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Bilaspur News: एम्स में नियोनेटल ऑक्सिजनेटर बनेंगे मासूम हार्ट मरीजों के लिए संजीवनी

Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Tue, 20 Jan 2026 11:56 PM IST
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heart operation in aims
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बायोलॉजिकल ग्लू से रुकेगा खून, ब्लीडिंग से नहीं जाएगी जान
बिलासपुर एम्स में अब और बेहतरीन लाइफ-सेविंग तकनीक
दिल के ऑपरेशन में लकवे और ब्लीडिंग का खतरा होगा खत्म
हार्ट सर्जरी विभाग के लिए 4,880 अत्याधुनिक उपकरणों का ग्लोबल टेंडर जारी

संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। एम्स बिलासपुर में बहुत जल्द धड़कते हुए दिलों को नई जिंदगी देने का अभियान शुरू होने वाला है। संस्थान ने हार्ट सर्जरी विभाग के लिए जिन 4,880 अत्याधुनिक उपकरणों का ग्लोबल टेंडर जारी किया है, वे केवल मशीनें नहीं बल्कि मरीजों के लिए सुरक्षा कवच हैं। इन उपकरणों के आने के बाद हिमाचल के मरीजों को न केवल पीजीआई चंडीगढ़ की लंबी वेटिंग से निजात मिलेगी, बल्कि उनका ऑपरेशन पहले के मुकाबले कहीं अधिक सुरक्षित और सटीक होगा।
इन हाई-टेक उपकरणों से आम मरीज को सबसे ज्यादा फायदे होंगे। आर्टेरियल फिल्टर हार्ट सर्जरी के दौरान सबसे बड़ा जोखिम यह रहता है कि खून के बहाव के साथ हवा के बुलबुले या सूक्ष्म कण मरीज के दिमाग तक न पहुंच जाएं, जिससे लकवा मारने का खतरा रहता है। एम्स ने जो विशेष आर्टेरियल फिल्टर मंगवाए हैं, वे छलनी की तरह काम करेंगे और खून को दिमाग में भेजने से पहले पूरी तरह शुद्ध करेंगे। इससे मरीज की जान के साथ उसकी याददाश्त और शारीरिक क्षमता भी सुरक्षित रहेगी। हार्ट सर्जरी में ज्यादा खून बहना अक्सर मौत का कारण बनता है। टेंडर में शामिल फाइब्रिन सीलेंट एक क्रांतिकारी तकनीक है। यह एक ऐसा जैविक गोंद है जो ऑपरेशन के दौरान नसों के रिसाव को तुरंत सील कर देता है। इसका फायदा यह होगा कि मरीज को बाहर से खून चढ़ाने की जरूरत कम पड़ेगी और संक्रमण का खतरा भी न्यूनतम होगा। पुराने समय में हाथों से टांके लगाए जाते थे, जिनमें इंफेक्शन और टांके टूटने का डर रहता था। एम्स अब इंटेलिजेंट पावर्ड स्टेपलर का इस्तेमाल करेगा। ये बिजली से चलने वाले स्टेपलर इतने सटीक होते हैं कि घाव को बहुत सफाई से जोड़ते हैं। इसका सीधा फायदा मरीज को यह होगा कि उसे दर्द कम होगा, निशान छोटा पड़ेगा और वह अस्पताल से जल्दी घर लौट सकेगा। प्रदेश में अभी तक कुछ दिन के नवजात शिशुओं की हार्ट सर्जरी के लिए पुख्ता इंतजाम नहीं थे। टेंडर में खास तौर पर नियोनेटल और इन्फेंट ऑक्सिजनेटर शामिल किए गए हैं। ये मशीनें बच्चों के कोमल शरीर के हिसाब से काम करती हैं। अब हिमाचल के उन मासूमों को नया जीवन मिल सकेगा जिनके दिल में पैदाइशी छेद या वाल्व की समस्या होती है। इसके साथ ही कई और उपकरण शामिल हैंं।
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बायोलोजिकल वॉल्व, उम्र भर दवाओं से मिलेगी मुक्ति
हार्ट वॉल्व खराब होने पर एम्स बोवाइन और पोर्सिन वॉल्व लगाएगा। मेकेनिकल वॉल्व के विपरीत, इन वॉल्वो के लगने के बाद मरीज को पूरी जिंदगी खून पतला करने वाली दवाइयां नहीं खानी पड़ेंगी। इससे भविष्य में ब्लीडिंग के कारण होने वाली अन्य बीमारियों का खतरा टल जाएगा और मरीज सामान्य जीवन जी सकेगा।
इनसेट
बीटिंग हार्ट तकनीक, धड़कते दिल का होगा ऑपरेशन
एम्स इंट्राकोरोनरी शंट की भी शामिल करने जा रहा है। इनकी मदद से डॉक्टर मरीज के दिल को बिना रोके ही बाईपास सर्जरी कर सकेंगे। इससे मरीज के रिकवरी समय में भारी कमी आती है और वह बहुत तेजी से चलने-फिरने लायक हो जाता है।
इनसेट
आम आदमी की जेब पर नहीं पड़ेगा बोझ
भले ही ये उपकरण और तकनीकें करोड़ों रुपये की हैं, लेकिन एम्स में यह सुविधा शुरू होने के बाद आयुष्मान भारत और हिम केयर कार्ड धारकों को इनका लाभ मुफ्त मिलेगा। निजी अस्पतालों में जिस हार्ट सर्जरी का खर्च 5 से 8 लाख रुपये आता है, वह एम्स में बेहद किफायती दरों पर उपलब्ध होगी।
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