Weight Loss: वजन घटाने के लिए न डाइटिंग जरूरी न ही महंगी दवाएं, वैज्ञानिकों ने बताया इसका सबसे कारगर फॉर्मूला
वैज्ञानिकों का कहना है कि वीगन डाइट यानी मांस, मछली और डेयरी जैसे पशु उत्पादों से परहेज करने वाली लो फैट वाली डाइट वजन घटाने में काफी असरदार हो सकती है। क्या आप भी वेट लॉस करना चाहते हैं?
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
बढ़ता वजन और मोटापा, मौजूदा समय की सबसे गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं में से एक है। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी उम्र के लोग इसका शिकार देखे जा रहे हैं। वजन बढ़ने के साथ शरीर में कई तरह की बीमारियों का जोखिम भी बढ़ जाता है। इसे हृदय रोग, डायबिटीज से लेकर कई तरह के कैंसर का प्रमुख कारण माना जाता रहा है।
मोटापा को लेकर लोगों में अब जागरूकता बढ़ रही है। लोग वेट लॉस के लिए तरह-तरह के उपाय कर रहे हैं। वजन कम करने की बात आते ही सबसे पहले डाइट, एक्सरसाइज की सलाह दी जाती है। इसके अलावा पिछले कुछ समय से ओजेम्पिक जैसी वजन घटाने वाली दवाओं को लेकर भी काफी चर्चा रही है।
विशेषज्ञ कहते हैं, क्या हो अगर वजन घटाने का तरीका आपकी रसोई में ही मौजूद हो, जो महंगी दवाओं के बिना तेजी से वजन कम करने में मदद कर सकता है? इसी को लेकर एक हालिया अध्ययन में वैज्ञानिकों ने बताया कि वीगन डाइट अपनाना वेट लॉस के लिए काफी मददगार हो सकता है। वीगन डाइट एक ऐसी खान-पान की शैली है जिसमें पूरी तरह से पौधों से मिलने वाले खाद्य पदार्थों का उपयोग किया जाता है। इसमें मांस और मछली के साथ-साथ पशुओं से मिलने वाले उत्पाद जैसे दूध, दही, पनीर, मक्खन, घी, अंडे और यहां तक कि शहद का सेवन भी नहीं किया जाता है।
अध्ययन में पाया गया है कि वीगन डाइट सिर्फ चार महीने में करीब 6 किलो वजन घटाने में मदद कर सकती है।
वीगन डाइट, वेट लॉस की दवाओं से ज्यादा असरदार
अध्ययनकर्ताओं ने पाया कि ये खास डाइट सेहत के लिए पहले से ही काफी फायदेमंद मानी जाती रही है, इससे वेट लॉस में भी मदद मिल सकती है। शोध में वैज्ञानिकों ने वीगन डाइट की तुलना सेमाग्लूटाइड से की, जिसमें पाया गया कि ये डाइट ज्यादा असरदार हो सकती है। सेमाग्लूटाइड वह प्रमुख दवा घटक है जिसका इस्तेमाल ओजेम्पिक और वेगोवी जैसी चर्चित वजन घटाने वाली दवाओं में होता है।
अलग-अलग परीक्षणों में सेमाग्लूटाइड लेने वाले लोगों ने करीब नौ महीने में औसतन 6.9 किलो वजन कम किया। जबकि वीगन डाइट से मात्र चार महीने में ही 6 किलो तक वजन कम करने में मदद मिली। यानी एक तरफ इंजेक्शन आधारित इलाज और दूसरी तरफ प्लेट में आने वाला खाना, दोनों के वजन घटाने के आंकड़े चर्चा का विषय बन गए हैं।
अब सवाल सिर्फ यह नहीं है कि वजन तेजी से किससे घटता है, बल्कि यह भी है कि कौन-सा तरीका लंबे समय तक सुरक्षित और टिकाऊ है?
गौरतलब है कि दुनियाभर में बड़ी संख्या में लोग वजन घटाने वाले इंजेक्श ले रहे हैं। उन पर हुए कई अध्ययनों से पता चलता है कि इनसे वजन धीरे-धीरे कम होता है। कई मरीजों का वजन सात महीने में औसतन सिर्फ 10 पाउंड (4.5 किलो) कम हुआ।
अमेरिकी वैज्ञानिकों की नई रिसर्च में पाया गया कि पेड़-पौधों से मिलने वाली चीजें (प्लांट-बेस्ड डाइट) खाने से रोजाना की कैलोरी में लगभग एक-चौथाई की कमी आती है, जिससे वजन काफी कम हो जाता है। इतना ही नहीं वेट लॉस के इंजेक्शन से होने वाले साइड-इफेक्ट्स भी काफी चर्चा का विषय रहे हैं।
अध्ययन में क्या पता चला?
जामा नेटवर्क जर्नल में प्रकाशित इस अध्ययन में अधिक वजन वाले 224 वयस्कों को शामिल किया गया, जिनमें ज्यादातर महिलाएं थीं जिनकी औसत उम्र 54 साल थी।
- उन्हें दो ग्रुप में बांटा गया। आधे मरीजों ने प्लांट-बेस्ड डाइट अपनाई, जबकि बाकी लोगों ने अपनी पुरानी खान-पान की आदतें जारी रखीं।
- वीगन डाइट अपनाने वाले लोग अपनी पसंद के हिसाब से फल, सब्जिंयां, अनाज खा सकते थे
- 16 हफ्तों तक प्लांट-बेस्ड डाइट लेने के बाद प्रतिभागियों के खानपान में बड़ा बदलाव देखा गया। उनके भोजन में सब्जियों-फलों और बीन्स की मात्रा बढ़ गई।
- जब वैज्ञानिकों ने इस डाइट के असर का आकलन किया तो पाया कि सिर्फ 16 हफ्तों में प्रतिभागियों ने लगभग 6 किलो वजन कम किया।
वैज्ञानिकों ने यह भी समझने की कोशिश की कि मांस और दूसरे पशु उत्पादों वाले डाइट वजन बढ़ाने में कैसे भूमिका निभा सकते हैं? इसके पीछे एक बड़ा कारण भोजन की एनर्जी डेंसिटी यानी कम मात्रा में ज्यादा कैलोरी होना बताया गया। दिलचस्प बात यह रही कि वीगन डाइट लेने वाले लोग पहले की तुलना में लगभग उतना ही खाना खा रहे थे। फर्क यह था कि उनके भोजन में कैलोरी काफी कम हो गई थी।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
शोधकर्ताओं ने बताया, प्लांट-बेस्ड खाद्य पदार्थों में आमतौर पर पानी और फाइबर ज्यादा जबकि फैट की मात्रा कम होती है। इसलिए प्लेट में भोजन की मात्रा कम किए बिना भी लो कैलोरी ही रहती है। इस तरह पेट ज्यादा भरा हुआ महसूस होता है और लो कैलोरी के कारण वजन घटाने में भी मदद मिल सकती है।
- वीगन डाइट का असर केवल वजन तक सीमित नहीं रहा। अध्ययन में यह भी पाया गया कि इस डाइट को अपनाने वाले लोगों में ब्लड शुगर ज्यादा स्थिर रहा। इसके अलावा उनके लिवर और मांसपेशियों में जमा फैट कम हुआ।
हालांकि वैज्ञानिकों ने माना कि इस अध्ययन की कुछ सीमाएं हैं। अध्ययन में शामिल लोग अपनी इच्छा से रिसर्च में शामिल हुए थे। इसलिए जरूरी नहीं कि उनके नतीजे पूरी आबादी पर उसी तरह लागू हों।
वीगन डाइट के हो सकते हैं साइड-इफेक्ट्स
इसके अलावा विशेषज्ञों का कहना है कि वीगन डाइट को पूरी तरह हेल्दी भी नहीं माना जा सकती है। इससे सबसे बड़ी चिंता विटामिन बी12 की कमी को लेकर रहती है। फलों, सब्जियों और अनाज जैसे सामान्य प्लांट-बेस्ड खाद्य पदार्थों में प्राकृतिक रूप से बी12 की पर्याप्त मात्रा नहीं होती।
एडेनब्रुक्स अस्पताल के कंसल्टेंट ट्रॉमा और ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ. जूलियन ओवेन पहले भी विटामिन बी12 को लेकर चिंता जता चुके हैं। उनका कहना है कि यह शरीर के लिए बेहद जरूरी विटामिन है और वीगन डाइट में इसकी प्राकृतिक उपलब्धता लगभग न के बराबर होती है। अगर कोई व्यक्ति सप्लीमेंट नहीं लेता है तो लंबे समय तक वीगन डाइट लेने के बाद बी12 की कमी हो सकती है। इससे न्यूरोलॉजिकल समस्याएं पैदा होने का खतरा रहता है। इनमें चिंता, डिप्रेशन और गंभीर मामलों में साइकोसिस जैसे लक्षण भी शामिल हो सकते हैं।
इसलिए वजन कम करने के लिए वीगन डाइट अपनाने से पहले सिर्फ यह देखना पर्याप्त नहीं है कि इससे कितने किलो वजन कम हो सकता है। यह भी देखना जरूरी है कि शरीर को सभी जरूरी पोषक तत्व पर्याप्त मात्रा में मिल रहे हैं या नहीं?
--------------
स्रोत:
Vegan Diets and Dietary Energy Density A Secondary Analysis of a Randomized Clinical Trial
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।