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Bilaspur News: भराड़ी में हिंदू सम्मेलन, सनातन संस्कृति और सामाजिक एकता पर जोर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
Updated Sat, 10 Jan 2026 11:48 PM IST
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ग्राम पंचायत बम के मेला में आयोजित हिंदू सम्मेलन में लोगों को संबोधित करते वक्ता। स्रोत: आयोजक
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पांच पंचायतों से बड़ी संख्या में लोगों ने कार्यक्रम में लिया भाग
लोगों से अपनी सांस्कृतिक जड़ों को पहचानने, परंपराओं को सहेजने की अपील
संवाद न्यूज एजेंसी
भराड़ी(बिलासपुर)। भराड़ी खंड के हटवाड़ मंडल अंतर्गत ग्राम पंचायत बम के मेला मैदान में शनिवार को हिंदू सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन में आसपास की पांच पंचायतों से बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लेकर कार्यक्रम को सफल बनाया। सम्मेलन का उद्देश्य सनातन संस्कृति की मूल भावना को सुदृढ़ करना, सामाजिक एकता को मजबूत करना और राष्ट्रीय चेतना का विस्तार करना रहा।
सम्मेलन के मुख्य अतिथि स्वामी प्रकाश मुनि ने सनातन धर्म की महत्ता को रेखांकित करते हुए कहा कि सनातन संस्कृति विश्व की सबसे प्राचीन और वैज्ञानिक जीवन पद्धति है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में समाज में वैचारिक भ्रम, सांस्कृतिक विकृतियां और सामाजिक विघटन के प्रयास बढ़ रहे हैं, ऐसे में हिंदू समाज को जागरूक करने के लिए इस तरह के आयोजनों की अत्यंत आवश्यकता है। लोगों से अपनी सांस्कृतिक जड़ों को पहचानने, परंपराओं को सहेजने और भावी पीढ़ी को संस्कारवान बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि मजबूत समाज की नींव संस्कारों और संस्कृति से ही रखी जाती है। सम्मेलन की अध्यक्षता सेवा निवृत्त उपनिदेशक शिक्षा विभाग राजकुमार शर्मा ने की। उन्होंने कहा कि समाज में शिक्षा के साथ-साथ संस्कारों का होना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि ऐसे सम्मेलन समाज को सही दिशा देने का कार्य करते हैं और लोगों में धर्म, संस्कृति तथा राष्ट्र के प्रति सकारात्मक सोच विकसित करते हैं।
मुख्य वक्ता के रूप में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विभाग संघचालक शांति स्वरूप ने संघ के सौ वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर आयोजित की जा रही गतिविधियों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि संघ द्वारा सेवा, समरसता और राष्ट्र निर्माण के उद्देश्य से समाज के प्रत्येक वर्ग को जोड़ने के लिए विभिन्न रचनात्मक कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि सकारात्मक सामाजिक परिवर्तन तभी संभव है जब प्रत्येक व्यक्ति अपने कर्तव्यों को समझते हुए सक्रिय भूमिका निभाए। सम्मेलन के दौरान सामाजिक परिवर्तन की आवश्यकता पर बल देते हुए उपस्थित जनसमूह को “पंच परिवर्तन” के अंतर्गत पांच संकल्प भी दिलाए गए। इनमें सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण, स्वदेशी के प्रति जागरूकता, पारिवारिक मूल्यों की रक्षा और नागरिक कर्तव्यों के पालन जैसे विषय शामिल रहे। वक्ताओं ने कहा कि ये संकल्प समाज को सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होंगे।
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लोगों से अपनी सांस्कृतिक जड़ों को पहचानने, परंपराओं को सहेजने की अपील
संवाद न्यूज एजेंसी
भराड़ी(बिलासपुर)। भराड़ी खंड के हटवाड़ मंडल अंतर्गत ग्राम पंचायत बम के मेला मैदान में शनिवार को हिंदू सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन में आसपास की पांच पंचायतों से बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लेकर कार्यक्रम को सफल बनाया। सम्मेलन का उद्देश्य सनातन संस्कृति की मूल भावना को सुदृढ़ करना, सामाजिक एकता को मजबूत करना और राष्ट्रीय चेतना का विस्तार करना रहा।
सम्मेलन के मुख्य अतिथि स्वामी प्रकाश मुनि ने सनातन धर्म की महत्ता को रेखांकित करते हुए कहा कि सनातन संस्कृति विश्व की सबसे प्राचीन और वैज्ञानिक जीवन पद्धति है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में समाज में वैचारिक भ्रम, सांस्कृतिक विकृतियां और सामाजिक विघटन के प्रयास बढ़ रहे हैं, ऐसे में हिंदू समाज को जागरूक करने के लिए इस तरह के आयोजनों की अत्यंत आवश्यकता है। लोगों से अपनी सांस्कृतिक जड़ों को पहचानने, परंपराओं को सहेजने और भावी पीढ़ी को संस्कारवान बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि मजबूत समाज की नींव संस्कारों और संस्कृति से ही रखी जाती है। सम्मेलन की अध्यक्षता सेवा निवृत्त उपनिदेशक शिक्षा विभाग राजकुमार शर्मा ने की। उन्होंने कहा कि समाज में शिक्षा के साथ-साथ संस्कारों का होना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि ऐसे सम्मेलन समाज को सही दिशा देने का कार्य करते हैं और लोगों में धर्म, संस्कृति तथा राष्ट्र के प्रति सकारात्मक सोच विकसित करते हैं।
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मुख्य वक्ता के रूप में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विभाग संघचालक शांति स्वरूप ने संघ के सौ वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर आयोजित की जा रही गतिविधियों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि संघ द्वारा सेवा, समरसता और राष्ट्र निर्माण के उद्देश्य से समाज के प्रत्येक वर्ग को जोड़ने के लिए विभिन्न रचनात्मक कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि सकारात्मक सामाजिक परिवर्तन तभी संभव है जब प्रत्येक व्यक्ति अपने कर्तव्यों को समझते हुए सक्रिय भूमिका निभाए। सम्मेलन के दौरान सामाजिक परिवर्तन की आवश्यकता पर बल देते हुए उपस्थित जनसमूह को “पंच परिवर्तन” के अंतर्गत पांच संकल्प भी दिलाए गए। इनमें सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण, स्वदेशी के प्रति जागरूकता, पारिवारिक मूल्यों की रक्षा और नागरिक कर्तव्यों के पालन जैसे विषय शामिल रहे। वक्ताओं ने कहा कि ये संकल्प समाज को सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होंगे।