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Bilaspur News: चरस मामले में आरोपी बरी
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अदालत से
साक्ष्यों में खामियों के चलते नहीं टिक पाया मामला, स्वतंत्र गवाह मुकरा
पिट्ठू बैग और अन्य सामान जब्त न करना पड़ा भारी
जांच में विरोधाभास और प्रक्रियागत चूक से आरोपी को मिला संदेह का लाभ
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। एनडीपीएस एक्ट के तहत दर्ज चरस बरामदगी के मामले में विशेष न्यायाधीश घुमारवीं की अदालत ने आरोपी को बरी कर दिया है। अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे सिद्ध करने में असफल रहा है।
मामला 29 नवंबर 2023 का है, जब पुलिस ने सीर खड्ड के पुराने पुल के पास आरोपी को पकड़कर उसके बैग से करीब 131 ग्राम चरस बरामद करने का दावा किया था। इस संबंध में पुलिस थाना घुमारवीं में एनडीपीएस एक्ट की धारा 20 के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी। पुलिस के अनुसार गश्त के दौरान आरोपी पुलिस को देखकर घबरा गया और भागने लगा। संदेह के आधार पर उसे पकड़कर बैग की तलाशी ली गई, जिसमें एक काले पॉलीथिन में चरस बरामद होने का दावा किया गया। बरामद चरस को सील कर जब्त किया गया और जांच के बाद चालान अदालत में पेश किया गया। मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने 11 गवाह पेश किए, जिनमें पुलिस अधिकारी और एक स्वतंत्र गवाह शामिल था। हालांकि, स्वतंत्र गवाह अदालत में अपने पहले बयान से मुकर गया और उसने बरामदगी की प्रक्रिया को नकार दिया। अदालत ने अपने फैसले में कई गंभीर खामियां गिनाईं।
पिट्ठू बैग जब्त नहीं किया गया, जिस बैग से चरस मिलने का दावा था, उसे ही जब्त नहीं किया गया। अन्य सामान का कोई रिकॉर्ड नहीं, बैग में मौजूद जींस, कैप और चिप्स के पैकेट का भी कोई हिसाब नहीं मिला। स्वतंत्र गवाह का मुकरना, गवाह ने बरामदगी प्रक्रिया से इन्कार कर दिया।
पुलिस अधिकारियों के बयानों में कई जगह अंतर पाया गया। जबकि व्यक्तिगत तलाशी नहीं हुई, फिर भी आरोपी को मजिस्ट्रेट के सामने तलाशी का अधिकार बताने की बात कही गई, लेकिन उसका कोई रिकॉर्ड नहीं मिला। अदालत ने कहा कि एनडीपीएस एक्ट जैसे सख्त कानून में जांच एजेंसियों को अत्यधिक सावधानी और पारदर्शिता बरतनी चाहिए। यदि जांच में थोड़ी भी चूक होती है तो आरोपी को संदेह का लाभ देना अनिवार्य हो जाता है। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ ठोस और विश्वसनीय साक्ष्य पेश नहीं कर सका। इसलिए आरोपी को एनडीपीएस एक्ट की धारा 20 के तहत बरी किया जाता है। साथ ही अदालत ने आदेश दिया कि नियमानुसार अपील अवधि के बाद जब्त माल को नष्ट किया जाए।
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साक्ष्यों में खामियों के चलते नहीं टिक पाया मामला, स्वतंत्र गवाह मुकरा
पिट्ठू बैग और अन्य सामान जब्त न करना पड़ा भारी
जांच में विरोधाभास और प्रक्रियागत चूक से आरोपी को मिला संदेह का लाभ
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। एनडीपीएस एक्ट के तहत दर्ज चरस बरामदगी के मामले में विशेष न्यायाधीश घुमारवीं की अदालत ने आरोपी को बरी कर दिया है। अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे सिद्ध करने में असफल रहा है।
मामला 29 नवंबर 2023 का है, जब पुलिस ने सीर खड्ड के पुराने पुल के पास आरोपी को पकड़कर उसके बैग से करीब 131 ग्राम चरस बरामद करने का दावा किया था। इस संबंध में पुलिस थाना घुमारवीं में एनडीपीएस एक्ट की धारा 20 के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी। पुलिस के अनुसार गश्त के दौरान आरोपी पुलिस को देखकर घबरा गया और भागने लगा। संदेह के आधार पर उसे पकड़कर बैग की तलाशी ली गई, जिसमें एक काले पॉलीथिन में चरस बरामद होने का दावा किया गया। बरामद चरस को सील कर जब्त किया गया और जांच के बाद चालान अदालत में पेश किया गया। मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने 11 गवाह पेश किए, जिनमें पुलिस अधिकारी और एक स्वतंत्र गवाह शामिल था। हालांकि, स्वतंत्र गवाह अदालत में अपने पहले बयान से मुकर गया और उसने बरामदगी की प्रक्रिया को नकार दिया। अदालत ने अपने फैसले में कई गंभीर खामियां गिनाईं।
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पिट्ठू बैग जब्त नहीं किया गया, जिस बैग से चरस मिलने का दावा था, उसे ही जब्त नहीं किया गया। अन्य सामान का कोई रिकॉर्ड नहीं, बैग में मौजूद जींस, कैप और चिप्स के पैकेट का भी कोई हिसाब नहीं मिला। स्वतंत्र गवाह का मुकरना, गवाह ने बरामदगी प्रक्रिया से इन्कार कर दिया।
पुलिस अधिकारियों के बयानों में कई जगह अंतर पाया गया। जबकि व्यक्तिगत तलाशी नहीं हुई, फिर भी आरोपी को मजिस्ट्रेट के सामने तलाशी का अधिकार बताने की बात कही गई, लेकिन उसका कोई रिकॉर्ड नहीं मिला। अदालत ने कहा कि एनडीपीएस एक्ट जैसे सख्त कानून में जांच एजेंसियों को अत्यधिक सावधानी और पारदर्शिता बरतनी चाहिए। यदि जांच में थोड़ी भी चूक होती है तो आरोपी को संदेह का लाभ देना अनिवार्य हो जाता है। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ ठोस और विश्वसनीय साक्ष्य पेश नहीं कर सका। इसलिए आरोपी को एनडीपीएस एक्ट की धारा 20 के तहत बरी किया जाता है। साथ ही अदालत ने आदेश दिया कि नियमानुसार अपील अवधि के बाद जब्त माल को नष्ट किया जाए।