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Bilaspur Vehicle Scam: चोरी की लग्जरी गाड़ियों को फर्जी कागजों से बनाते थे 'वैध', फरीदाबाद से एजेंट गिरफ्तार

Sun, 09 Aug 2026 01:05 PM IST
Ankesh Dogra संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर।
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर। Published by: Ankesh Dogra Updated Sun, 09 Aug 2026 01:05 PM IST
सार

Bilaspur Vehicle Registration Scam : दिल्ली क्राइम ब्रांच ने चोरी की लग्जरी गाड़ियों को फर्जी दस्तावेजों से वैध पहचान देकर बेचने वाले गिरोह के एक एजेंट को फरीदाबाद से गिरफ्तार किया है। जांच में उसका कनेक्शन बिलासपुर आरएलए से जुड़े मुख्य आरोपी गौरव से सामने आया है। गिरोह चेसिस नंबर में हेरफेर और फर्जी दस्तावेजों के जरिए चोरी की गाड़ियों का रजिस्ट्रेशन करवाता था। मामले में अब तक 14 गिरफ्तारियां और 37 वाहनों की बरामदगी हो चुकी है।

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आरएलए बिलासपुर। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

विस्तार

चोरी की लग्जरी गाड़ियों को फर्जी दस्तावेजों के सहारे वैध वाहन दिखाकर अलग-अलग राज्यों में बेचने वाले अंतरराज्यीय गिरोह की जांच में एक और अहम कड़ी सामने आई है। दिल्ली क्राइम ब्रांच ने फरीदाबाद से एजेंट राजेंद्र को गिरफ्तार किया है। जांच में आरोप है कि राजेंद्र बिलासपुर आरएलए से जुड़े मुख्य आरोपी गौरव के लिए एजेंट का काम करता था और चोरी की गाड़ियों के फर्जी रजिस्ट्रेशन से संबंधित काम उस तक पहुंचाता था।

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दिल्ली क्राइम ब्रांच ने इस मामले में 9 जनवरी को एफआईआर दर्ज की थी। इसके बाद चोरी की लग्जरी गाड़ियों को फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नई पहचान देकर बेचने वाले नेटवर्क की जांच शुरू की गई। जांच में सामने आया कि गिरोह चोरी की गाड़ियों को सीधे बेचने के बजाय पहले उनकी पहचान बदलने का काम करता था। इसके लिए गाड़ियों के चेसिस नंबर में हेरफेर किया जाता था। कुछ मामलों में पुरानी या पानी में डूबी गाड़ियों के चेसिस नंबर का इस्तेमाल चोरी की गाड़ियों पर किया जाता था।
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इसके बाद गिरोह कथित तौर पर फर्जी सेल लेटर, फॉर्म-21, एनओसी, बैंक एनओसी और अन्य दस्तावेज तैयार करता था। इन कागजात के आधार पर चोरी की गाड़ियों को दूसरे राज्य के आरएलए में पंजीकृत करवाकर वैध वाहन के तौर पर दिखाने की कोशिश की जाती थी।

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बिलासपुर आरएलए से जुड़ी अहम कड़ी
जांच के दौरान इस पूरे नेटवर्क की एक महत्वपूर्ण कड़ी बिलासपुर आरएलए से जुड़ी मिली। आरोप है कि एजेंटों और कुछ कर्मचारियों की मिलीभगत से फर्जी दस्तावेजों के आधार पर चोरी की गाड़ियों का पंजीकरण करवाया गया। जांच एजेंसी को दिल्ली से चोरी हुई दो फॉर्च्यूनर गाड़ियों के बारे में भी अहम सुराग मिले। दोनों वाहनों को बरामद किया गया है। इनमें एक का पंजीकरण नंबर HP 24 E 4948 और दूसरे का HP 24 E 3974 बताया गया है। जांच के अनुसार इन वाहनों के चेसिस नंबर में हेरफेर किया गया था और फर्जी दस्तावेजों के आधार पर इन्हें बिलासपुर आरएलए में पंजीकृत करवाने की बात सामने आई है।

14 आरोपी गिरफ्तार, 37 गाड़ियां बरामद
फरीदाबाद से राजेंद्र की गिरफ्तारी के बाद इस मामले में गिरफ्तार आरोपियों की संख्या 14 हो गई है। जांच एजेंसी अब तक नेटवर्क से जुड़ी 37 गाड़ियां बरामद कर चुकी है। अब जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि फरीदाबाद में बैठकर राजेंद्र किन-किन लोगों के संपर्क में था और उसने कितने वाहनों के फर्जी रजिस्ट्रेशन से जुड़े काम मुख्य आरोपी गौरव तक पहुंचाए। सूत्रों के अनुसार हिमाचल और पंजाब में भी नेटवर्क से जुड़े लोगों की भूमिका की जांच की जा रही है। जांच आगे बढ़ने के साथ और गिरफ्तारियां होने की संभावना जताई जा रही है।

2025 के मामले से भी मिले थे सुराग
जांच टीम को वर्ष 2025 में दिल्ली के एक थाने में दर्ज मामले से भी इस नेटवर्क के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिली थी। इसके बाद क्राइम ब्रांच ने गिरोह की गतिविधियों और उससे जुड़े लोगों की कड़ियां जोड़नी शुरू कीं। जांच में चोरी, फर्जी दस्तावेज तैयार करने, धोखाधड़ी और चोरी की संपत्ति की पहचान बदलकर उसे बेचने से जुड़े आरोपों की कड़ियां सामने आई हैं।
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