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Bilaspur News: कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन में वन संरक्षण की शर्तों के पालन पर समिति ने उठाए सवाल
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पर्यावरण मंत्रालय की एकीकृत इकाई के उप निरीक्षक को सौंपा ज्ञापन
भगेड़ फ्लाईओवर की पुलिया की जांच और परियोजना निदेशक पर कार्रवाई की मांग
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन परियोजना में भारत सरकार की ओर से जारी वन संरक्षण संबंधी शर्तों के पालन को लेकर फोरलेन विस्थापित एवं प्रभावित समिति ने पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की एकीकृत इकाई के उप निरीक्षक, शिमला को ज्ञापन भेजा है। समिति ने ज्ञापन में वन संरक्षण अधिनियम, 1980 की धारा-2 के तहत परियोजना के लिए निर्धारित शर्त संख्या 5, 14 और 18 के पालन को लेकर स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है। समिति ने 15 जुलाई को कीरतपुर-नेरचौक सड़क निर्माण में परिवर्तित वन भूमि के दोनों ओर बुर्जियों की स्थिति को लेकर बिलासपुर में हुई टेबल मीटिंग का भी हवाला दिया है।
समिति के अनुसार मौके पर यह देखा गया कि वन भूमि के संबंध में निर्धारित शर्तों के अनुरूप कार्य नहीं हुआ है। शर्त संख्या पांच के तहत सड़क की मध्य लाइन में पौधे लगाने और सात से दस वर्ष तक उनकी देखभाल किए जाने का प्रावधान है। समिति ने इस शर्त के पालन की स्थिति की जांच करने का आग्रह किया है। ज्ञापन में शर्त संख्या 14 के तहत पानी के बहाव और निकासी की व्यवस्था का मामला भी उठाया गया है। समिति ने कहा कि पानी के बहाव की उचित व्यवस्था नहीं होने से निजी और सरकारी भूमि को नुकसान पहुंचने की स्थिति बनी है। भगेड़ फ्लाईओवर के साथ पानी की निकासी के लिए बनाई गई पुलिया पर भी सवाल उठाए गए हैं। समिति ने कहा कि पुलिया का निर्माण नाले के पानी की निकासी के लिए किया गया था, लेकिन वर्तमान में इसमें पानी की निकासी नहीं हो रही है और यह शोपीस बनकर रह गई है। समिति ने संबंधित स्थल पर अतिक्रमण की स्थिति का भी उल्लेख करते हुए मौके की जांच करने की मांग की है। इसके साथ ही पुलिया के निर्माण के लिए किए गए टेंडर को सार्वजनिक करने का आग्रह किया गया है। ज्ञापन में 15 जुलाई की टेबल मीटिंग के दौरान दिए गए निर्देशों का भी उल्लेख किया गया है। समिति के अनुसार बैठक में बुर्जियों पर दर्ज आरडी नंबर, बैक बियरिंग, फ्रंट बियरिंग और अक्षांश-देशांतर (लेटिट्यूड-लॉन्गिट्यूड) की लोकेशन 20 दिनों के भीतर उपलब्ध करवाने के निर्देश दिए गए थे। समिति का कहना है कि निर्धारित अवधि के बावजूद मौके और कार्यालय स्तर पर इस संबंध में अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई है। समिति ने कहा कि बुर्जियों की लोकेशन संबंधी जानकारी उपलब्ध करवाने के साथ मौके की स्थिति की भी जांच की जानी चाहिए। ज्ञापन में परियोजना क्षेत्र में लगातार हो रहे अतिक्रमण को रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाने की मांग की गई है। समिति ने भगेड़ फ्लाईओवर के साथ पानी निकासी के लिए बनाई गई पुलिया की जांच करवाने, इसके निर्माण से संबंधित टेंडर को सार्वजनिक करने और वन संरक्षण से जुड़ी निर्धारित शर्तों के पालन की मौके पर जांच करने की मांग की है। इसके अलावा समिति ने मामले में परियोजना निदेशक की भूमिका की जांच कर नियमानुसार उचित कार्रवाई करने का आग्रह किया है।
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भगेड़ फ्लाईओवर की पुलिया की जांच और परियोजना निदेशक पर कार्रवाई की मांग
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन परियोजना में भारत सरकार की ओर से जारी वन संरक्षण संबंधी शर्तों के पालन को लेकर फोरलेन विस्थापित एवं प्रभावित समिति ने पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की एकीकृत इकाई के उप निरीक्षक, शिमला को ज्ञापन भेजा है। समिति ने ज्ञापन में वन संरक्षण अधिनियम, 1980 की धारा-2 के तहत परियोजना के लिए निर्धारित शर्त संख्या 5, 14 और 18 के पालन को लेकर स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है। समिति ने 15 जुलाई को कीरतपुर-नेरचौक सड़क निर्माण में परिवर्तित वन भूमि के दोनों ओर बुर्जियों की स्थिति को लेकर बिलासपुर में हुई टेबल मीटिंग का भी हवाला दिया है।
समिति के अनुसार मौके पर यह देखा गया कि वन भूमि के संबंध में निर्धारित शर्तों के अनुरूप कार्य नहीं हुआ है। शर्त संख्या पांच के तहत सड़क की मध्य लाइन में पौधे लगाने और सात से दस वर्ष तक उनकी देखभाल किए जाने का प्रावधान है। समिति ने इस शर्त के पालन की स्थिति की जांच करने का आग्रह किया है। ज्ञापन में शर्त संख्या 14 के तहत पानी के बहाव और निकासी की व्यवस्था का मामला भी उठाया गया है। समिति ने कहा कि पानी के बहाव की उचित व्यवस्था नहीं होने से निजी और सरकारी भूमि को नुकसान पहुंचने की स्थिति बनी है। भगेड़ फ्लाईओवर के साथ पानी की निकासी के लिए बनाई गई पुलिया पर भी सवाल उठाए गए हैं। समिति ने कहा कि पुलिया का निर्माण नाले के पानी की निकासी के लिए किया गया था, लेकिन वर्तमान में इसमें पानी की निकासी नहीं हो रही है और यह शोपीस बनकर रह गई है। समिति ने संबंधित स्थल पर अतिक्रमण की स्थिति का भी उल्लेख करते हुए मौके की जांच करने की मांग की है। इसके साथ ही पुलिया के निर्माण के लिए किए गए टेंडर को सार्वजनिक करने का आग्रह किया गया है। ज्ञापन में 15 जुलाई की टेबल मीटिंग के दौरान दिए गए निर्देशों का भी उल्लेख किया गया है। समिति के अनुसार बैठक में बुर्जियों पर दर्ज आरडी नंबर, बैक बियरिंग, फ्रंट बियरिंग और अक्षांश-देशांतर (लेटिट्यूड-लॉन्गिट्यूड) की लोकेशन 20 दिनों के भीतर उपलब्ध करवाने के निर्देश दिए गए थे। समिति का कहना है कि निर्धारित अवधि के बावजूद मौके और कार्यालय स्तर पर इस संबंध में अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई है। समिति ने कहा कि बुर्जियों की लोकेशन संबंधी जानकारी उपलब्ध करवाने के साथ मौके की स्थिति की भी जांच की जानी चाहिए। ज्ञापन में परियोजना क्षेत्र में लगातार हो रहे अतिक्रमण को रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाने की मांग की गई है। समिति ने भगेड़ फ्लाईओवर के साथ पानी निकासी के लिए बनाई गई पुलिया की जांच करवाने, इसके निर्माण से संबंधित टेंडर को सार्वजनिक करने और वन संरक्षण से जुड़ी निर्धारित शर्तों के पालन की मौके पर जांच करने की मांग की है। इसके अलावा समिति ने मामले में परियोजना निदेशक की भूमिका की जांच कर नियमानुसार उचित कार्रवाई करने का आग्रह किया है।
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