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Bilaspur News: भराड़ी अस्पताल खुद बीमार, खुले में जल रहा बायोमेडिकल कचरा
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वाटर कूलर के पानी में तैरता मिला कीड़ा
अस्पताल की सफाई और पेयजल व्यवस्था पर उठे सवाल
संवाद न्यूज एजेंसी
भराड़ी (बिलासपुर)। लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध करवाने का दावा करने वाला भराड़ी अस्पताल इन दिनों खुद बदइंतजामी की बीमारी से जूझता नजर आ रहा है। अस्पताल परिसर में बायोमेडिकल कचरे को खुले में जलाए जाने के आरोप सामने आए हैं। वहीं, मरीजों और तीमारदारों के लिए लगाए गए वाटर कूलर के पानी में कीड़ा तैरता नजर आने से पेयजल व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
बरसात के मौसम में स्वास्थ्य विभाग लोगों को दूषित पानी पीने से बचने की सलाह देता है। डायरिया, पीलिया सहित कई जल जनित बीमारियों से बचाव के लिए साफ पेयजल को बेहद जरूरी माना जाता है। ऐसे में यदि अस्पताल के वाटर कूलर के पानी में ही गंदगी और कीड़ा दिखाई दे तो यह मरीजों और तीमारदारों के स्वास्थ्य के लिए चिंता का विषय है।
वहीं अस्पताल परिसर में उपचार के बाद निकलने वाले वेस्ट मटेरियल को खुले में जलाए जाने के आरोप भी लगे हैं। स्वास्थ्य संस्थानों में बायोमेडिकल कचरे के निस्तारण के लिए निर्धारित नियम और व्यवस्थाएं होती हैं। ऐसे कचरे को खुले में जलाने से निकलने वाला धुआं वातावरण को प्रभावित करने के साथ मरीजों, कर्मचारियों और आसपास के लोगों के स्वास्थ्य के लिए भी परेशानी पैदा कर सकता है। अस्पताल में रोजाना क्षेत्र के दर्जनों लोग उपचार के लिए पहुंचते हैं। इनमें बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे भी शामिल होते हैं। ऐसे में अस्पताल की सफाई और पेयजल व्यवस्था में किसी भी तरह की लापरवाही सीधे लोगों के स्वास्थ्य से जुड़ा मामला बन जाती है। भराड़ी अस्पताल की व्यवस्थाओं को लेकर पहले भी शिकायतें सामने आती रही हैं। कभी एक्सरे मशीन की खराबी तो कभी स्टाफ और अन्य जरूरी सुविधाओं की कमी को लेकर सवाल उठते रहे हैं।
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उधर, बीएमओ घुमारवीं डॉ. अनुपम शर्मा ने कहा कि खुले में बायोमेडिकल कचरा जलाने के मामले की जांच की जाएगी। स्वच्छता व्यवस्था को लेकर भी उचित दिशा-निर्देश दिए जाएंगे।
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अस्पताल की सफाई और पेयजल व्यवस्था पर उठे सवाल
संवाद न्यूज एजेंसी
भराड़ी (बिलासपुर)। लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध करवाने का दावा करने वाला भराड़ी अस्पताल इन दिनों खुद बदइंतजामी की बीमारी से जूझता नजर आ रहा है। अस्पताल परिसर में बायोमेडिकल कचरे को खुले में जलाए जाने के आरोप सामने आए हैं। वहीं, मरीजों और तीमारदारों के लिए लगाए गए वाटर कूलर के पानी में कीड़ा तैरता नजर आने से पेयजल व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
बरसात के मौसम में स्वास्थ्य विभाग लोगों को दूषित पानी पीने से बचने की सलाह देता है। डायरिया, पीलिया सहित कई जल जनित बीमारियों से बचाव के लिए साफ पेयजल को बेहद जरूरी माना जाता है। ऐसे में यदि अस्पताल के वाटर कूलर के पानी में ही गंदगी और कीड़ा दिखाई दे तो यह मरीजों और तीमारदारों के स्वास्थ्य के लिए चिंता का विषय है।
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वहीं अस्पताल परिसर में उपचार के बाद निकलने वाले वेस्ट मटेरियल को खुले में जलाए जाने के आरोप भी लगे हैं। स्वास्थ्य संस्थानों में बायोमेडिकल कचरे के निस्तारण के लिए निर्धारित नियम और व्यवस्थाएं होती हैं। ऐसे कचरे को खुले में जलाने से निकलने वाला धुआं वातावरण को प्रभावित करने के साथ मरीजों, कर्मचारियों और आसपास के लोगों के स्वास्थ्य के लिए भी परेशानी पैदा कर सकता है। अस्पताल में रोजाना क्षेत्र के दर्जनों लोग उपचार के लिए पहुंचते हैं। इनमें बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे भी शामिल होते हैं। ऐसे में अस्पताल की सफाई और पेयजल व्यवस्था में किसी भी तरह की लापरवाही सीधे लोगों के स्वास्थ्य से जुड़ा मामला बन जाती है। भराड़ी अस्पताल की व्यवस्थाओं को लेकर पहले भी शिकायतें सामने आती रही हैं। कभी एक्सरे मशीन की खराबी तो कभी स्टाफ और अन्य जरूरी सुविधाओं की कमी को लेकर सवाल उठते रहे हैं।
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उधर, बीएमओ घुमारवीं डॉ. अनुपम शर्मा ने कहा कि खुले में बायोमेडिकल कचरा जलाने के मामले की जांच की जाएगी। स्वच्छता व्यवस्था को लेकर भी उचित दिशा-निर्देश दिए जाएंगे।