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Bilaspur News: डीपीएफ जंगल में खैर के पेड़ों की अवैध कटाई की पीएमओ को भेजी शिकायत
Thu, 25 Jun 2026 11:57 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
Updated Thu, 25 Jun 2026 11:57 PM IST
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कलोल वन बीट के संरक्षित क्षेत्र में वन संपदा को नुकसान पहुंचाने का है मामला
लिखा, 2025 से मार्च 2026 के बीच में हुआ है सारा अवैध कटान
संवाद न्यूज़ एजेंसी
बिलासपुर। झंडूता उपमंडल के अंतर्गत आने वाले कलोल क्षेत्र में डीपीएफ जंगल में खैर के पेड़ों की कथित अवैध कटाई का मामला सामने आया है। इस संबंध में क्षेत्र के निवासी जसवंत सिंह ने प्रधानमंत्री कार्यालय, केंद्रीय सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो मंडी,इंडिया पोर्टल समेत विभिन्न सरकारी एजेंसियों को शिकायत भेजकर मामले की जांच करवाने की मांग की है। शिकायतकर्ता ने प्रधानमंत्री कार्यालय को भेजे पत्र में आरोप लगाया है कि ग्राम पंचायत कलोल के तहत आने वाले डीपीएफ जंगल क्षेत्र में सरकारी भूमि पर लगे खैर के पेड़ों की अवैध कटाई की गई है। शिकायत के अनुसार यह क्षेत्र वन विभाग के अधीन संरक्षित वन क्षेत्र है, जहां बड़ी संख्या में खैर के पेड़ मौजूद थे। आरोप है कि वर्ष 2025 से मार्च 2026 के बीच इन पेड़ों को काटा गया, जिससे सरकारी वन संपदा को नुकसान पहुंचा है। शिकायत में कहा गया है कि कलोल वन बीट के अंतर्गत आने वाले डीपीएफ क्षेत्र में कटे हुए पेड़ों के ठूंठ आज भी मौजूद हैं, जो कथित अवैध कटान की ओर संकेत करते हैं। शिकायतकर्ता का कहना है कि मामले की जानकारी संबंधित अधिकारियों को भी दी गई थी, लेकिन इसके बावजूद कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। प्रधानमंत्री कार्यालय को भेजे गए पत्र में शिकायतकर्ता ने दावा किया है कि संबंधित डीपीएफ क्षेत्र में नवंबर 2025 से खैर के पेड़ों की कटाई शुरू हुई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि समय-समय पर मामले को विभाग के संज्ञान में लाया गया, लेकिन वन संपदा को बचाने के लिए आवश्यक कदम नहीं उठाए गए। शिकायतकर्ता ने यह भी कहा है कि यदि समय रहते कार्रवाई होती तो जंगल को होने वाले नुकसान को रोका जा सकता था। मामले को लेकर शिकायतकर्ता ने 25 मार्च 2026 को इंडिया पोर्टल के माध्यम से भी शिकायत दर्ज करवाई थी। उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार ई-मेल के जरिए भेजी गई शिकायत में सरकारी डीपीएफ क्षेत्र में खैर के पेड़ों की अवैध कटाई का मुद्दा उठाया गया है।
शिकायत में जांच करवाकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है। शिकायतकर्ता ने मामले से संबंधित दस्तावेज केंद्रीय सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के मंडी स्थित कार्यालय को भी भेजे हैं। उनका कहना है कि यदि मामले की निष्पक्ष जांच की जाए तो अवैध कटाई और उससे जुड़े तथ्यों का खुलासा हो सकता है। मांग की है कि पूरे मामले की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच करवाई जाए। उन्होंने कहा कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित व्यक्तियों और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ वन कानूनों के तहत कार्रवाई की जानी चाहिए। साथ ही जंगल में हुए नुकसान का आकलन कर भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए भी कदम उठाए जाने चाहिए।
कोट
झंडूता विधानसभा क्षेत्र में खैर के अवैध कटान पर वन विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। हालांकि कलोल क्षेत्र के संबंध में मुझे कोई जानकारी नहीं थी, लेकिन अब मामला ध्यान में आया है। इसकी जांच कराई जाएगी और अगर कुछ संदिग्ध मिला तो कार्रवाई होगी। मृत्युंजय माधव, अरण्यपाल बिलासपुर
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लिखा, 2025 से मार्च 2026 के बीच में हुआ है सारा अवैध कटान
संवाद न्यूज़ एजेंसी
बिलासपुर। झंडूता उपमंडल के अंतर्गत आने वाले कलोल क्षेत्र में डीपीएफ जंगल में खैर के पेड़ों की कथित अवैध कटाई का मामला सामने आया है। इस संबंध में क्षेत्र के निवासी जसवंत सिंह ने प्रधानमंत्री कार्यालय, केंद्रीय सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो मंडी,इंडिया पोर्टल समेत विभिन्न सरकारी एजेंसियों को शिकायत भेजकर मामले की जांच करवाने की मांग की है। शिकायतकर्ता ने प्रधानमंत्री कार्यालय को भेजे पत्र में आरोप लगाया है कि ग्राम पंचायत कलोल के तहत आने वाले डीपीएफ जंगल क्षेत्र में सरकारी भूमि पर लगे खैर के पेड़ों की अवैध कटाई की गई है। शिकायत के अनुसार यह क्षेत्र वन विभाग के अधीन संरक्षित वन क्षेत्र है, जहां बड़ी संख्या में खैर के पेड़ मौजूद थे। आरोप है कि वर्ष 2025 से मार्च 2026 के बीच इन पेड़ों को काटा गया, जिससे सरकारी वन संपदा को नुकसान पहुंचा है। शिकायत में कहा गया है कि कलोल वन बीट के अंतर्गत आने वाले डीपीएफ क्षेत्र में कटे हुए पेड़ों के ठूंठ आज भी मौजूद हैं, जो कथित अवैध कटान की ओर संकेत करते हैं। शिकायतकर्ता का कहना है कि मामले की जानकारी संबंधित अधिकारियों को भी दी गई थी, लेकिन इसके बावजूद कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। प्रधानमंत्री कार्यालय को भेजे गए पत्र में शिकायतकर्ता ने दावा किया है कि संबंधित डीपीएफ क्षेत्र में नवंबर 2025 से खैर के पेड़ों की कटाई शुरू हुई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि समय-समय पर मामले को विभाग के संज्ञान में लाया गया, लेकिन वन संपदा को बचाने के लिए आवश्यक कदम नहीं उठाए गए। शिकायतकर्ता ने यह भी कहा है कि यदि समय रहते कार्रवाई होती तो जंगल को होने वाले नुकसान को रोका जा सकता था। मामले को लेकर शिकायतकर्ता ने 25 मार्च 2026 को इंडिया पोर्टल के माध्यम से भी शिकायत दर्ज करवाई थी। उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार ई-मेल के जरिए भेजी गई शिकायत में सरकारी डीपीएफ क्षेत्र में खैर के पेड़ों की अवैध कटाई का मुद्दा उठाया गया है।
शिकायत में जांच करवाकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है। शिकायतकर्ता ने मामले से संबंधित दस्तावेज केंद्रीय सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के मंडी स्थित कार्यालय को भी भेजे हैं। उनका कहना है कि यदि मामले की निष्पक्ष जांच की जाए तो अवैध कटाई और उससे जुड़े तथ्यों का खुलासा हो सकता है। मांग की है कि पूरे मामले की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच करवाई जाए। उन्होंने कहा कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित व्यक्तियों और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ वन कानूनों के तहत कार्रवाई की जानी चाहिए। साथ ही जंगल में हुए नुकसान का आकलन कर भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए भी कदम उठाए जाने चाहिए।
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झंडूता विधानसभा क्षेत्र में खैर के अवैध कटान पर वन विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। हालांकि कलोल क्षेत्र के संबंध में मुझे कोई जानकारी नहीं थी, लेकिन अब मामला ध्यान में आया है। इसकी जांच कराई जाएगी और अगर कुछ संदिग्ध मिला तो कार्रवाई होगी। मृत्युंजय माधव, अरण्यपाल बिलासपुर
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