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Bilaspur News: फोरलेन की जद में आया वन विभाग का रेस्ट हाउस, बढ़ी चिंता
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
Updated Wed, 25 Feb 2026 11:52 PM IST
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राजघाट नम्होल में पहुंचे एसडीएम सदर, पूर्व मंत्री व अन्य ग्रामीण। स्रोत: ग्रामीण
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पूर्व मंत्री ने मौके पर जाकर लिया जायजा, एलाइनमेंट बदलने की उठाई मांग
एनएचआई ने दोबारा तकनीकी समीक्षा का दिया आश्वासन
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। राजघाट-नम्होल स्थित वन विभाग का पुराना रेस्ट हाउस फोरलेन निर्माण की जद में आने से क्षेत्र में चिंता का माहौल बन गया है। इस मुद्दे को लेकर पूर्व मंत्री रामलाल ठाकुर ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। इस दौरान सदर एसडीएम, एनएचआई के अधिकारी तथा वन विभाग के अधिकारी भी मौजूद रहे।
पूर्व मंत्री रामलाल ठाकुर ने कहा कि वन विभाग का यह रेस्ट हाउस वर्षों पुराना है और क्षेत्र की एक महत्वपूर्ण धरोहर है। फोरलेन परियोजना के तहत इसका कुछ हिस्सा प्रभावित हो रहा है। यदि भवन का आधा भाग तोड़ा जाता है और आधा हिस्सा बचता है तो यह किसी उपयोग का नहीं रहेगा और जनता को इसका कोई लाभ नहीं मिलेगा। उन्होंने अधिकारियों से आग्रह किया कि फोरलेन की एलाइनमेंट को आगे-पीछे कर तकनीकी विकल्प तलाशे जाएं, ताकि इस ऐतिहासिक रेस्ट हाउस को पूरी तरह सुरक्षित रखा जा सके। उन्होंने कहा कि विकास कार्य आवश्यक हैं, लेकिन पुराने सरकारी भवनों और धरोहरों को बचाना भी उतना ही जरूरी है। एनएचआई अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि मामले की दोबारा तकनीकी समीक्षा की जाएगी। वहीं, वन विभाग के अधिकारियों ने भी रेस्ट हाउस के संरक्षण को लेकर सहमति जताई।
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एनएचआई ने दोबारा तकनीकी समीक्षा का दिया आश्वासन
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। राजघाट-नम्होल स्थित वन विभाग का पुराना रेस्ट हाउस फोरलेन निर्माण की जद में आने से क्षेत्र में चिंता का माहौल बन गया है। इस मुद्दे को लेकर पूर्व मंत्री रामलाल ठाकुर ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। इस दौरान सदर एसडीएम, एनएचआई के अधिकारी तथा वन विभाग के अधिकारी भी मौजूद रहे।
पूर्व मंत्री रामलाल ठाकुर ने कहा कि वन विभाग का यह रेस्ट हाउस वर्षों पुराना है और क्षेत्र की एक महत्वपूर्ण धरोहर है। फोरलेन परियोजना के तहत इसका कुछ हिस्सा प्रभावित हो रहा है। यदि भवन का आधा भाग तोड़ा जाता है और आधा हिस्सा बचता है तो यह किसी उपयोग का नहीं रहेगा और जनता को इसका कोई लाभ नहीं मिलेगा। उन्होंने अधिकारियों से आग्रह किया कि फोरलेन की एलाइनमेंट को आगे-पीछे कर तकनीकी विकल्प तलाशे जाएं, ताकि इस ऐतिहासिक रेस्ट हाउस को पूरी तरह सुरक्षित रखा जा सके। उन्होंने कहा कि विकास कार्य आवश्यक हैं, लेकिन पुराने सरकारी भवनों और धरोहरों को बचाना भी उतना ही जरूरी है। एनएचआई अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि मामले की दोबारा तकनीकी समीक्षा की जाएगी। वहीं, वन विभाग के अधिकारियों ने भी रेस्ट हाउस के संरक्षण को लेकर सहमति जताई।
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