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Bilaspur News: अदालती रोक के बावजूद निर्माण का आरोप, पुलिस को मौके पर जाने के आदेश
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घुमारवीं कोर्ट ने वाद भूमि पर निर्माण रोकने के आदेश की पालना के लिए एसएचओ भाराड़ी को दी जिम्मेदारी
भूमि की पहचान के लिए राजस्व अधिकारी की मदद ले सकेगी पुलिस
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। वाद भूमि पर अदालती रोक के बावजूद निर्माण किए जाने के आरोप के मामले में घुमारवीं सिविल जज कोर्ट नंबर-3 ने पुलिस को अदालत के आदेश की पालना करवाने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने पुलिस थाना भाराड़ी के एसएचओ को चार मई और दो जून 2026 को पारित आदेशों को मौके पर लागू करवाने के लिए पुलिस सहायता उपलब्ध करवाने के निर्देश दिए हैं।
आवेदक ने अदालत में दायर आवेदन में आरोप लगाया था कि मुख्य मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने प्रतिवादियों को वाद भूमि पर किसी भी तरह का अवैध या गैरकानूनी हस्तक्षेप करने से रोक दिया था। इसके बावजूद प्रतिवादी मजदूरों और राजमिस्त्रियों को लगाकर वाद भूमि में खुदाई कर निर्माण के लिए पिल्लर खड़े कर रहे हैं।
प्रतिवादियों ने आरोपों से इन्कार करते हुए कहा कि निर्माण वाद भूमि पर नहीं, बल्कि उनकी अपनी अबादी देह भूमि पर किया जा रहा है। उनका कहना था कि उन्होंने पहले आवेदक से 0-15 बीघा भूमि खरीदी थी और वर्ष 2021 में वहां डंगा भी बनाया था, जिस पर उस समय कोई आपत्ति नहीं की गई। आवेदक ने जवाब में कहा कि प्रतिवादी अपनी अबादी देह भूमि पर नहीं, बल्कि उसकी गैर मुमकिन अबादी भूमि पर कब्जा कर निर्माण कर रहे हैं। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद रिकॉर्ड का अवलोकन किया। अदालत ने पाया कि आवेदक के आरोपों के समर्थन में तस्वीरें और शपथ पत्र रिकॉर्ड पर हैं, जबकि प्रतिवादी यह साबित करने के लिए कोई दस्तावेज या सामग्री पेश नहीं कर सके कि निर्माण उनकी अबादी देह भूमि पर ही हो रहा है। अदालत ने माना कि इस स्तर पर पुलिस सहायता नहीं देने से आवेदक को अपूरणीय नुकसान हो सकता है। अदालत ने कहा कि न्यायालय की ओर से पारित आदेश को मौके पर अक्षरश: लागू करवाना जरूरी है। इसके बाद आवेदन मंजूर करते हुए एसएचओ भाराड़ी को पुलिस सहायता उपलब्ध करवाने के निर्देश दिए गए। पुलिस जरूरत पड़ने पर राजस्व अधिकारी की सहायता लेकर मौके पर वाद भूमि की पहचान भी करवा सकेगी।
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भूमि की पहचान के लिए राजस्व अधिकारी की मदद ले सकेगी पुलिस
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। वाद भूमि पर अदालती रोक के बावजूद निर्माण किए जाने के आरोप के मामले में घुमारवीं सिविल जज कोर्ट नंबर-3 ने पुलिस को अदालत के आदेश की पालना करवाने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने पुलिस थाना भाराड़ी के एसएचओ को चार मई और दो जून 2026 को पारित आदेशों को मौके पर लागू करवाने के लिए पुलिस सहायता उपलब्ध करवाने के निर्देश दिए हैं।
आवेदक ने अदालत में दायर आवेदन में आरोप लगाया था कि मुख्य मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने प्रतिवादियों को वाद भूमि पर किसी भी तरह का अवैध या गैरकानूनी हस्तक्षेप करने से रोक दिया था। इसके बावजूद प्रतिवादी मजदूरों और राजमिस्त्रियों को लगाकर वाद भूमि में खुदाई कर निर्माण के लिए पिल्लर खड़े कर रहे हैं।
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प्रतिवादियों ने आरोपों से इन्कार करते हुए कहा कि निर्माण वाद भूमि पर नहीं, बल्कि उनकी अपनी अबादी देह भूमि पर किया जा रहा है। उनका कहना था कि उन्होंने पहले आवेदक से 0-15 बीघा भूमि खरीदी थी और वर्ष 2021 में वहां डंगा भी बनाया था, जिस पर उस समय कोई आपत्ति नहीं की गई। आवेदक ने जवाब में कहा कि प्रतिवादी अपनी अबादी देह भूमि पर नहीं, बल्कि उसकी गैर मुमकिन अबादी भूमि पर कब्जा कर निर्माण कर रहे हैं। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद रिकॉर्ड का अवलोकन किया। अदालत ने पाया कि आवेदक के आरोपों के समर्थन में तस्वीरें और शपथ पत्र रिकॉर्ड पर हैं, जबकि प्रतिवादी यह साबित करने के लिए कोई दस्तावेज या सामग्री पेश नहीं कर सके कि निर्माण उनकी अबादी देह भूमि पर ही हो रहा है। अदालत ने माना कि इस स्तर पर पुलिस सहायता नहीं देने से आवेदक को अपूरणीय नुकसान हो सकता है। अदालत ने कहा कि न्यायालय की ओर से पारित आदेश को मौके पर अक्षरश: लागू करवाना जरूरी है। इसके बाद आवेदन मंजूर करते हुए एसएचओ भाराड़ी को पुलिस सहायता उपलब्ध करवाने के निर्देश दिए गए। पुलिस जरूरत पड़ने पर राजस्व अधिकारी की सहायता लेकर मौके पर वाद भूमि की पहचान भी करवा सकेगी।
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