेता के खिलाफ बड़ी विभागीय कार्रवाई की है। विभाग ने दवा विक्रेता का लाइसेंस 10 दिन के लिए अस्थायी तौर पर निलंबित कर दिया है। इसके साथ ही एनडीपीएस के दायरे में आने वाली दवाइयों की खरीद, बिक्री और भंडारण पर आगामी आदेशों तक पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है।
विभागीय जांच में अब इस मामले को लेकर एक और बड़ा खुलासा हुआ है। जांच में सामने आया है कि मामला केवल बरामद हुई 2000 गोलियों तक सीमित नहीं था, बल्कि संबंधित दवाइयों की खरीद-बिक्री का सिलसिला काफी समय से चल रहा था। जांच के दौरान सामने आए रिकॉर्ड को देखकर विभाग भी हैरान रह गया। बता दें कि पिछले दिनों ड्रग कंट्रोल विभाग ने गुप्त सूचना के आधार पर कार्रवाई करते हुए घुमारवीं स्थित एक कूरियर कार्यालय से टेपेंटाडोल की करीब 2000 गोलियां बरामद की थीं। यह खेप एक स्थानीय दवा विक्रेता के नाम पर पहुंची थी। दवा निरीक्षक दिनेश गौतम के नेतृत्व में की गई कार्रवाई के दौरान पार्सल को कब्जे में लेकर जांच की गई थी। बॉक्स के अंदर दवाइयों के साथ कंपनी के बिल भी बरामद हुए थे, जिनमें दवा मंगवाने वाले का नाम और पता दर्ज था। प्रारंभिक जांच में खेप काला अंब स्थित एक कंपनी से मंगवाई गई थी।
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मामले की जांच आगे बढ़ने के बाद विभाग ने संबंधित दवा विक्रेता से दवाइयों की खरीद और बिक्री से जुड़े रिकॉर्ड, बिल और अन्य दस्तावेज खंगाले। जांच में सामने आया कि बरामद हुई 2000 गोलियां इस पूरे मामले का केवल एक हिस्सा थीं। विभागीय जांच में ऐसे तथ्य सामने आए हैं, जिनसे पता चला कि संबंधित दवाइयों की खरीद और बिक्री का सिलसिला काफी पहले से चल रहा था। रिकॉर्ड की जांच के दौरान दवाइयों की बिक्री से जुड़े कई पहलू सामने आए, जिन्हें देखकर विभाग के अधिकारी भी हैरान रह गए। मामला सामने आने के बाद विभाग ने दवाइयों के नमूने लेकर उन्हें जांच के लिए प्रयोगशाला भेज दिया था। साथ ही संबंधित दवा विक्रेता को नोटिस जारी कर दवाइयों की खरीद-बिक्री से संबंधित बिल, रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेज तलब किए गए थे। अब विभाग ने प्रारंभिक विभागीय कार्रवाई करते हुए दवा विक्रेता का लाइसेंस 10 दिन के लिए अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया है। इसके अलावा विभाग ने एनडीपीएस के तहत आने वाली दवाइयों को लेकर भी सख्त कदम उठाया है। विभाग के अनुसार फिलहाल की गई कार्रवाई अस्थायी तौर पर है, जबकि मामले की जांच अभी जारी है। जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर कार्रवाई का दायरा और बढ़ाया जा सकता है। विभाग पुराने खरीद रिकॉर्ड, बिलों और बिक्री से संबंधित दस्तावेजों की जांच कर रहा है। यदि आगे जांच में और अनियमितताएं सामने आती हैं तो संबंधित दवा विक्रेता के खिलाफ और कड़ी विभागीय कार्रवाई की जा सकती है।
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मामला सामने आने के बाद संबंधित दवा विक्रेता के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की गई है और उसका लाइसेंस 10 दिन के लिए अस्थायी तौर पर निलंबित किया गया है। एनडीपीएस के तहत आने वाली दवाइयों की खरीद, बिक्री और भंडारण पर आगामी आदेशों तक रोक लगाई गई है। मामले की जांच अभी जारी है और जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे भी कार्रवाई की जाएगी।
-दिनेश गौतम, ड्रग इंस्पेक्टर, घुमारवीं