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Bilaspur News: आजादी के सात दशक बाद भी खटली गांव में सड़क सुविधा नहीं

संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर Updated Sat, 31 Jan 2026 11:31 PM IST
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Even after seven decades of independence, Khatli village does not have road facilities.
खटली गांव  के मरीज को पालकी से मुख्य सड़क तक ले जाते ग्रामीण। संवाद
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सड़क तक पहुंचने के लिए पालकी और चारपाई ही मरीजों का सहारा
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मरीजों के लिए काल बनता है ऊबड़-खाबड़ रास्ता

मंगल ठाकुर
बरठीं (बिलासपुर)। एक तरफ देश डिजिटल इंडिया और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर की बात कर रहा है, वहीं दूसरी ओर जिले के विकासखंड झंडूता की ग्राम पंचायत बड़गांव का खटली गांव आज भी विकास की मुख्यधारा से कोसों दूर है। आजादी के सात दशक बीतने के बाद भी इस गांव के लोगों को एक पक्की सड़क नसीब नहीं हो सकी है। आलम यह है कि गांव आज भी अपनी भाग्य रेखा से कटा हुआ महसूस करता है।
गांव में सड़क न होने का सबसे खौफनाक पहलू तब सामने आता है जब कोई बीमार पड़ता है। अस्पताल ले जाने के लिए मरीजों को पालकी या चारपाई पर उठाकर ले जाना यहां की मजबूरी बन चुकी है। खेतों और ऊबड़-खाबड़ रास्तों से होकर गुजरना किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं है। हाल ही में गांव के एक व्यक्ति को पैरालाइज (लकवा) की शिकायत हुई, जिनका उपचार वर्तमान में एम्स में चल रहा है। उन्हें घर से मुख्य सड़क तक लाने-ले जाने के लिए ग्रामीणों को 15 दिन से लगातार चारपाई का सहारा लेना पड़ रहा है। ग्रामीणों में सुरेश कुमार, हरबंस चंदेल, हरदेव चंदेल, ज्ञानचंद, सुभाष शर्मा, संजीव कुमार, नारायण दास व अन्य ने अपनी व्यथा सुनाते हुए बताया कि गांव तक पहुंचने के दो मुख्य मार्ग हैं। बड़गांव स्कूल की तरफ से लगभग 700 मीटर की दूरी। टिहरा के चौकडू चौक से मात्र 500 मीटर की दूरी। हैरानी की बात यह है कि इतना कम फासला होने के बावजूद आज तक किसी भी जनप्रतिनिधि या सरकार ने इस गांव तक सड़क पहुंचाने की जहमत नहीं उठाई। जो कच्चा रास्ता बना भी है, वह बरसात में पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो जाता है, जिससे पैदल चलना भी दूभर हो जाता है। गांव के 13 परिवारों का कहना है कि चुनाव के समय बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं, लेकिन वोट पड़ने के बाद समस्या जस की तस बनी रहती है। सरकार के नुमाइंदों ने कई बार आश्वासन तो दिए, लेकिन समाधान के नाम पर अब तक एक ईंट भी नहीं लगी है। परेशान ग्रामीणों ने अब प्रदेश सरकार और जिला प्रशासन से गुहार लगाई है कि उनकी इस मूलभूत समस्या को प्राथमिकता के आधार पर सुलझाया जाए। उन्होंने मांग की है कि जल्द से जल्द सड़क निर्माण की बाधाओं को दूर कर उन्हें इस मुश्किल जीवन से मुक्ति दिलाई जाए।
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कोट
क्या कहते हैं पंचायत प्रधान
इस पूरे मामले पर पंचायत प्रधान निक्कू राम का कहना है कि पंचायत सड़क निर्माण के लिए तैयार है, लेकिन इसके लिए एक तकनीकी अड़चन है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि ग्रामीण सड़क के दायरे में आने वाले जमीन मालिकों से एनओसी उपलब्ध करवा देते हैं, तो पंचायत तुरंत अगली विभागीय प्रक्रिया शुरू कर देगी।
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