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AIIMS Bilaspur: असली मानव कंकालों से मजबूत होगी डॉक्टरों की ट्रेनिंग, एनाटॉमी की पढ़ाई होगी आसान, जानें
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर।
Published by: अंकेश डोगरा
Updated Thu, 26 Feb 2026 02:33 PM IST
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सार
एम्स बिलासपुर में मेडिकल छात्रों को पढ़ाई के दौरान वास्तविक अनुभव मिलेगा। एम्स में असली मानव कंकाल मंगवाने की प्रक्रिया शुरू की गई है। जानें विस्तार से...
एम्स बिलासपुर
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
एम्स बिलासपुर में मेडिकल शिक्षण कार्यों के लिए असली मानव कंकाल (ह्यूमन स्केलेटन डिसआर्टिकुलेटेड) मंगवाने की प्रक्रिया शुरू की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस पहल से मेडिकल छात्रों को पढ़ाई के दौरान वास्तविक अनुभव मिलेगा, जिससे भविष्य के डॉक्टरों की दक्षता और उपचार क्षमता में सुधार होगा।
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मेडिकल शिक्षा में मानव शरीर की संरचना को समझना सबसे महत्वपूर्ण आधार होता है। अब तक कई जगहों पर प्लास्टिक मॉडल का उपयोग किया जाता रहा है, लेकिन असली हड्डियों के अध्ययन से छात्रों को अधिक सटीक और गहराई वाला ज्ञान मिलता है। इससे पढ़ाई के साथ-साथ प्रैक्टिकल समझ भी मजबूत होगी। एमबीबीएस और एमडी के विद्यार्थियों को एनाटॉमी विषय के अंतर्गत अस्थि विज्ञान (ऑस्टियोलॉजी) का अध्ययन करना होता है।
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असली कंकाल उपलब्ध होने से छात्र हड्डियों की सूक्ष्म बनावट, जोड़ बनने के स्थान, नसों और रक्त वाहिकाओं के मार्ग को प्रत्यक्ष रूप से देख सकेंगे। इसके अलावा अलग-अलग हड्डियों की पहचान करना और शरीर में उनकी सही स्थिति समझना भी आसान होगा। असली हड्डियों का घनत्व और बनावट प्लास्टिक मॉडल से अलग होती है। ऐसे में सर्जरी का अभ्यास करने वाले डॉक्टरों और सर्जनों को वास्तविक ऑपरेशन जैसा अनुभव मिलेगा। इससे जटिल सर्जरी करने की क्षमता और आत्मविश्वास दोनों बढ़ेंगे।
फॉरेंसिक साइंस के छात्रों को हड्डियों के आधार पर उम्र, लिंग और मौत के कारणों का अनुमान लगाने का प्रशिक्षण मिलता है। वहीं रेडियोलॉजी के विद्यार्थियों को एक्स-रे, सीटी स्कैन और एमआरआई रिपोर्ट समझने में भी मदद मिलेगी, क्योंकि वास्तविक हड्डियों की संरचना का ज्ञान डायग्नोसिस के लिए जरूरी माना जाता है। टेंडर में उपयोग किए गए डिसआर्टिकुलेटेड शब्द का अर्थ है कि पूरा कंकाल जुड़ा हुआ नहीं होगा, बल्कि हड्डियां अलग-अलग (लूज बोन) होंगी। इससे छात्र हर हड्डी को हाथ में लेकर चारों तरफ से देख सकेंगे और विस्तार से अध्ययन कर पाएंगे। यह तरीका मेडिकल शिक्षा में सबसे प्रभावी माना जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि बेहतर प्रशिक्षण प्राप्त डॉक्टर भविष्य में मरीजों का अधिक सटीक इलाज कर पाएंगे। इससे क्षेत्र की स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में भी सुधार होगा और जटिल बीमारियों के इलाज में सफलता दर बढ़ेगी।