{"_id":"6a78ccfd58f929eec40befb8","slug":"the-health-department-will-investigate-the-reasons-behind-non-institutional-deliveries-and-compile-comprehensive-area-wise-data-bilaspur-news-c-92-1-ssml1001-165199-2026-08-10","type":"story","status":"publish","title_hn":"Bilaspur News: गैर संस्थागत प्रसव के कारण तलाशेगा स्वास्थ्य विभाग, क्षेत्रवार बनेगा पूरा डेटा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Bilaspur News: गैर संस्थागत प्रसव के कारण तलाशेगा स्वास्थ्य विभाग, क्षेत्रवार बनेगा पूरा डेटा
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अस्पताल से दूरी, परिवहन की कमी और जागरूकता समेत कारणों की होगी पहचान
जिले में कितने संस्थागत और कितने गैर संस्थागत प्रसव, जुटाया जाएगा पूरा आंकड़ा
गैर संस्थागत प्रसव वाले गांव और क्षेत्र किए जाएंगे चिह्नित
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। जिले में गैर संस्थागत प्रसव के मामलों को लेकर स्वास्थ्य विभाग अब केवल आंकड़े जुटाने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इनके पीछे के कारणों की भी पड़ताल करेगा। जिले में होने वाले प्रसव का क्षेत्रवार डेटा तैयार किया जाएगा। इसमें यह स्पष्ट होगा कि किस पंचायत, गांव और क्षेत्र में कितने प्रसव स्वास्थ्य संस्थानों में और कितने गैर संस्थागत तरीके से हो रहे हैं। गैर संस्थागत प्रसव वाले क्षेत्रों की पहचान के बाद यह पता लगाया जाएगा कि महिलाएं प्रसव के लिए स्वास्थ्य संस्थानों तक क्यों नहीं पहुंच पा रही हैं। इसके लिए अस्पताल की दूरी, परिवहन सुविधा, सड़क की स्थिति, समय पर वाहन या एंबुलेंस की उपलब्धता, स्वास्थ्य संस्थान में प्रसव की सुविधा और जागरूकता की स्थिति की समीक्षा होगी। अधिक मामलों वाले क्षेत्रों की अलग से समीक्षा की जाएगी। विभाग यह देखेगा कि कहीं अस्पताल की दूरी, खराब सड़क या समय पर वाहन नहीं मिलना तो इसकी वजह नहीं है। दूरदराज क्षेत्रों में अस्पताल तक पहुंचने में लगने वाले समय और भौगोलिक परिस्थितियों का भी आकलन किया जाएगा। गैर संस्थागत प्रसव के पीछे जागरूकता की कमी, पारंपरिक सोच या सामाजिक मान्यताएं जिम्मेदार हैं या नहीं, इसका भी पता लगाया जाएगा। गर्भवती महिलाओं और उनके परिवारों को संस्थागत प्रसव के महत्व की जानकारी है या नहीं, इसकी समीक्षा की जाएगी। आशा कार्यकर्ताओं और स्वास्थ्य कर्मियों की ओर से गर्भवती महिलाओं के नियमित संपर्क और निगरानी की स्थिति भी देखी जाएगी। तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी ने कहा कि इस कवायद का उद्देश्य केवल आंकड़े तैयार करना नहीं, बल्कि गैर संस्थागत प्रसव के वास्तविक कारणों का पता लगाकर समाधान तलाशना है। क्षेत्रवार डेटा सामने आने के बाद यह तय किया जा सकेगा कि समस्या परिवहन, स्वास्थ्य सुविधा की पहुंच, जागरूकता या सामाजिक सोच से जुड़ी है। इसके आधार पर जरूरत वाले क्षेत्रों में स्वास्थ्य विभाग की गतिविधियां बढ़ाई जाएंगी।
अब सामने आएगी क्षेत्रवार तस्वीर
क्षेत्रवार डेटा तैयार होने से यह पता चलेगा कि गैर संस्थागत प्रसव की समस्या किन क्षेत्रों में अधिक है। इससे स्वास्थ्य विभाग को जरूरत के अनुसार योजनाएं बनाने में मदद मिलेगी। संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने और गर्भवती महिलाओं को समय पर स्वास्थ्य संस्थानों तक पहुंचाने के लिए संबंधित क्षेत्रों में विशेष कदम उठाए जा सकेंगे।
विज्ञापन
जिले में कितने संस्थागत और कितने गैर संस्थागत प्रसव, जुटाया जाएगा पूरा आंकड़ा
गैर संस्थागत प्रसव वाले गांव और क्षेत्र किए जाएंगे चिह्नित
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। जिले में गैर संस्थागत प्रसव के मामलों को लेकर स्वास्थ्य विभाग अब केवल आंकड़े जुटाने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इनके पीछे के कारणों की भी पड़ताल करेगा। जिले में होने वाले प्रसव का क्षेत्रवार डेटा तैयार किया जाएगा। इसमें यह स्पष्ट होगा कि किस पंचायत, गांव और क्षेत्र में कितने प्रसव स्वास्थ्य संस्थानों में और कितने गैर संस्थागत तरीके से हो रहे हैं। गैर संस्थागत प्रसव वाले क्षेत्रों की पहचान के बाद यह पता लगाया जाएगा कि महिलाएं प्रसव के लिए स्वास्थ्य संस्थानों तक क्यों नहीं पहुंच पा रही हैं। इसके लिए अस्पताल की दूरी, परिवहन सुविधा, सड़क की स्थिति, समय पर वाहन या एंबुलेंस की उपलब्धता, स्वास्थ्य संस्थान में प्रसव की सुविधा और जागरूकता की स्थिति की समीक्षा होगी। अधिक मामलों वाले क्षेत्रों की अलग से समीक्षा की जाएगी। विभाग यह देखेगा कि कहीं अस्पताल की दूरी, खराब सड़क या समय पर वाहन नहीं मिलना तो इसकी वजह नहीं है। दूरदराज क्षेत्रों में अस्पताल तक पहुंचने में लगने वाले समय और भौगोलिक परिस्थितियों का भी आकलन किया जाएगा। गैर संस्थागत प्रसव के पीछे जागरूकता की कमी, पारंपरिक सोच या सामाजिक मान्यताएं जिम्मेदार हैं या नहीं, इसका भी पता लगाया जाएगा। गर्भवती महिलाओं और उनके परिवारों को संस्थागत प्रसव के महत्व की जानकारी है या नहीं, इसकी समीक्षा की जाएगी। आशा कार्यकर्ताओं और स्वास्थ्य कर्मियों की ओर से गर्भवती महिलाओं के नियमित संपर्क और निगरानी की स्थिति भी देखी जाएगी। तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी ने कहा कि इस कवायद का उद्देश्य केवल आंकड़े तैयार करना नहीं, बल्कि गैर संस्थागत प्रसव के वास्तविक कारणों का पता लगाकर समाधान तलाशना है। क्षेत्रवार डेटा सामने आने के बाद यह तय किया जा सकेगा कि समस्या परिवहन, स्वास्थ्य सुविधा की पहुंच, जागरूकता या सामाजिक सोच से जुड़ी है। इसके आधार पर जरूरत वाले क्षेत्रों में स्वास्थ्य विभाग की गतिविधियां बढ़ाई जाएंगी।
अब सामने आएगी क्षेत्रवार तस्वीर
क्षेत्रवार डेटा तैयार होने से यह पता चलेगा कि गैर संस्थागत प्रसव की समस्या किन क्षेत्रों में अधिक है। इससे स्वास्थ्य विभाग को जरूरत के अनुसार योजनाएं बनाने में मदद मिलेगी। संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने और गर्भवती महिलाओं को समय पर स्वास्थ्य संस्थानों तक पहुंचाने के लिए संबंधित क्षेत्रों में विशेष कदम उठाए जा सकेंगे।
विज्ञापन